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कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष पद पर राज्यसभा में क्यों मंडरा रहा है संकट? लोकसभा में 10 साल करना पड़ा इंतजार

कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) पद के लिए 10 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा है। क्योंकि, इसे 2014 और 2019 में इसके लिए आवश्यक कुल सीटों की 10% सीटें भी नहीं मिली थीं।

इस बार निचले सदन में कांग्रेस को 543 सीटों में से 99 सीटें मिली हैं और राहुल गांधी को आधिकारिक तौर पर विपक्ष के नेता का पद मिल गया है। लेकिन, अब राज्यसभा में कांग्रेस को यह पद बचाने के लिए हाथ-पैर मारने पड़ रहे हैं, जो पद अभी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास है।

leader of opposition

कांग्रेस को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बचाने की चिंता!
हाल ही में जब तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के दिग्गज केशव राव ने राज्यसभा की सदस्यता छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन की तो लगा कि उन्होंने अपने दो साल के बचे हुए कार्यकाल से समझौता क्यों किया? लेकिन, अब चीजें स्पष्ट हो गई हैं और यह बात सामने आई है कि इसके पीछे असल में राज्यसभा में कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष बचाए रखने की चिंता है।

केशव राव की सीट से कांग्रेस राज्यसभा में भेज सकती है सांसद
बीआरएस के सांसद केशव राव के इस्तीफे से जो सीट खाली हुई है, उसपर अब उपचुनाव होगा और तेलंगाना में कांग्रेस के पास जितनी विधायकों की संख्या है, तो यह सीट उसके ही खाते में जाना लगभग तय है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए कम से कम 25 सांसद आवश्यक
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए किसी भी दल के पास कम से कम 25 सांसदों की आवश्यकता है। लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के पास ऊपरी सदन में 28 सांसद थे।

कांग्रेस के पास राज्यसभा में रह गए सिर्फ 26 सांसद
लेकिन, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और दीपेंद्र सिंह हुड्डा के लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से उनकी सीटें खाली हो गई हैं और कांग्रेस के पास राज्यसभा में सिर्फ 26 सांसद रह गए हैं। पार्टी को यह स्थिति जोखिम भरी लग रही है।

राजस्थान और हरियाणा से राज्यसभा में जीत की संभावना कम हुई
वेणुगोपाल राजस्थान से और दीपेंद्र हुड्डा हरियाणा से राज्यसभा में थे। उनकी वजह से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होंगे, लेकिन वहां भाजपा के विधायकों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस को अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर संदेह है।

तेलंगाना में कांग्रेस को मिल सकती है आसान जीत
लेकिन, तेलंगाना में जो केशव राव वाली सीट खाली हुई है, वहां से कांग्रेस अपने उम्मीदवार को चुनकर राज्यसभा में भेजने में सक्षम है। ऐसा होने पर उसके सदस्यों की संख्या ऊपरी सदन में भी 27 हो सकती है और पार्टी थोड़ी राहत महसूस कर सकती है और इससे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का पद फिलहाल सुरक्षित रह सकता है।

कांग्रेस अगर तय करती है तो वह फिर से बाकी के दो वर्षों के कार्यकाल के लिए भी तेलंगाना से केशव राव को ही भेजे तो उसमें उसे कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन, रविवार को ही उन्हें रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली सरकार का सलाहकार नियुक्त किया गया है।

सिंघवी को तेलंगाना से राज्यसभा भेज सकती है कांग्रेस
ऐसे में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा में भेजे जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें पहले हिमाचल प्रदेश से भी ऐसी ही कोशिश की थी, लेकिन बीजेपी की रणनीति के सामने सरकार रहते हुए भी कांग्रेस उनकी जीत सुनिश्चित नहीं कर पाई।

सिंघवी के बारे में दिल्ली के सियासी गलियारों में यह भी चर्चा खूब रही है कि उन्हीं को राज्यसभा में भेजने का दबाव बनाने के लिए आम आदमी पार्टी सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री आवास में कथित मार-पीट की गई।

जहां तक राव की बात है तो वे बीआरएस से पहले कांग्रेस के दिग्गज रह चुके हैं और संयुक्त आंध्र प्रदेश में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के भी सदस्य रह चुके हैं और 2013 में कांग्रेस छोड़कर तेलंगाना राष्ट्र समिति में चले गए थे।

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