संसद में पठानकोट आतंकी हमले का सच बताया रक्षामंत्री पर्रिकर ने

नई दिल्ली। लोकसभा में पठानकोट हमले के बारे में सदन में बोलते हुए रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने पूरे मामले में देश के सामने तथ्य को रखा। पर्रिकर ने कहा कि पहले की सरकार मे एक आतंकी के बदले एक जवान शहीद होता था लेकिन अब एक जवान के बदले तीन लोगों को मार गिराया जाता है।

Manohar Parrikar says we kill 3 if our 1 Jawan dies speaks over Pathankot terror Attack

पर्रिकर ने कहा ताजा आंकड़ों के अनुसार हमने 104 आतंकियों को मार गिराया है। जबकि 31 जवान हमारे शहीद हुए हैं। इसके साथ ही रक्षामंत्री ने पठानकोट आतंकी हमले ने विपक्ष पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन में लोगों के पास मीडिया से मिली जानकारी ही उपलब्ध है, जबकि मीडिया को पठानकोट में जाने की इजाजत नहीं थी।

पर्रिकर के भाषण के मुख्य अंश

  • यह हमला युद्ध की तरह माना जाना चाहिए।
  • पठानकोट में आतंकियों को हमने 200 मीटर के भीतर घेरने में सफलता पायी, जिसके चलते बड़ी घटना को रोका गया।
  • जिस अधिकारी ने आतंकियों की शव की जांच की थी, उनके पास 2000 बम डिफ्यूज करने का अनुभव है, उस वक्त शव को हटाने में जो हादसा हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था।
  • मैंने साफ कर दिया था कि आतंकियों को बिना किसी जवान को गंवाये पकड़ने या मारने की कोशिश करिये।
  • मैंने आर्मी चीफ को साफ कहा था कि सेना के किसी भी जवान को हम शहीद होने नहीं देना चाहते हैं, अपना समय लीजिए, किसी भी दबाव में आने की जरूरत नहीं।
  • यह घटना 43 घंटे चला, ना कि तीन या चार दिन तक चला।
  • हमारे और गृहमंत्री के बीच बेहतर को-ऑर्डिनेशन है, ट्वीट मे कमी हो सकती है।
  • 4.30 बजे सेना पठानकोट पर पहुंच गयी थी।
  • गरुडा कमांडो को लांच किया गया था मौके पर, एनएसजी को नहीं।
  • पठानकोट एयरबेस पर सेना के उपकरण थे और 3000 सेना परिवार रहते थे, ऐसे में एनएसजी को लगाया गया।
  • 7-8 किलोमीटर के दायरे में सेना को तैनात कर दिया गया था। 10 मिनट की नोटिस किसी किसी भी जगह पर सेना की क्यूआरटी तैनात थी।
  • चार हेलीकॉप्टर को हमने खोजबीन के लिए तैनात किया।
  • पठानकोट के पास अन्य तीन मिलिट्री बेस की सुरक्षा को बढ़ाया गया।
  • 6.15 एसएसपी पठानकोट ने भी यही जानकारी दी।
  • सुबह 5.55 बजे हमें जानकारी मिली की आतंकी पठानकोट की ओर आ सकते हैं।
  • 3.30 बजे जब जब एनएसए ने बैठक की तो आर्मी चीफ वहां मौजूद थे, उस वक्त आतंकियों के होने की पुख्ता जानकारी नहीं थी।
  • पंजाब आने की वजह यह थी कि जम्मू-कश्मीर में बढ़ी सुरक्षा है।
  • राजनीति के लिए सेना की खुफिया जानकारी को भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • लोगों के पास जानकारी का स्रोत मीडिया रिपोर्ट है, जबकि किसी भी मीडियापर्सन को पठानकोट जाने की इजाजत नहीं थी।
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