Manmohan Singh Resign News: जब 3 बार इस्तीफा देने की मनमोहन ने ठानी, राहुल गांधी ने तार-तार कर दी थी गरिमा
Manmohan Singh Resign News: भारत के 14वें प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को निधन हो गया। मनमोहन सिंह का जीवन संघर्ष, मेहनत और सेवा की मिसाल रही।
अपने 10 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल और उससे पहले के शानदार राजनीतिक सफर में उन्होंने कई ऐसे मोड़ देखे, जब उन्होंने इस्तीफा देने का विचार किया या इसकी पेशकश की। उनके जीवन में तीन ऐसी घटनाएं सबसे खास रहीं, जब वह इस्तीफे को लेकर अड़े रहे, लेकिन हर बार उनके फैसले ने देश को एक नई दिशा दी। आइए जानते हैं कब-कब इस्तीफे से जुड़ा मनमोहन का नाम...

1992: वित्त मंत्री के रूप में इस्तीफे की पेशकश
- वजह: 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर डॉ. सिंह ने भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की। लेकिन 1992 में बजट प्रस्तुति के दौरान विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके बजट की कड़ी आलोचना की।
- कैसे बदला विचार: वाजपेयी की बातों से आहत डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को अपना इस्तीफा देने की पेशकश की। राव ने वाजपेयी से संपर्क किया, जिन्होंने डॉ. सिंह को समझाया कि राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है। डॉ. सिंह ने इस्तीफा वापस ले लिया, और उनके आर्थिक सुधार भारत की आर्थिक नींव साबित हुए।
2008: परमाणु समझौते के दौरान इस्तीफे की धमकी
- वजह: प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. सिंह ने अमेरिका के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते की पहल की। लेकिन इस पर यूपीए सरकार के वामपंथी सहयोगियों ने विरोध जताया और सरकार गिराने की धमकी दे दी।
- कैसे बदला विचार: डॉ. सिंह ने समझौते को भारत के हित में बताते हुए स्पष्ट किया कि यदि यह समझौता नहीं हुआ, तो वे इस्तीफा दे देंगे। उनकी दृढ़ता के कारण यह समझौता हुआ, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत हुई और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिला।
2013: राहुल गांधी ने तार-तार की गरिमा
- वजह: 2013 में, डॉ. सिंह की सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया, जिससे दोषी सांसदों को अयोग्यता से बचाने का रास्ता मिलता। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे 'पूर्णतः बकवास' बताते हुए सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। यह टिप्पणी डॉ. सिंह और उनकी सरकार के लिए बेहद अपमानजनक मानी गई।
- कैसे बदला विचार: इस अपमान से आहत डॉ. सिंह ने इस्तीफा देने का मन बना लिया। लेकिन पार्टी नेतृत्व और उनके करीबी सहयोगियों ने उन्हें समझाया कि सरकार को बचाए रखना जरूरी है। उन्होंने पार्टी हित में अपना फैसला बदला।
प्रोफेसर से प्रधानमंत्री तक का सफर
- 1932 में अविभाजित भारत (अब पाकिस्तान) के पंजाब में जन्मे डॉ. सिंह ने कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
- पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर के रूप में कार्य करने के बाद, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भी सेवाएं दीं।
- 1971 में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार।
- 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार, योजना आयोग के उपाध्यक्ष।
- 1982 में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर।
- 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री।
- 2004 में प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त हुए।
प्रधानमंत्री (2004-2014):
डॉ. सिंह के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में बड़ी प्रगति की। उनके कार्यकाल में देश ने तेज़ विकास और अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की।
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