MasterChef Gadkari : डॉ मनमोहन सिंह की तारीफ करने पर कांग्रेस, जयराम रमेश बोले- अब पचा सकती हैं वित्त मंत्री
कांग्रेस ने गडकरी को MasterChef Gadkari करार दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने वित्त मंत्री सीतारमण पर निशाना साधा। MasterChef Gadkari Congress Finance Minister Sitharaman 1991 reforms half-baked
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1991 के आर्थिक सुधारों को "आधे-अधूरे" या अधपके (Half Baked) करार दिया था। कुछ दिनों बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने डॉ मनमोहन सिंह की तारीफ की। इसे लेकर कांग्रेस ने गडकरी को MasterChef Gadkari करार दिया। गडकरी ने मंगलवार को कहा था कि देश पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 1991 में वित्त मंत्री के रूप में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों के लिए उनका ऋणी है।

गडकरी Vs वित्त मंत्री सीतारमण
गौरतलब है कि साल 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह की अगुआई में भारत में आर्थिक सुधार हुए। इस संबंध में वित्त मंत्री सीतारमण ने गत सप्ताह में कहा, 1991 के आर्थिक सुधारों को वित्त मंत्री ने आधे-अधूरे करार दिया। अब कांग्रेस ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 1991 के सुधारों को "अधूरा" बताने वाली उनकी टिप्पणी को लेकर कटाक्ष किया। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा के लिए गडकरी को "मास्टरशेफ नितिन गडकरी" करार दिया। कांग्रेस ने कहा कि गडकरी ने मनमोहन सिंह को पूर्ण श्रद्धांजलि देकर वित्त मंत्री के बयान को पूरी और अच्छी तरह से पकाया है।

आशा है वित्त मंत्री इसे पचा सकती हैं
बुधवार को वित्त मंत्री सीतारमण पर कटाक्ष करते हुए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "16 सितंबर को, मैडम वित्त मंत्री ने 1991 के सुधारों को 'आधा-पका' करार देकर छोटा दिखाया गया था। 1991 के आर्थिक सुधारों के लिए डॉ. मनमोहन सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कल, मास्टर शेफ गडकरी ने इसे पूरी तरह से बेक किया है। मुझे उम्मीद है कि वह (वित्त मंत्री सीतारमण) अब इसे पचा सकती हैं।

क्या बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण
इससे पहले विगत सितंबर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, सीतारमण ने कहा था कि 1991 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधार "आधे-अधूरे सुधार" (half-baked reforms) थे। उस समय अर्थव्यवस्था को सही तरीके से ओपन नहीं बनाया गया था। वित्त मंत्री ने कहा कि इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की सख्ती के कारण अनुसार देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी देशों और विदेशी निवेश के लिए उदार बनाया गया था।
नीचे देखिए जयराम रमेश का ट्वीट--

नितिन गडकरी ने क्या कहा ?
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था, "उदार अर्थव्यवस्था के कारण देश को नई दिशा मिली, उसके लिए देश मनमोहन सिंह का ऋणी है।" गडकरी ने यह भी याद किया कि पूर्व मंत्री द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों के कारण ही 1990 के दशक के मध्य में महाराष्ट्र में सड़कें बनाने के लिए धन जुटाने में मदद मिली।

31 साल पहले भारत की आर्थिक आजादी !
2004 में डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने से पहले अर्थशास्त्री, रिजर्व बैंक गवर्नर और वित्त मंत्री रह चुके हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में 1991 के फैसले का जिक्र कर 24 जुलाई, 1991 को भारत की आर्थिक आजादी का दिन कहा गया। संक्षेप में इतना ही काफी है कि 1991 के पहले लाइसेंस परमिट राज था, यानी सरकारें तय करती थीं कि किस फसल या सामान का उत्पादन कितना होगा, कीमतें क्या होंगी ?

क्या हैं 1991 का आर्थिक उदारीकरण
1991 में मनमोहन सिंह नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते वित्त मंत्री थे। इस सरकार ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि उदारीकरण समय की मांग है। वैश्वीकरण के दौर में सरकारी निवेश कम करने के साथ-साथ निजी कंपनियों को प्रोत्साहन और आजादी मिलनी चाहिए। खुले मार्केट को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया। आर्थिक मामलों के जानकार कहते हैं कि आज 31 साल बाद पीछे मुड़कर देखने पर साफ लगता है कि 1991 में रचे गए आर्थिक इतिहास के कारण भारत विशाल अर्थव्यवस्था बन चुका है












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