Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Manmohan Singh Struggle Story: लैंप में पढ़ाई, मीलों पैदल स्कूल का सफर, शर्मीला स्वभाव; कुछ ऐसा था बचपन

Manmohan Singh Struggle Story: भारत के 10 साल प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिख परिवार में जन्में मनमोहन सिंह का भारत को गति देने में अहम योगदान रहा है। खास बात यह है कि मनमोहन सिंह ने बचपन से ही संघर्ष का स्वाद चख लिया था। चाहे वह देश के विभाजन के पाकिस्तान से भारत आना हो या गरीब परिवार का दंश हो। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से ऊंचाइयों को छूआ।

अभावों में बीता बचपन कब सम्मान में बदल गया उन्हें खुद इस बात का अहसास नहीं हुआ। क्या कोई सोच सकता है कि कभी देश के पीएम की कुर्सी पर बैठने वाले मनमोहन सिंह बचपन में शर्मीले मिजाज के थे? आइए जानते हैं बचपन के कुछ किस्से...

Manmohan Singh Struggle Story

लैंप की रोशनी में पढ़ाई, मीलों तक पैदल स्कूल का सफर

26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के गाह गांव (अब पाकिस्तान में) में जन्मे मनमोहन सिंह एक गरीब किसान परिवार से थे। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी नानी ने उनकी परवरिश की। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया।मनमोहन सिंह का बचपन अभावों में बीता। बिजली न होने के कारण वे मिट्टी के तेल के लैंप की रोशनी में पढ़ाई करते थे। स्कूल मीलों दूर था, लेकिन उन्होंने पैदल चलकर अपनी शिक्षा पूरी की।

पढ़ाई के प्रति गहरी लगन

डॉ. मनमोहन सिंह बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थे। पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें स्कॉलरशिप मिली और वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय पहुंचे।

  • कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1957): यहां उन्होंने अर्थशास्त्र में ऑनर्स डिग्री प्रथम श्रेणी में पूरी की।
  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (1962): यहां से उन्होंने डी.फिल की उपाधि हासिल की।

डॉ. सिंह ने हमेशा अपनी सफलता का श्रेय स्कॉलरशिप सिस्टम को दिया। उनके शोध ने भारत की व्यापार नीति पर अहम प्रभाव डाला। उनकी पुस्तक "इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ" को इस क्षेत्र की पहली सटीक आलोचना माना गया।

शर्मीला स्वभाव, लेकिन बड़ा संकल्प

डॉ. सिंह बेहद शर्मीले थे। उन्होंने बताया कि अपने लंबे बालों के कारण उन्हें अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती थी। कैंब्रिज में वे इकलौते सिख छात्र थे और सार्वजनिक स्नानागार में दूसरों से अलग नहाते थे। गर्म पानी खत्म होने के बाद वे ठंडे पानी से नहाने को मजबूर रहते थे। उनकी यह सादगी और अनुशासन जीवनभर उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बना रहा।

सरकारी सेवाओं में योगदान

डॉ. मनमोहन सिंह का करियर कई अहम पदों पर सेवाओं से भरा रहा...

  • 1971: वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार।
  • 1972: वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार।
  • 1982-1985: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर।
  • प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार।
  • 1991-1996: नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री।
  • 2004-2014: भारत के प्रधानमंत्री।

प्रधानमंत्री के रूप में 10 साल का कार्यकाल

2004 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। डॉ. सिंह ने 10 साल तक देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में भारत ने आर्थिक और सामाजिक प्रगति की। उपलब्धियां...

  • भारत को आर्थिक सुधारों की राह पर आगे बढ़ाया।
  • अमेरिका-भारत परमाणु समझौता किया।
  • सामाजिक योजनाओं जैसे मनरेगा और शिक्षा के अधिकार को लागू किया।

संघर्ष और सम्मान

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से हर चुनौती का सामना किया। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया....

  • पद्म विभूषण (1987): भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • वर्ष के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री (1993 और 1994): एशिया मनी अवॉर्ड।
  • वर्ष के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री (1993): यूरो मनी अवॉर्ड।

ये भी पढ़ें- Manmohan Singh Resign News: जब 3 बार इस्तीफा देने की मनमोहन ने ठानी, राहुल गांधी ने तार-तार कर दी थी गरिमा

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+