बंगाल में भाजपा की बंपर जीत पर ममता बनर्जी ने ट्वीट की ये कविता, लिखा- 'मै नहीं मानती'
कोलकाता। लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के एक दिन बाद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने शुक्रवार को ट्विटर पर एक कविता साझा की। जिसमें उन्होंने भगवा पार्टी के लिए एक व्यंग भरा संदेश दिया - "मैं नहीं मानती"। ममता बनर्जी ने बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में एक कविता ट्वीट की है। इस कविता में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा है कि वो सांप्रदायिकता और धार्मिक आक्रामकता बेचने पर यकीन नहीं रखती हैं।

ममता ने कविता के माध्यम से अपनी सोच और विचारधारा को गैर-सांप्रदायिक और सहिष्णुता में विश्वास करने वाला बताया। उन्होंने कविता के माध्यम से यह जाहिर करने की कोशिश की है कि उग्रता और नम्रता सभी धर्मों का अंग है, लेकिन, वह नम्रता के प्रति समर्पित एक सहिष्णु सेविका हैं। भले ही उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की ओर था। ममता पीएम और शाह पर बार-बार धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाती रही हैं।
ममता बनर्जी ने अपनी कविता के आखिर में लोगों से आह्वान किया है कि वे उनके विश्वास को मजबूत करें। उन्होंने बताया कि उनका विश्वास धर्म की उग्रता में नहीं बल्कि मानवता की रौशनी से चमकते धर्म में है। उन्होंने कविता अपनी कविता में लिखा....
साम्प्रदायिकता के रंग में मुझे नहीं है विश्वास,सभी धर्मों में उग्रता नम्रता। मैं हूं नम्र जागरण की एक सहिष्णु सेविका, उत्थान हुआ जिसका बंगाल में। विश्वास नहीं मुझे सामयिक उग्र धर्म बेचने में मेरा विश्वास है मानवता के आलोक से आलोकित धर्म में। धर्म बेचना जिनका ताश, धर्म पहाड़ पर है पैसों का वास ? मैं रत हूं निज कर्मों में, कर्महीन हो तुम सब!!! इसलिए बिकता है उग्रता का धर्म ? विश्वास है जिन्हें सहिष्णुता में आइए, जाग्रत कीजिए समवेत सभी आइए जब वसुधैव कुटुम्बकम तो क्यों है ये हिसाब-किताब ? उग्रता है जिनकी अभिलाषा।
बता दें कि, पिछले दो सालों में बीजेपी की पश्चिम बंगाल सरकार के साथ कई बार टकराव हो चुका है। विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों के दौरान होने वाली रैलियों और मार्चों को लेकर ऐसे टकराव आम थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बंगाल में पूरी आक्रमकता के साथ प्रचार किया। प्रधानमंत्री मोदी और ममता बनर्जी ने कई बार एक दूसरे को अलग-अलग नाम दिए और एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए।












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