Manipur Clashes: मैतेयी समुदाय ने कश्मीरी पंडितों से की अपनी तुलना, कहा- पहले से थी हिंसा की प्लानिंग
मैतेयी समुदाय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। साथ ही अपनी तुलना कश्मीरी पंडितों से की।

मणिपुर में हिंसा तो शांत हो गई, लेकिन अभी भी वहां के हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच वहां के मैतेयी समुदाय के लोगों ने अपनी तुलना कश्मीरी पंडितों से कर दी। साथ ही राज्य से जाति को पूरी तरह मिटाए जाने का खतरा जताया।
इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में वर्ल्ड मीटी काउंसिल के सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राज्य-केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ये भी दावा किया कि तमाम कोशिशों के बाद भी वो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से नहीं मिल पाए।
मामले में सिविल सोसाइटी ग्रुप वर्ल्ड के अध्यक्ष नबाश्याम हेइगुरूजम ने कहा कि राज्य में जो घटनाएं हुई हैं, उसकी प्लानिंग पहले से हो रखी थी। वो सरकार को चेतावनी देते रहे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। ये वैसी ही स्थिति है, जैसी कश्मीरी पंडितों ने झेली थी।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में उनकी जाति को पूरी तरह से खत्म करने की प्लानिंग हो रही। इसके लिए वो एक साल से ज्यादा वक्त से केंद्रीय गृहमंत्री से मिलना चाह रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने मिलने का वक्त नहीं दिया।
हेइगुरूजम ने आगे कहा कि मैतेयी और नागा मणिपुर के मूल लोग हैं। वो बस केंद्रीय गृहमंत्री से 5 मिनट मिलना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए आवेदन भी किया, लेकिन मुलाकात नहीं हुई। इससे वो दुखी हैं।
वहीं वर्ल्ड मीटी काउंसिल के प्रवक्ता नबाकिशोर सिंघा युमनाम ने कहा कि सरकार को मैतेयी लोगों को तुरंत अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने अवैध रूप से रह रहे लोगों को तुरंत बाहर निकालने की मांग की।
70 लोगों की हुई थी मौत
आपको बता दें कि 3 मई को मणिपुर में हिंसा हुई थी। जिसमें 70 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार एक्शन में आई, साथ ही वहां पर सेना और अर्धसैनिक बलों के 10 हजार जवानों को तैनात करना पड़ा, तब जाकर हालात सामान्य हुए।












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