मिलिए दुनिया के सबसे 'खूंखार' जल्लाद से, जो अपने ही 17 'दोस्तों' को लटका चुका है फांसी
Meet the world's most brutal executioner, who has hanged his own 17 'friends' बांग्लादेश का बाबुल मियां नाम का जल्लाद जो दुनिया सबसे क्रूर जल्लाद माना जाता हैं,जानिए कैसे बना वह कू्र जल्लाद,
बेंगलुरु। निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों को कोर्ट के अगले आदेश तक फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा। यह आदेश मिलते ही तिहाड़ जेल प्रशासन ने फांसी देने की तैयारियों को रोक दिया। फांसी के लिए मेरठ से पहुंचे पवन जल्लाद जिसने निर्भया के दरिंदों के लिए फंदा भी तैयार कर लिया था उसे भी वापस भेज दिया गया है।

बता दें भारत की तरह अन्य कई देशों में भी जिन अपराधियों को मौत की सजा सुनाई जाती हैं उन्हें जेल में जल्लाद ही फांसी के फंदे पर लटकाता है। आमतौर पर जल्लाद का नाम सुनते ही लोगों के शरीर में सिहरन सी पैदा हो जाती है। लोग सोचते हैं कि आखिर कैसे होते होंगे वो जल्लाद जो अपराधियों को पल भर में फांसी पर लटका देते हैं और उन्हें जरा सी भी दया नहीं आती। अब जब जल्लादों की बात चली है तो आज हम आपको दुनिया के सबसे क्रूर जल्लाद से मिलवाते हैं जिसने अपने ही 17 दोस्तों को एक-एक कर फांसी के फंदे पर चढ़ाकर मौत दी। यह दुनिया का इकलौता जल्लाद है, जिसने ऐसा किया है। आइए जानते हैं कि कैसे वो खूंखार जल्लाद बना और कैसे उसके दिल में आयी इतनी क्रूरता? साथ ही जानिए दुनिया के अन्य टॉप के जल्लादों से जुड़ी जानकारी...

इस जल्लाद का नाम बाबुल मियां हैं और वह बंगलादेश में रहता हैं। लगभग दस वर्षों से अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाने वाला बाबुल मियां स्वयं भी एक हत्या करने के कारण 21 सालों तक जेल में सजा काट चुका है। हत्या के आरोप में बाबुल मियां को 31 साल की सजा हुई थी लेकिन जेल में सजा पूरी होने से पहले ही जेल अधिकारियों के सलाह देने पर उसने यह जल्लाद का पेशा चुना।

बाबुल मियां का दावा उसने नहीं की थी हत्या
किशोर बाबुल मियां को हत्या के जुर्म में जेल में भेजा गया था लेकिन बाबुल मियां दावा करते हैं कि यह हत्या उन्होंने की ही नहीं बल्कि उनके बड़े भाई ने किया था। उनके बड़े भाई ने निजी लड़ाई के कारण पड़ोसी को मार दिया और परिवार वालों ने दबाव डाला कि 17 साल के बाबुल मिया इस अपराध को अपने सिर लें। उन्होंने सोचा कि मैं छोटा हूं जज मुझे बख्श देंगे। लेकिन मुझे 31 साल की सजा मिली और मेरे भाई को 12 की और एक और भाई को 10 साल कैद की सजा मिली थी। लगभग 21 साल जेल में बिताने के बाद साल 2010 में बाबुल मियां को क्षमादान मिला और उन्हें रिहा कर दिया गया था।

इस कारण कहलाए क्रूर जल्लाद
बाबुल मियां जब जेल में बंद थे तब उनके कई दोस्त बन गए थे, जो किसी न किसी जुर्म में सजा काट रहे थे। लेकिन जब एक-एक कर उन लोगों को अदालत द्वारा सजा-ए-मौत मिली तो उन्ही 17 दोस्तों को बाद में बाबुल मियां ने फांसी पर लटकाया। इसलिए उन्हें यह दुनिया के सबसे क्रूर जल्लाद का तमगा मिल गया।

राष्ट्रपति के हत्यारों को भी लटका चुके हैं फांसी
बाबुल मियां बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के पांच हत्यारों को भी साल 2010 में फांसी पर लटका चुके हैं और वो सभी वहां के सैन्य अधिकारी थे। मालूम हो के साल 1975 में बांग्लादेश में तख्तापलट करने के लिए इन सैन्य अधिकारियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास पर हमला बोल दिया था और राष्ट्रपति सहित उनकी पत्नी, उनके तीन बेटे और दो बहुओं समेत 20 अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

इस लालच में बाबुल मियां बने जल्लाद
बाबुल मियां उन 15 कैदियों में से हैं जिन्हें जेल में जल्लाद बनने की ट्रेनिंग दी गई थी जो ट्रेनिंग के बाद से बांग्लादेश की जेलों में जल्लाद की नौकरी कर रहे। एक बार भारत में 2004 के बाद एक अपराधी को फांसी की सजा देने की बारी आई तो देश में जल्लाद ही नहीं मिले। जबकि बांग्लादेश के पास कई जल्लाद थे। मीडिया को दिए साक्षात्कार में बाबुल मियां ने बताया कि मुझे नहीं मालूम था कि जेल केस सिपाहियों ने मुझे क्यों चुना। जेल प्रमुख ने मुझे कहा कि अगर मैं जल्लाद बन जाऊं तो वह हर फांसी पर मेरी सजा के दो महीने कम कर देंगे और उन्होंने कहा कि यह आसान काम होगा तो मैंने मान लिया।

