Me Too: शिवसेना ने मांगा एमजे अकबर का इस्तीफा, स्मृति ईरानी बोलीं- जिस पर आरोप वही दे जवाब
Me Too: स्मृति ईरानी ने कहा, अकबर ही दें यौन शोषण के आरोपों पर जवाब
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नई दिल्ली। यौन शोषण के आरोपों से घिरे विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगे हैं, उस व्यक्ति को ही इस बारे में जवाब देना चाहिए। वहीं शिवसेना की नेता मनीषा कयांदे ने कहा कि भाजपा पारदर्शिता की बात करने वाली भाजपा को एमजे अकबर पर लगे आरोपों पर गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री पद से इस्तीफा दें जांच में सहयोग दें। जांच पूरी हो जाने के बाद पार्टी को उनपर स्टैंड ले।

मैं फेमिनिस्ट नहीं हूं: ईरानी
स्मृति ईरानी ने कहा है कि जिस व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं, उस व्यक्ति को ही इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि जब ये घटनाएं हुईं तो मैं वहां नहीं थी। उन्होंने कहा, मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि मीडिया अपने महिला साथियों के साथ खड़ा है। यौन उत्पीड़न की घटनाओं को सामने लाने वाली महिलाओं का न तो मजाक उड़ाना और न ही उन्हें शिकार बनाया जाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि जिन महिलाओं ने आवाज उठाई है उन्हें इंसाफ मिलेगा।
एक और सवाल पर ईरानी ने कहा कि वो फेमिनिस्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं नारीवादी नहीं हूं क्योंकि खुद को इंसान मानना नारीवादी नहीं मानवता की निशानी है। किसी को एक खास ढांचे में ढलने या नाम के लिए बाध्य न करें। ये मुझे दुनियाभर में स्वीकार हो सकता है लेकिन अपने देश में मुझे सिर्फ इसलिए नारीवादी ना कहें क्योंकि मैं महिलाओं का सम्मान करती हूं।

मेनका ने की जांच की मांग
इससे पहले महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी मंत्रिमंडल के अपने साथी एमजे अकबर के ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों की जांच की मांग कर चुकी हैं। गांधी ने कहा कि ऊंचे ओहदे पर बैठे पुरुष अक्सर ऐसा करते हैं, इसकी जांच हो। मेनका गांधी पहली भाजपा नेता हैं जिन्होंने पूर्व पत्रकार और विदेश राज्य मंत्री एमजे पर लगे आरोपों के जांच की मांग की है। मंत्रिमंडल की और महिला सदस्य सुषमा स्वराज उन पर सवाल को टाल गई थीं।

अकबर पर लगे हैं शोषण के आरोप
पत्रकारिता से राजनीति में आन वाले विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के ऊपर कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पत्रकारों का कहना है कि अकबर इंटरव्यू के लिए बुलाकर गलत बर्ताव करते थे। मीटू कैपें के तहत इन आरोपों पर सरकार से सवाल हो रहे हैं। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी ये मामला उठाया है और सवाल किया है कि आखिर उनका इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है।












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