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मणिपुर के सामने पैदा हुआ नया संकट, उग्रवादियों का दखल बढ़ा, भारत के दुश्मनों का कितना हाथ?

मणिपुर में उपद्रव शुरू हुए 4 महीने से भी ज्यादा गुजर चुके हैं। इतने लंबे समय की अस्थिरता ने सामान्य जीवन और कारोबार को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है। आए दिन कर्फ्यू और पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय व्यापारियों के सामने एक नया संकट खड़ा हुआ है। ये संकट है, जबरन वसूली का। ठेठ शब्दों में कहें तो 'रंगदारी' का।

यह जबरिया वसूली उग्रवादी संगठनों और उनके जमीनी संगठनों की ओर से तेज कर दी गई है, जिसके चलते व्यापारियों की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक-एक व्यापारी से 5-5, 10-10 लाख रुपए की 'रंगदारी' मांगी जा रही है।

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उग्रवादियों ने तेज किया जबरन वसूली का धंधा
इंफाल के एक कारोबारी ने बताया, 'मणिपुर में कई उग्रवादी ग्रुप वर्षों से रहे हैं। उग्रवादी संगठनों की ओर से उगाही में बहुत ज्यादा कमी आ गई थी। हिंसा की वजह से जबरिया वसूली का धंधा फिर से चल पड़ा है। हमारे पास किसी न किसी ग्रुप से तकरीबन रोज ही जबरन उगाही की मांग आती है। हमने सुरक्षा बलों से संपर्क किया है, लेकिन वे मजबूर हैं। कई मौकों पर पेट्रोलिंग और सिक्योरिटी पिकेट्स बनाए गए थे। लेकिन, हालात फिर से वैसे ही हो गए। हम वही स्थिति देख रहे हैं, जैसा उगाही का दौड़ 2007-08 में चलता था।'

5 से 10 लाख रुपए की मांगी जा रही है 'रंगदारी'
एक और व्यापारी ने कहा कि 'पहले जबरिया वसूली के लिए बाहर के उन व्यापारियों को टारगेट किया जाता था, जो यहां पर बस गए हैं। लेकिन, अब हालात अलग हैं। सभी तरह के व्यापारियों को टारगेट किया जा रहा है। 5 लाख से 10 लाख रुपए की रंगदारी की मांग पूरी करना असंभव है।'

'रंगदारी नहीं देने पर ग्रेनेड फेंक दिए जाते हैं'
थौबल के एक कारोबारी ने कहा, 'हमारे पास जगह बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। कोई काम-धंधा चल नहीं पा रहा है और जबरिया वसूली की मांगें पूरी करना लगभग नामुमकिन है। कैडर हमारे दुकानों और गोदामों पर हथियारों के साथ पहुंच जाते हैं। रंगदारी नहीं देने पर ग्रेनेड फेंक दिए जाते हैं। कभी-कभी तो उग्रवादी हमारे पास सुरक्षा बलों की वर्दी में पहुंच जाते हैं।'

'शायद उग्रवादी हालात का फायदा उठा रहे हैं'
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने देने के अनुरोध के साथ बताया, 'जब भी शिकायतें मिलती हैं, हम इससे निपट रहे हैं। शायद उग्रवादी हालात का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन, पुलिस मुस्तैद है और यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की जा रही है कि किसी भी तरह से जबरन चंदा उगाही न हो।'

कई उग्रवादी संगठनों के सक्रिय होने की रिपोर्ट
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हिंसा की वजह से यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और कांगलेई यावोल कन्ना लुप (KYKL) जैसे उग्रवादी संगठन सक्रिय हो गए हैं। इसमें पहाड़ी इलाकों में मौजूद उग्रवादी समूह भी शामिल हैं।

अवैध घुसपैठिया बन गए हैं परेशानी ?
गौरतलब है कि मणिपुर में अस्थिरता की कई वजहें हैं। इनमें नशीली दवाओं की तस्करी और म्यांमार से शरणार्थियों के रूप में आए अवैध घुसपैठिए भी शामिल हैं। सैन्य-विद्रोहियों के साथ आए घुसपैठिए में ड्रग्स तस्कर भी शामिल बताए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में मणिपुर में जिस तरह से ड्रग्स के कारोबार पर लगाम लगाई गई है, उससे एक वर्ग में पहले से ही सरकार के खिलाफ खासी नाराजगी रही है। उग्रवादी संगठनों के अचानक इस तरह से सक्रिय होने के पीछे इन वजहों के होने की भी पूरी आशंका है।

भारत के दुश्मनों का कितना हाथ?
यह बात दुनिया से छिपी नहीं है कि म्यांमार की सेना को हमारे पड़ोसी मुल्क चीन का समर्थन प्राप्त है; और अगर मणिपुर अशांत रहता है तो यह चीन की भारत-विरोधी रणनीति में पूरी तरह फिट बैठता है। मणिपुर में भारत की 400 किलोमीटर की सीमा म्यांमार से लगी हुई है। ऐसे में वहां के गृहयुद्ध से परेशान शरणार्थियों के भारत आने की समस्या से स्थानीय लोग पहले से ही काफी चिंतित रहे हैं। ऐसे में हिंसा पीड़ित राज्य में उग्रवादी संगठनों की सक्रियता, उनके पास मौजूद अत्याधुनिक हथियार, भारत-विरोधी ताकतों की ओर काफी कुछ इशारा करता है।

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