'पद्मश्री' मालिनी अवस्थी ने क्यों कहा-'जिंदगी से यही गिला है मुझे...', वनइंडिया EXCLUSIVE

लखनऊ, 25 जून। वनइंडिया Exclusive में आज मुलाकात उस हस्ती से ,जो किसी परिचय की मोहताज नहीं। जिनकी गायिकी में कन्नौज के इत्र की खुशबू, काशी के संस्कार, लखनऊ की नजाकत और मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद दिखाई पड़ता है, जी हां, आपने सही समझा हम बात कर रहे हैं, मशहूर लोकगायिका और 'पद्मश्री' से सम्मानित मालिनी अवस्थी की।

मालिनी अवस्थी ने क्यों कहा-जिंदगी से यही गिला है मुझे...

वनइंडिया: लोकगीत और लोकसंगीत को पुष्पित, पुलकित, प्रचारित और प्रसारित करने का बखूबी काम अगर किसी ने किया है तो वो आप हैं। आपके बारे में बहुत कुछ लिखा गया है और बहुत कुछ कहा गया है लेकिन आज हम आपके श्रीमुख से आपके अब तक के इस खूबसूरत सफर के बारे में जानना चाहेंगे।

मालिनी अवस्थी: पहले तो मैं आपको बताऊं, कोई भी व्यक्ति किसी चीज का श्रेय नहीं ले सकता, ये तो मां विन्धयवासिनी, का आशीर्वाद है, जिनको चाहे वो खड़ा कर दें। मुझे लगता है कि इंसान अपना सफर भी पूर्व जन्म के संचित संस्कारों के हिसाब से बनाता है। मुझसे पहले भी बहुत लोगों ने संस्कृति के लिए काफी काम किया है, लेकिन हां ये मान सकती हूं कि मुख्य धारा में लोकगीतों को लाने का काम मैंने जरूर किया। इसे मैंने चुनौती के रूप में लिया और उस पर काम किया। रही बात मेरे सफर की तो यह बहुत लंबी यात्रा है, किताब लिखने वाली यात्रा है, एक चीज मैं कहूंगी कि मेरे पिता और पति दोनों के काम तबादले वाले रहे, जिसकी वजह से मुझे कई जगहों से जुड़ने का मौका मिला और मुझे लोक संस्कृति को समझने का मौका मिला।

यहां देखें पूरा इंटरव्यू

वनइंडिया: ऐसा लोग मानते हैं कि आज लोकगीत ग्लैमराइज्ड हो गया है, एक फार्मेट सेट हो गया है, इसके पीछे भी कारण मालिनी अवस्थी ही हैं, जो गाने दादी-नानी बच्चों को गोद में सुनाया करती थी, वो आज स्टेज पर आपके कारण पहुंचा है, क्या कहना चाहेंगी इस पर आप?

मालिनी अवस्थी: मैंने कभी इस तरह से सोचा नहीं, पहले ये स्पष्ट हो जाएं कि ग्लैमर से क्या आशय है, क्या इसका मतलब आकर्षण से है या फिर चकाचौंध से है। तो मैं बता दूं कि ये लोकगीतों में हमेशा से ही आकर्षण और चकाचौंध था, लोगों ने उधर देखना बंद कर दिया तो बस मैंने कोशिश की, कि यदि मंच ही आज की सच्चाई है तो मंच पर क्यों ना उस चीज को प्रस्तुत करें। जहां तक टीवी फ्रेंडली होने की बात है तो उसमें बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि टीवी पर फार्मेट सेट होता है तो मुझे वहां लोकगीतों को उसी हिसाब से ट्रीट करना पड़ा।

मालिनी अवस्थी ने क्यों कहा-जिंदगी से यही गिला है मुझे...

वनइंडिया: आपके लिए तो सुरकोकिला लता मंगेशकर ने भी कहा था कि आप अनुपम हैं, क्या था वो पूरा किस्सा, हमारे दर्शकों को बताइए?

मालिनी अवस्थी: हां (मुस्कुराते हुए), अभी भी वो सब मुझे सपना लगता है कि क्या हुआ था, कैसे हुआ था, दरअसल ये 'जूनून' शो के समय की बात है, उसमें एक प्रतियोगी थे हमारे पाकिस्तान के, नाम था अकबर, उन्होंने उस वक्त बताया था कि उनकी इच्छा है कि वो एक बार बस लता जी के पैर छू लें। जैसे ही ये बात चैनल पर प्रसारित हुई उसी वक्त लता जी के यहां से फोन आया कि अरे बच्चे को भेजिए, बड़ा सुरीला है वो। उसके बाद वो लड़का उनसे मिलने गया, जब वो लता जी से मिलकर आया तो उन्होंने कहा कि दीदी वो आपको बहुत सुनती हैं और आपको बहुत पूछ रही थीं। तो मुझे बिल्कुल यकीन नहीं हुआ कि लता जी मुझे सुनती हैं। लेकिन इसके बाद ही लता जी का 80वां जन्मदिन पड़ा और लता जी ने अपना एक इंटरव्यू एचटी में दिया था और जिसमें उनसे पूछा गया था कि गाना-बजाना जो आजकल चल रहा है, जैसा संगीत है, उसमें वहां पर आप किसमें टैलेंट देखती हैं, तो उन्होंने वहां पर मेरा नाम लिया था। उन्होंने कहा कि मालिनी अवस्थी अच्छा गाती हैं, उन्होंने मेरे नाम के आगे बनारस जोड़ दिया था। मैं उन्हें सुनती हूं, मुझे वो बहुत पसंद हैं। उन्होंने मेरे साथ सोनू निगम और जावेद अली का भी नाम लिया था। मुझे यकीन नहीं हुआ फिर मैंने अपनी भतीजी, जो कि मुंबई में रहती थी उसे फोन किया और फिर उससे कहा कि जल्दी ही एचटी मंगवाओ और उसकी फोटो भेजो मुझे। उसने भेजा, फिर एचटी के एडीटर ने भी मुझे फोन करके बताया कि हमने ये स्टोरी कैरी की है।

मालिनी अवस्थी ने क्यों कहा-जिंदगी से यही गिला है मुझे...

वनइंडिया: अब बात फेसबुक की करते हैं, आपने अपनी वॉल पर एक प्रोमो रिलीज किया है 'जिंदगी से यही गिला है मुझे', क्या लेकर आ रही हैं आप श्रोताओं के लिए?

मालिनी अवस्थी: दरअसल, ये कमाल की बात है कि शुरुआत तो हमने गजलों से की, हमने बहुत खूबसूरत गजलें सीखीं और खूब अच्छी गाती भी रही हूं लेकिन जैसे कि मैंने कहा कि मैंने लोकगीतों के लिए अपने को खपा दिया तो खपाने की सबसे बड़ी कीमत ये भी रही कि मैंने जानबूझकर कुछ चीजें उठाई नहीं, लेकिन अब उन्हें मैं लेकर आ रही हूं, ये गजल मेरे लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इसे मैंने अपने पति अवनीश कुमार अवस्थी को समर्पित किया है।' जिंदगी से यही गिला है मुझे, तू बहुत देर से मिला है मुझे', इसे हम संडे को रिलीज करने वाले हैं।

वनइंडिया: हमसे बात करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया और आपके नए वीडियो के लिए हमारी पूरी टीम की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं।

मालिनी अवस्थी: शुक्रिया।

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