ममता बनर्जी ने कांग्रेस को लेकर कह दी बड़ी बात, विपक्षी एकता बनने से पहले ही चौड़ी हो गई दरार ?
2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए, इस मुद्दे पर बातें तो बहुत हुई हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मौजूदा समय में जो कुछ चल रहा है, उससे मोदी विरोधियों को मायूस होना पड़ सकता है।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कुछ दिन पहले एक बात कही थी। जबतक, राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल का नाम लेकर पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे तो फायदे में बीजेपी रहेगी। उनके कहने का मतलब ये था कि अगर वाकई विपक्ष को अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा से मजबूती से लड़ना है तो एकजुट होकर मैदान में उतरना होगा। लेकिन, लगता है कि विपक्ष में बीजेपी के खिलाफ लड़ाई मैदान में नेतृत्व का ताल ठोंकने वाले नेताओं की कमी नहीं है। पिछले कुछ समय में विपक्ष ने जिस तरह की राह पकड़ी है, उससे मोदी-विरोधियों को मायूसी मिल सकती है। ताजा मामला ममता बनर्जी का है, जिन्होंने कांग्रेस पर तगड़ा हमला किया है।
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ममता बनर्जी का मेघालय में कांग्रेस के खिलाफ अभियान
भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की दुहाई लंबे समय से दी जा रही है। लेकिन, लगता है कि इसकी संभावना बहुत ही मुश्किल हो चुकी है। विपक्षी एकता से पहले ही कई राजनीतिक धाराएं नजर आने लगी हैं। बुधवार को ही पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ है। मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा। मेघालय में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इस बार खूब प्रयास कर रही है। पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां चुनावों की घोषणा के साथ ही प्रचार अभियान के लिए पहुंच गईं। यहां उन्होंने जो कुछ भी कहा वह विपक्षी एकता की बातों पर तो प्रश्नचिन्ह खड़ा करता ही है, कांग्रेस पर सीधे तौर पर हमले के तौर पर देखा जा सकता है।

कांग्रेस ने मेरी मदद नहीं की-ममता बनर्जी
तृणमूल नेता ने मेघालय में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 'मैंने अपना संघर्ष लेफ्ट के खिलाफ शुरू किया, जिसने मुझे शारीरिक तौर पर भी नुकसान पहुंचाया, लेकिन कांग्रेस ने मेरी मदद नहीं की। मैं अभी भी नहीं झुकती, क्योंकि राजनीति मेरा जुनून है।' मेघालय एक क्रिश्चियन बहुल राज्य है। तीनों राज्यों में से 2018 में कांग्रेस का सबसे बेहतर प्रदर्शन मेघालय में ही रहा था। त्रिपुरा और नागालैंड में उसका खाता भी नहीं खुला था, लेकिन मेघालय में वह 60 में से 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पिछले चुनाव में यहां टीएमसी ने 8 उम्मीदवार दिए थे और सबकी जमानतें जब्त हो गई थीं।

'कांग्रेस को जाने वाले हर वोट का मतलब है यह बीजेपी में जाता है....'
लेकिन, इस बार यहां पर चुनाव प्रचार के दौरान ममता कह रही हैं कि कांग्रेस प्रभावी विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा पाई और इसलिए वो टीएमसी को स्थापित करना चाहती हैं। दरअसल, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम मुकुल संगमा पार्टी के 12 एमएलए के साथ कुछ समय पहले ही तृणमूल में शामिल हो गए थे। मतलब कि ममता की पार्टी पूरी तरह से कांग्रेस की बुनियाद पर खड़ी है। इस दौरान उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने जो कुछ कहा वह सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा करने वाली कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा सियासी संदेश हो सकता है। उन्होंने कहा, 'हम सभी मूल रूप से कांग्रेस से ही हैं, लेकिन आप जानते हैं कि अगर आपको बीजेपी-एनपीपी से सीधे भिड़ना है तो कांग्रेस का प्लेटफॉर्म नहीं है। कांग्रेस को जाने वाले हर वोट का मतलब है यह बीजेपी में जाता है.... आपने देखा कि गोवा में क्या हुआ....'

केसीआर भी विपक्षी नेताओं के साथ दिखा गए दम
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को गोलबंद करने की कोशिशें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की ओर से हुई थी। लेकिन, आज की तारीख में उन दोनों नेताओं की दिशा भी तिरछी हो चुकी है। आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में अपनी टीआरएस का नाम भारत राष्ट्र समिति करने के बाद आयोजित पहली जनसभा में केसीआर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पंजाब के सीएम भगवंत मान, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसे नेताओं को जुटाकर विपक्ष के एक गुट के तौर पर शक्ति प्रदर्शन किया। जहां इस बैठक से नीतीश को दूर कर दिया गया, वहीं केजरीवाल भी चंद्रशेखर राव की तरह अपनी राष्ट्रीय आकांक्षा जाहिर करते रहे हैं।

अलग ही राह पर चल रही है कांग्रेस
विपक्ष में एक और गुट कांग्रेस के साथ नजर आ रहा है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में पार्टी के कई सहयोगी दलों के नेता दिखते रहे हैं। उधर मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और गांधी परिवार के बहुत ही खास कमलनाथ तो पीएम उम्मीदवार के तौर पर राहुल का नाम भी ले चुके हैं। मौजूदा समीकरण में नीतीश की जेडीयू, लालू यादव की आरजेडी, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी भी अपने राजनीतिक एजेंडे के चलते कांग्रेस के पीछ नजर आ रही हैं। जबकि, यूपी के दोनों बड़े विपक्षी दल सपा और बसपा भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के आमंत्रण पर भी कन्नी काट चुके हैं। विपक्षी एकता की शुरुआत से पहले इतनी खाइयों को पाटना बच्चों का खेल नहीं है। जबकि, एक ओर बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए है, जिसमें खुद पीएम मोदी 400 दिन का चुनावी टोन सेट करके तीसरे कार्यकाल के मिशन में जुट चुके हैं।












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