भारत को हर साल चाहिए 1 करोड़ 20 लाख नई नौकरियां: मनमोहन सिंह
पीएचडी एनुअल अवार्ड्स फॉर एक्लसीलेंस के 111 वें वार्षिक सत्र में बोले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश को अपने श्रम शक्ति के सही इस्तेमाल के लिए 1 करोड़ 20 लाख नई नौकरियों का सृजन हर साल करना होगा।

दिल्ली में पीएचडी एनुअल अवार्ड्स फॉर एक्लसीलेंस के 111 वें वार्षिक सत्र में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने आज कहा कि देश में जिस तरह से युवा हैं, उस लिहाज से नौकरियां बेहद कम हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने युवाओं की क्षमता के सही इस्तेमाल के लिए हर साल 1 करोड़ 20 लाख नौकरियों का सृजन करना होगा।
मनमोहन सिंह ने कहा कि किसी भी देश के लिए बढ़ती युवा आबादी को नौकरियां देना एक बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने कहा कि युवा आबादी के साथ किसी भी देश की चुनौतियां भी बढ़ती हैं।
दो बार देश के प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके डॉ. मनमोहन सिंह ने इस मौके पर देश और दुनिया के सामने अर्थव्यवस्था से संबंधित चुनौतियों पर अपनी राय रखी।
भारत में युवाओं की एक बड़ी तादाद है, जिसके मुकाबले में देश में नौकरियां बहुत कम हैं। हाल ही में राष्ट्रपति ने भी अपने एख संबोधन में देश में नौकरियों के कम सृजन का जिक्र किया था।
इससे पहले मनमोहन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में भी नोटबंदी पर अपनी बात रखी थी और सरकार के नोटबैन के फैसले में कई खामियां गिनाई थीं। उन्होंने कहा था कि इससे देश की जीडीपी में 2 फीसदी की गिरावट हो सकती है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबैन पर संसंद में कहा था कि कुछ लोग कह रहे हैं कि लंबे समय में इसका फायदा होगा। उन्होंने इस पर कहा कि लंबे समय में हम सब मर चुके होंगे, उसके बाद फायदा होगा।












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