गर्त में जा रही बसपा, छिन सकता है राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। बहुजन समाज पार्टी गर्त में मिलती जा रही है। उसका राष्ट्रीय दल का दर्जा भी संकट में है। लोकसभा चुनावों के बाद हालिया महाराष्ट्र और हरिय़ाणा विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी को किसी ने तवज्जों नहीं दी। दलितों ने लगता है उसका हर जगह साथ छोड़ दिया। हरिय़ाणा में उसने कांग्रेस के पूर्व सांसद अरविंद शर्मा को अपने भावी मुख्यमंत्री के रूप में उतारा। पर वे ही चुनाव हार गए।

बहुजन समाज पार्टी ने महाराष्ट्र और हरिय़ाणा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा। पर उसे हरिय़ाणा में एक ही सीट मिली। उसका वोट शेयर रहा मात्र 4.4 फीसद। 2009 के चुनाव में मिले थे उसे 6.73 फीसद वोट। महाराष्ट्र में उसे मिले 2.2 फीसद वोट। साल 2009 में मिले थे 2.35 फीसद वोट यानी उसे हार ही मिलती रही।
धूल में मिली लोकसभा चुनाव में
अगर बात बीते लोकसभा चुनाव की करें तो उत्तर प्रदेश के नतीजे बहुजन समाज पार्टी के लिए अस्तित्व का ही संकट बन गए हैं लोकसभा में बसपा शून्य पर पहुंच गई। हालांकि कहने वाले कहते रहे हैं कि बसपा पास अपना सबसे समर्पित काडर और वोटबैंक है चुनावी आंकड़े भी बताते हैं कि वोट पाने के मामले में बसपा देश की तीसरी बड़ी पार्टी थी। उत्तर प्रदेश में बसपा को 19.6 फीसदी वोट मिले थे जबकि राष्ट्रीय स्तर पर उसके वोटों की हिस्सेदारी 4.1 है।
अगर बात गुजरे दौर की करें तो बसपा ने शून्य का आंकड़ा पहले चुनाव 1985 में देखा था। उसके बाद से उसकी सीटों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ था अपने चतुर राजनीतिक गठजोड़ों और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए बसपा ने बहुत कम समय में देश की राजनीति में अपना स्थान बनाया था इसके पीछे एक सरकारी कर्मचारी कांशीराम की दूरगामी सोच काम कर रही थी।
फिलहाल बसपा के पास न तो केंद्र में करने के लिए कुछ है न ही राज्य में। ऐसे में जब वह 2017 के विधानसभा चुनाव में जाएगी तो सपा या भाजपा की तरह उसके ऊपर जवाबदेही का कोई बोझ नहीं होगा। बहरहाल,जानकारों का कहना है कि बसपा के लिए फिऱ से देश की राजनीति में वापसी करना बहुत आसान नहीं होगा।












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