गोवा चुनाव में बीजेपी से टक्कर ले रही ममता बनर्जी की टीएमसी का इरादा क्या है?

बीजेपी और टीएमसी की चुनावी प्रचार सामग्री
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बीजेपी और टीएमसी की चुनावी प्रचार सामग्री

गोवा एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही तृणमूल कांग्रेस के विशाल बिलबोर्ड आपका स्वागत करते हैं जिनमें पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुस्कुराती तस्वीर दूर से नज़र आती है.

इस छोटे से राज्य के चप्पे-चप्पे में ये बिलबोर्ड और पोस्टर दिखाई देते हैं. इनमें "गोवा के लिए नयी सुबह" के चुनावी नारों द्वारा राज्य के लिए एक उज्जवल भविष्य का वादा किया गया है.

विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल गोवा में चुनावी माहौल गर्म है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और पंजाब के साथ इस तटीय राज्य में भी विधानसभा चुनाव हो रहे हैं.

इस बार सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष में कांग्रेस पार्टी जैसी बड़ी पार्टियों के अलावा मैदान में उतरी है बंगाल की तृणमूल कांग्रेस. इसके अलावा गोवा की स्थानीय नयी पार्टी, 'रेवोलुशनरी गोअंस' पहली बार चुनावी मैदान में कूदी है.

पिछली बार अधिकतर सीटों पर ज़मानत ज़ब्त हो जाने के बावजूद इस बार भी दिल्ली की आम आदमी पार्टी यहाँ चुनाव लड़ रही है.

गोवा के मुख्यमंत्री
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गोवा के मुख्यमंत्री

थोड़ा अलग चुनाव

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत बीबीसी से एक बातचीत के दौरान स्वीकार करते हैं कि इस बार गोवा का चुनाव थोड़ा अलग है.

वह कहते हैं, "इस बार और ज़्यादा पार्टियां बाहर से गोवा में आ रही हैं. पिछली बार का चुनाव तीन-तरफ़ा था. इस बार चार या पांच पार्टियों के बीच मुक़ाबला हो सकता है"

कई विशेषज्ञ कहते हैं कि 40 सीटों वाली गोवा विधानसभा के चुनावी नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है.

पिछले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी तीसरी जीत दर्ज करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने त्रिपुरा और गोवा में अपने राजनीतिक पदचिह्न को बढ़ाया है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ पार्टी का लक्ष्य कांग्रेस की जगह एक वैकल्पिक ताकत के रूप में उभरना है. पार्टी ने गोवा की महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के साथ हाथ मिलाया है और गोवा विधानसभा की सभी 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है.

गोवा के वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिन्हा कहते हैं, "इस कम्पटीशन में दो स्थितियां हैं - एक तो कि उनको (टीएमसी को) कांग्रेस से ज़्यादा सीट आ जाये. तब तो ये उनकी बहुत बड़ी जीत होगी. दूसरा, उनके लिए बीजेपी से जीतना उतना स्टेक पर नहीं है जितना कांग्रेस को हारने का है, क्योंकि उनका (ममता बनर्जी का) पहला टारगेट राहुल गाँधी हैं, इंटरमीडिएट टारगेट. फ़ाइनल टारगेट हैं मोदी"

ममता बनर्जी
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ममता बनर्जी

परिवर्तन की मांग

टीएमसी में कुछ अहम चेहरे शामिल हुए हैं, जिनमे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता लुइजिन्हो फलेरो, पूर्व एमजीपी विधायक लवू मामलेदार, कांग्रेस महासचिव यतीश नाइक और विजय पोई और गोवा के एकमात्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक चर्चिल अलेमाओ शामिल हैं. टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस भी TMC में शामिल हुए हैं.

ममता बनर्जी ने जब पिछले महीने गोवा का दौरा किया तो 40 से अधिक नेता पार्टी में शामिल हुए. लेकिन महीने के आखिर में पूर्व विधायक लवू मामलेदार सहित टीएमसी के पांच प्राथमिक सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

वहीं, भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के इलज़ाम से घिरी है और कई लोग बेरोज़गारी और महंगाई के कारण परिवर्तन चाहते हैं.

बीबीसी ने कई गावों का दौरा किया जहाँ लोगों ने परिवर्तन पर ज़ोर दिया.

अरविंद केजरीवाल
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अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी के लिए संभावनाएं

आम आदमी पार्टी गोवा में ज़ोर शोर से प्रचार कर रही है.

