Asteroid 1998 OR2: क्या होते हैं उल्का पिंड, क्यों लोग रहते हैं भयभीत, जानिए पूरा सच
नई दिल्ली। इस वक्त पूरा विश्व कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में कोरोना वायरस से पिछले 24 घंटों में 4,982 लोगों की मौत हो चुकी है तो अब तक विश्व में लगभग दो लाख लोग वायरस की चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं तो इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर अंतरिक्ष से आई है कि 29 अप्रैल की सुबह 1998 OR2 नाम का उल्कापिंड धरती के पास से गुजरेगा, जिसकी गति अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार 19000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

'उल्कापिंड के धरती से टकराने की संभावना ना के बराबर'
हालांकि नासा ने लोगों से साफ कहा है कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस उल्कापिंड के धरती से टकराने की संभावना ना के बराबर है लेकिन उल्का पिंड का नाम सुनते ही लोगों के दिलों में दहशत जन्म ले लेती है, ऐसे में यहां ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर ये उल्का पिंड होते क्या हैं और लोग क्यों इससे भयभीत रहते हैं?
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उल्का पिंड होते क्या हैं?
दरअसल आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का यानी कि meteor कहा जाता है और उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड यानी कि meteorite कहा जाता है, हर रात को उल्काएं अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं लेकिन इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या बेहद कम होती है।

'उल्कापिंडों' का वर्गीकरण संगठन के आधार पर होता है
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनका महत्व बहुत अधिक है क्योंकि एक तो ये अति दुर्लभ होते हैं, दूसरे आकाश में विचरते हुए विभिन्न ग्रहों के संरचना के ज्ञान के प्रत्यक्ष स्रोत केवल ये ही पिंड ही हैं, उल्कापिंडों का मुख्य वर्गीकरण उनके संगठन के आधार पर किया जाता है, कुछ तो पिंड लोहे, निकल या मिश्रधातुओं से बने होते हैं और कुछ सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर सदृश होते हैं, लोहे, निकल या मिश्रधातुओं को 'धात्विक' और सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर को 'आश्मिक उल्कापिंड' कहते हैं।
मास्क लगाए शख्स की तरह नजर आ रहा था Asteroid
नासा के सेंटर फॉर नियर-अर्थ स्टडीज के अनुसार, बुधवार 29 अप्रैल को सुबह 5:56 बजे ईस्टर्न टाइम में उल्कापिंड के पृथ्वी के पास से होकर गुजरेगा, जिसका नाम 1998 OR2 उल्का दिया गया है, इसे सबसे पहले नासा ने साल 1998 में देखा था, हाल ही में NASA ने एक तस्वीर भी जारी की थी जिसमें ये Asteroid किसी मास्क लगाए शख्स की तरह नजर आ रहा था।
डीएआरटी मिशन
दरअसल अंतरिक्ष में उड़ते असंख्य एस्ट्रॉयड पृथ्वी के लिए हमेशा से एक बड़ा खतरा बने रहे हैं, एस्ट्रॉयड की टक्कर पृथ्वी पर मानव जाति के सर्वनाश का कारण बन सकती है। भविष्य में इस तरह की आकाशीय दुर्घटनाओं से निपटने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक एक खास मिशन पर काम कर रहे हैं, जिसे कि 'डबल एस्ट्रॉयड रीडारेक्शन टेस्ट' (डीएआरटी) नाम दिया गया है, जिसमें क्षुद्रग्रहों पर स्पेसक्राफ्ट के जरिए जोरदार प्रहार किया जाएगा,जिससे पृथ्वी की ओर आ रहे क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) का दिशा परिवर्तन हो जाए, डीएआरटी मिशन पर नासा के साथ-साथ यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) और ऑब्जर्वेटरी ऑफ द फ्रेंच रेविएरा भी काम कर रहे हैं।

खास बात
बता दें कि साल 2013 में लगभग 20 मीटर लंबा एक उल्कापिंड वायुमंडल में टकराया था, एक 40 मीटर लंबा उल्का पिंड 1908 में साइबेरिया के वायुमंडल में टकरा कर जल गया था।












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