रोंगटे खड़े करने वाला भी किया अनुभव
बाबुल मियां वर्तमान समय में लगभग 50 साल के हैं उनके अनुसार अगर आप भावुक और कमजोर हैं तो यह काम नहीं कर सकते। आप गलतियां भी नहीं कर सकते क्योंकि जेलर बहुत नाराज होते हैं। सामान्य तौर पर फांसी की सजा बिना किसी मुश्किल के पूरी हो जाती है। लेकिन मिया कहते हैं कि जल्लाद के तौर पर उन्हें भयंकर अनुभव भी हुए हैं। खास तौर पर तब जब फांसी का फंदा तैयार करने में कैदी की ऊंचाई, वजन को नहीं देखा गया। ऐसी स्थिति में बहुत अकल्पनीय भयंकर स्थिति पैदा हो जाती है जिससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

बांग्लादेश में फांसी को लेकर ये है परंपरा
बांग्लादेश में फांसी को लेकर एक पुरानी परंपरा है इसके अनुसार फांसी की सजा हमेशा आधी रात को बारह बज कर एक मिनट पर ही दी जाती है। इस बारे में कैदी और उनके परिजनों को एक दो दिन पहले सूचना दे दी जाती है। बांग्लादेश में फांसी की सजा ब्रिटिश और पाकिस्तानी शासन के बाद आई। यहां 1971 से अब तक करीब 500 से अधिक लोगों को फांसी की सजा दी जा चुकी है और 15 ,000 को मृत्युदंड सुनाया गया है। बांग्लादेश में सिंगापुर, जापान, ईरान जैसे कुछ देशों की तरह फांसी के लिए जल्लाद का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही एक जल्लाद बाबुल मिया हैं जिन्हें इसकी ट्रेनिंग दी गई है।

ये है पूरी दुनिया के टॉप के खूंखार जल्लाद
अमेरिका का एड्विन जल्लाद
एड्विन डेविसअमेरिका का सबसे बड़ा जल्लाद माना जाता है। साल 1890 से 1914 के बीच उसने कुल 240 लोगों को मौत की सजा दी थी। वहां पहले इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाकर अपराधियों को सजा-ए-मौत दी जाती थी। एड्विन भी अपराधी को मारने के लिए उसे इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाकर उस पर एक हजार वोल्ट का करंट छोड़ा था, लेकिन उससे उसकी मौत नहीं हुई, जिसके बाद एड्विन ने उसपर 2000 वोल्ट का करंट छोड़ा, जिससे अपराधी की मौत हो गई।

बिट्रिश का क्रूर जल्लाद
ब्रिटिश जल्लाद विलियम कैलक्रॉफ्ट 45 साल के करियर में 450 अपराधियों को फांसी पर लटका चुका है। इसे क्रूर जल्लाद इसलिए कहा जाता है, क्योंकि फांसी देते वक्त अगर अपराधी की मौत नहीं होती थी वो उनके कंधे पर कूद कर चढ़ जाता है, जिसके भार से अपराधियों की पल भर में मौत हो जाती थी।
थॉमस डैरिक
थॉमस डैरिक 17वीं सदी का एक अंग्रेज जल्लाद था। उसने अपने करियर में 3000 से ज्यादा लोगों को फांसी पर लटकाया था। उसने अपराधियों को फांसी पर लटकाने के लिए एक नया तरीका भी इजाद किया था और वो उसी तरीके से उन्हें फांसी पर लटकाता था। डैरिक के बारे में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि वह खुद एक अपराधी था। उसे एक दुष्कर्म के आरोप में मौत की सजा मिली थी, वह जल्लाद इस शर्त पर बना था कि उसकी फांसी की सजा माफ कर दी जाए।

ये जल्लाद अपराधियों को जलाकर तलवार और चाकू गोदकर देता था मौत
जर्मनी के फ्रैंज श्मिट 15वीं शताब्दी में अपने 45 साल के करियर में 361 लोगों को मौत के घाट उतारा था। उसने एक डायरी में इस बारे में विस्तार से लिखा था। चूंकि उस समय फांसी देने का चलन नहीं था, इसलिए वो अपराधियों को जलाकर, तलवार से उनका सिर काटकर या चाकू से गोदकर उन्हें मौत की नींद सुलाता था।
मिस्र का जल्लाद
साल 1947 में मिस्र के टांटा में पैदा हुआ हुसैन कुर्रानी हुसैन अल फिकी यहां का सबसे चर्चित जल्लाद है। अपने करियर में उसने 1070 लोगों को फांसी पर लटकाया है। उसने अपनी जल्लादी करियर की शुरुआत साल 1998 से की थी। अपनी जिंदगी की पहली फांसी देने से पहले वह इतना चिंतित था कि दो दिनों तक सोया नहीं था। हुसैन पहले मिस्र की सेना में था, लेकिन बाद में जल्लाद बन गया।

वैसिली ब्लॉखिन ने 28 दिन में दी 6 हजार कैदियों को सजा-ए-मौत
वैसिली ब्लॉखिन रूसी नेता स्टालिन के बेहद करीबी माने जाने वाले वैसिली ने करीब 10 हजार कैदियों को मौत के घाट उतारा था। कहा जाता है कि वैसिली ने 28 दिन में करीब 10 घंटे लगातार छह हजार कैदियों को गोली मार कर सजा-ए-मौत दी थी। 3 फरवरी 1955 को उसने खुद को भी गोली मार ली।
3 हजार कैदियों को दी फांसी
जर्मनी के जॉन रिचर्ट नामक जल्लाद ने साल 1939 से 1945 तक सबसे ज्यादा लोगों को फांसी पर लटकाया था। वह एक नाजी था। कहते हैं कि उसने अपने करियर में 3000 से ज्यादा लोगों को फांसी पर लटकाया था। बाद में मनोरोगी बन गया और उसकी मौत हो गयी।
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