स्कैंडल और करप्शन के मुद्दों को गोवा की चुनावी रैली में उठाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वो गोवा में विकास का दिल्ली का मॉडल लेकर आएंगे.

उन्होंने कहा, "दोस्तों गोवा में 15 साल बीजेपी ने राज किया. 15 साल एमजीपी ने राज किया. मैं आप से पूछना चाहता हूँ, इन पार्टियों ने करप्शन के अलावा आपको कुछ दिया?"

जहां गोवा के लोग परिवर्तन चाहते हैं. लेकिन वहीं वो आम आदमी पार्टी और टीएमसी को बाहर की पार्टी मानते हैं.

गोवा के युवाओं में एक नयी स्थानीय पार्टी लोकप्रिय होती नज़र आती है. चार साल पहले आम आदमी पार्टी की गोवा शाखा की कोख से जन्मी रेवोलुशनरी गोअन्स पार्टी 'बाहर' वालों के विरोध को आधार बना कर चुनाव लड़ रही है.

महिलाएं
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महिलाएं

नयी पार्टी - नया मौका

कई लोग इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं. इसके संस्थापक और युवा नेता मनोज परब ने बीबीसी से एक मुलाक़ात के दौरान कहा कि वो गोवा को गोवा ले लोगों के हाथों में वापस करना चाहते हैं.

वो कहते हैं, "बहुत साल बाद गोवा में एक क्रांति शुरू हुई है जिसमे गोवा ले लोग, खास तौर से युवा जुड़े हैं और वो जुड़े हैं गोवा को बचाने के लिए. गोवा की संस्कृति, गोवा की विरासत और गोवा की हेरिटेज को बचाने के लिए युवा लड़के और लड़कियां बाहर आ रहे हैं."

परब के चुनावी प्रचार का अंदाज़ अलग है. वो घर-घर जा रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनकी चुनावी मुहिम दूसरी पार्टियों से अधिक तेज़ दिखती है. गाँवों और शहरों में स्थानीय लोगों ने हमें बताया वो परिवर्तन चाहते हैं और उनमें से कुछ लोगों के अनुसार वो रेवोलुशनारी गोअन्स को एक मौक़ा देना चाहते हैं.

उनका तर्क है कि उन्होंने सालों से बीजेपी और कांग्रेस को कई बार जिताया है मगर उनके अनुसार उन्हें इनसे मायूसी हुई है.

पणजी की एक घनी आबादी वाले मोहल्ले में लोकल गोअन्स ने हमसे कहा कि वो जिन लोगों को वोट देते हैं वो चुनाव के बाद पार्टियां बदल लेते हैं.

इसलिए वो अब 'गोवा की अपनी पार्टी' को एक मौका देकर ये देखना चाहते हैं कि ये लोग क्या कर सकते हैं.

कुछ गावों में हमें गांव वालों ने बताया कि मनोज परब की एक सभा में तेज़ बारिश के बावजूद लोग अपनी जगह से नहीं हिले. ये कहानी गावों में फैल चुकी है.

इस पर खुद मनोज कहते हैं, "अचानक तेज़ बारिश के बावजूद मेरी सभा में हम लोग डेट रहे. लोगों ने बारिश से बचने के लिए कुर्सियों को सर पर उठा लिया लेकिन अपनी जगह से कोई हिला नहीं"

बिलबोर्ड
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बिलबोर्ड

स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के आसार

लेकिन गोवा में कई लोगों का ख्याल है कि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा और ये कि नतीजों के बाद तोड़-जोड़ की सियासत होगी.

सियासी मामलों के विश्लेषक अरुण सिन्हा कहते हैं, "अंतिम परिणाम यही लगता है कि वोट और भी बटेंगे चारों पार्टियों के बीच. कांग्रेस का हाल तो बुरा है. इसके केवल दो विधायक बचे हैं 2017 के (चुनाव) के बाद. फिर भी कांग्रेस का बेस है. तो उनके भी कुछ लोग आएंगे. बीजेपी के कुछ लोग आएंगे. तो मेजोरिटी तो किसी को नहीं मिलेगी."

कई आम वोटरों ने हमें बताया कि उन्हें लगता ये है कि चुनावी नतीजे कुछ भी हों सरकार एक बार फिर बीजेपी ही बनाएगी, ठीक उसी तरह जब 2017 के चुनाव के बाद बहुमत न मिलने के बावजूद पार्टी ने सरकार बनायी.

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