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Manmohan Singh Raincoat Story: क्या है मनमोहन के नहाने का किस्सा? जब PM मोदी ने भी राज्यसभा में ली थी चुटकी

Manmohan Singh Raincoat Story: 'रेनकोट पहनकर नहाने वाले PM'....मनमोहन सिंह को इस तंज का सामना कई बार अपने राजनीतिक सफर करना पड़ा। लेकिन, 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में यह काफी गूंजा। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मनमोहन सिंह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाने की कला तो कोई मनमोहन सिंह जी से सीखे।

यह टिप्पणी उस संदर्भ में थी कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कई बड़े घोटाले हुए, लेकिन उनकी व्यक्तिगत छवि पर कोई दाग नहीं लगा। हालांकि, कांग्रेस ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और राज्यसभा से वॉकआउट करते हुए माफी की मांग की। यह घटना लंबे समय तक चर्चा में रही। अब सोचने वाली बात यह है कि मनमोहन सिंह के नहाने का किस्सा कैसे उजागर हुआ? आइए आपको बताते हैं...

Manmohan Singh Raincoat Story

नहाने का किस्सा ऐसे हुआ उजागर (Manmohan Singh Baith Story)

मनमोहन सिंह के नहाने का किस्सा 2004 में न्यूजवीक के संपादक फ़रीद ज़कारिया के लेख में उजागर हुआ था। उन्होंने मशहूर अर्थशास्त्री जगदीश भगवती का हवाला देते हुए लिखा कि जब मनमोहन सिंह केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तब वे हर सुबह चार बजे ठंडे पानी से नहाया करते थे। इंग्लैंड की कड़क ठंड में यह उनकी अनुशासनप्रियता और संकल्प का प्रमाण था।

ठंडे पानी और लंबे बालों की कहानी

मनमोहन सिंह ने खुद एक बार बताया था कि कैम्ब्रिज में वे अकेले ठंडे पानी से नहाते थे। उनके लंबे बालों के कारण वे शर्मीले थे और दूसरे छात्रों से अलग नहाने का समय चुनते थे। जब बाकी छात्र गर्म पानी का इस्तेमाल कर चुके होते, तब मनमोहन सिंह ठंडे पानी से नहाते थे।

लैंप में की पढ़ाई, पैदल चलकर जाते थे स्कूल

मनमोहन सिंह का बचपन अभावों में बीता। उनके गांव में न बिजली थी, न अन्य सुविधाएं। पढ़ाई के लिए उन्होंने मिट्टी के तेल से जलने वाले दीयों का सहारा लिया और मीलों पैदल चलकर स्कूल जाते थे। इस संघर्षपूर्ण जीवन ने उन्हें मेहनत और सादगी का महत्व सिखाया।

शिक्षा और करियर का सफर

1950 के दशक में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी.फिल की डिग्री ली। इसके बाद वे पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगे। फिर उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया, जैसे कि आरबीआई गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार।

राजनीति में प्रवेश और ऐतिहासिक भूमिका (Manmohan Political Journey)

1991 में पी.वी. नरसिंह राव ने उन्हें अपने वित्त मंत्री के रूप में चुना। मनमोहन सिंह ने भारत को आर्थिक संकट से बाहर निकाला और देश को वैश्विक आर्थिक मंच पर स्थापित किया। 2004 में वे भारत के प्रधानमंत्री बने और 10 साल यानी 2014 तक इस पद पर रहे।

मनमोहन सिंह के कार्यकाल के कौन-कौन से बड़े घोटाले हुए?

मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल (2004-2014) के दौरान कई बड़े घोटाले सामने आए, जो राजनीतिक और मीडिया जगत में व्यापक रूप से चर्चित रहे। इन प्रमुख घोटालों के बारे में जानें...

2G स्पेक्ट्रम घोटाला (2G Scam)

  • घोटाले की अवधि: 2008
  • राशि: अनुमानित ₹1.76 लाख करोड़ (CAG रिपोर्ट के अनुसार)
  • विवरण: दूरसंचार मंत्रालय द्वारा 2G स्पेक्ट्रम के लाइसेंसों का आवंटन बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर किया गया। तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर लाइसेंस वितरण में धांधली का आरोप लगा।
  • परिणाम: इस घोटाले के कारण UPA सरकार की साख को बड़ा झटका लगा। हालांकि 2017 में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया।

कोयला घोटाला (Coal Scam)

  • घोटाले की अवधि: 2004-2009
  • राशि: ₹1.86 लाख करोड़ (CAG रिपोर्ट के अनुसार)
  • विवरण: कोयला खदानों के आवंटन में गड़बड़ियां पाई गईं। बिना पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए।
  • परिणाम: मनमोहन सिंह पर भी सवाल उठे क्योंकि वे उस समय कोयला मंत्रालय के प्रमुख थे। इस घोटाले ने सरकार की साख पर गहरा असर डाला।

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (CWG Scam)

  • घोटाले की अवधि: 2010
  • राशि: ₹70,000 करोड़
  • विवरण: 2010 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में निर्माण कार्यों, उपकरणों की खरीद और आयोजन से संबंधित कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इसमें तत्कालीन आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी पर अनियमितताओं के आरोप लगे।
  • परिणाम: घोटाले के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई। सुरेश कलमाडी को गिरफ्तार किया गया।

आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला (Adarsh Housing Society Scam)

  • घोटाले की अवधि: 2010
  • राशि: लगभग ₹1,000 करोड़
  • विवरण: मुंबई में आदर्श हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट्स, जो युद्ध विधवाओं और सैनिकों के लिए बनाए जाने थे, अनाधिकृत रूप से अधिकारियों और नेताओं को आवंटित किए गए।
  • परिणाम: तत्कालीन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा।

वाड्रा-डीएलएफ भूमि सौदा (Vadra-DLF Land Deal)

  • घोटाले की अवधि: 2008-2012
  • राशि: विवादित मूल्यांकन
  • विवरण: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर हरियाणा में भूमि सौदों में विशेष लाभ प्राप्त करने के आरोप लगे। डीएलएफ कंपनी से वाड्रा को बिना ब्याज के ऋण और रियायती दरों पर भूमि खरीदने की सुविधा मिली।
  • परिणाम: इस सौदे पर राजनीतिक बहस छिड़ गई, लेकिन वाड्रा पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।

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