Mamata Banerjee Education: ममता बनर्जी कितनी पढ़ी-लिखी हैं? सुप्रीम कोर्ट में SIR पर क्या रख सकती हैं दलील
Mamata Banerjee Education: सुप्रीम कोर्ट आज पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करेगा। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से एक अंतरिम आवेदन दाखिल कर ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से बहस करने की अनुमति मांगी है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश पास भी जारी किया जा चुका है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पश्चिम बंगाल की मुख्मयंत्री ममता बनर्जी कितनी पढ़ी लिखी हैं? क्या वो सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई में अपनी दलील पेश कर सकती हैं या नहीं? क्या कानून किसी व्यक्ति को केवल LLB की डिग्री के आधार पर अदालत में बहस करने की अनुमति देता है? जानते हैं सभी सवालों के जवाब....

"फायर ब्रांड" नेता ममता बनर्जी कौन हैं?
देश की "फायर ब्रांड" नेता के तौर पर जानी जाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महज 15 वर्ष की आयु में राजनीति में प्रवेश किया। 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के प्रोमिलेश्वर बनर्जी और गायत्री देवी के घर में जन्मीं ममता बनर्जी ने महज 17 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया। अपने दम पर उन्होंने राजनीति में ये मुकाम हासिल किया है।
Mamata Banerjee Education कितनी पढ़ी हैं ममता बनर्जी?
सादगी पसंद ममता बनर्जी ने जीवन की कई कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने तमाम बाधाओं को पार कर उच्च शिक्षा हासिल की, जिससे वे कई राजनीतिक दिग्गजों से काफी आगे हैं।
- ममता बनर्जी ने 1970 में देशबंधु शिशु शिक्षालय से उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की।
- 1979 में जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में स्नातक की डिग्री हासिल की और कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामी इतिहास में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की।
- श्री शिक्षायतन कॉलेज से भी एजुकेशन सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन किया।
- 1982 में कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री भी पूरी की।
Mamata Banerjee कई मानद उपाधियों से भी सम्मानित हो चुकी हैं
ममता बनर्जी को कई मानद उपाधियों से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें भुवनेश्वर के कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी से डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली है, और कलकत्ता विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (डी.लिट.) की उपाधि से नवाजा है।
Mamata Banerjee को क्या कानून अनुमति देता है?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि ममता बनर्जी भले ही एलएलबी डिग्री धारक हों, लेकिन वे पेशे से एडवोकेट नहीं हैं। यदि वे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होती हैं, तो उनकी भूमिका एक याचिकाकर्ता की होगी, न कि वकील की। केवल कानून की पढ़ाई कर लेना अदालत में बहस करने का स्वतः अधिकार नहीं देता। एक याचिकाकर्ता के तौर पर वो अपने पक्ष में कोर्ट में बात रख सकती हैं।
क्या LLB पास Mamata Banerjee बहस कर सकती हैं?
इसका स्पष्ट उत्तर है-नहीं। एलएलबी डिग्री केवल यह प्रमाणित करती है कि व्यक्ति ने विधि की शिक्षा प्राप्त की है। इससे उसे न तो जज के समक्ष दलील देने, न वकालतनामा दाखिल करने और न ही किसी मामले में वकील के रूप में पेश होने का अधिकार मिलता है। अदालत में बहस करने का अधिकार Advocates Act, 1961 और Bar Council of India (BCI) के नियमों से नियंत्रित होता है।
प्रैक्टिसिंग एडवोकेट बनने की कानूनी शर्तें
ममता बनर्जी ने किसी स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण (Enrollment) नहीं कराया है, न ही उन्होंने All India Bar Examination (AIBE) पास किया है और न ही Certificate of Practice (CoP) प्राप्त किया है। Advocates Act, 1961 के अनुसार, बिना इन अनिवार्य शर्तों को पूरा किए अदालत में बहस करना वैध कानूनी प्रैक्टिस नहीं माना जाता।












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