Gandhi Jayanti 2024: सामूहिक स्नान से लेकर संबंधों तक, महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े विवाद क्या-क्या थे?
Mahatma Gandhi Controversies: महात्मा गांधी को पूरी दुनिया में सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उनके जीवन में कई संघर्षों के साथ-साथ कई विवाद भी जुड़े रहे, जिन पर आज भी चर्चा होती है।
गांधीजी के जीवन से जुड़े ये विवाद उनके व्यक्तिगत संबंधों से लेकर सार्वजनिक जीवन तक फैले हुए थे। यहां हम 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के अवसर पर उनके जीवन से जुड़े प्रमुख विवादों पर विस्तार से बात करेंगे। आइए आपको रूबरू कराते हैं...

पत्नी कस्तूरबा से रिश्ते और ब्रह्मचर्य के प्रयोग
महात्मा गांधी का विवाह 13 साल की उम्र में कस्तूरबा गांधी से हुआ था। उनके चार बेटे भी हुए, लेकिन समय के साथ गांधीजी ने यौन संबंधों से दूरी बनाना शुरू कर दिया। दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए 1906 में उन्होंने 38 साल की उम्र में ब्रह्मचर्य का प्रण लिया और यौन इच्छाओं को नियंत्रित करने के लिए कई प्रयोग शुरू किए। उन्होंने अपनी किताब 'द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रूथ' में यह स्वीकार किया कि उनके मन में अक्सर यौन विचार आते थे, जिससे वे ग्लानि महसूस करते थे।
ब्रह्मचर्य को लेकर उनके प्रयोग काफी विवादित थे, खासकर जब उन्होंने युवा महिलाओं और लड़कियों के साथ नग्न सोने या स्नान करने का प्रयोग किया। उनका दावा था कि वे इन तरीकों से अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण का परीक्षण कर रहे थे। यह बात आज भी लोगों के बीच बहस का विषय बनी हुई है।
सुशीला नायर के साथ विवाद
महात्मा गांधी के ब्रह्मचर्य प्रयोगों के कारण उनके आश्रम में भी विवाद उठे। भारतीय मूल के लेखक वेद मेहता की किताब 'महात्मा गांधी एंड हिज एपॉस्टल्स' में इसपर कई बातें लिखी हैं। लिखा है कि 1938 में सेवाग्राम आश्रम में गांधीजी के सुशीला नायर के साथ नग्न स्नान की खबरों ने खलबली मचा दी। सुशीला नायर, जो गांधीजी की निजी चिकित्सक थीं, के साथ नहाने के इस प्रयोग ने आश्रम के भीतर और बाहर लोगों को असहज कर दिया। गांधीजी को इस पर सफाई भी देनी पड़ी, जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग स्थानों पर नहाते थे और उनकी आंखें बंद रहती थीं।
युवा लड़कियों के साथ संबंध!
महात्मा गांधी ने अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोगों के तहत अपने आश्रम में कई युवा लड़कियों को अपने साथ सोने का निर्देश दिया। इनमें उनकी पोती आभा और मनु भी शामिल थीं। उनका मानना था कि इस तरह से वे अपनी इच्छाओं पर काबू पा सकते हैं। इस प्रयोग के कारण उनके आलोचक यह सवाल उठाते रहे कि क्या यह नैतिक रूप से सही था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अहिंसा का विवाद
महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत को लेकर भी कई बार आलोचनाएं हुईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके समर्थकों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा के रास्ते को कमजोर और धीमा माना। बोस का मानना था कि ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता पाने के लिए सशस्त्र क्रांति जरूरी है, जबकि गांधीजी ने अहिंसा और सत्याग्रह का मार्ग चुना। दोनों के बीच विचारधारा का यह अंतर उनके रिश्तों में तनाव का कारण बना।
भारत विभाजन और मुस्लिम लीग से संबंध
गांधीजी ने हमेशा भारत के विभाजन का कड़ा विरोध किया। वे चाहते थे कि भारत एकजुट रहे, लेकिन मुस्लिम लीग और जिन्ना के साथ उनके संबंधों पर कई सवाल उठाए गए। विभाजन के बाद कुछ हिंदू राष्ट्रवादी समूहों ने उन्हें इसके लिए जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि उनका मानना था कि गांधीजी ने मुस्लिम समुदाय के प्रति नरम रुख अपनाया था।
भगत सिंह की फांसी और क्रांतिकारी आंदोलन
भगत सिंह और उनके साथियों की फांसी के समय महात्मा गांधी पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने अंग्रेजों पर दबाव डालकर भगत सिंह को बचाने की कोशिश नहीं की। यह विवाद काफी समय तक बना रहा, खासकर युवा क्रांतिकारियों और उनके समर्थकों के बीच। उनका मानना था कि गांधीजी की अहिंसा की नीति कमजोर थी और उन्होंने भगत सिंह को बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
दलित अधिकार और पूना पैक्ट
डॉ. भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच दलित अधिकारों को लेकर भी मतभेद रहे। अंबेडकर ने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी, जिसका गांधीजी ने विरोध किया। गांधीजी का मानना था कि इससे समाज में विभाजन बढ़ेगा। बाद में पूना समझौते के तहत इसका समाधान निकाला गया, लेकिन यह विवाद गांधीजी के जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बना रहा।
राजद्रोह का मुकदमा
साल 1922 में गांधी जी पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया था। यह मुकदमा यंग इंडिया अखबार में प्रकाशित तीन देशद्रोही लेखों के लिए चला था। गांधी जी ने इस मुकदमे में एक भाषण दिया था, जिसे कानूनी क्लासिक माना जाता है।
अंतिम विवाद: हत्या और नाथूराम गोडसे का आरोप
महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने की थी। गोडसे का मानना था कि गांधीजी ने मुस्लिम समुदाय के प्रति नरम रुख अपनाया और पाकिस्तान के निर्माण का समर्थन किया, जिससे हिंदू समाज को नुकसान हुआ। गोडसे के इस आरोप ने गांधीजी की हत्या को एक बड़े विवाद में बदल दिया।
महात्मा गांधी का जीवन जितना महान था, उतना ही विवादों से भरा हुआ भी। उनके आदर्शों और सिद्धांतों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी, लेकिन उनके व्यक्तिगत जीवन और नीतियों को लेकर उठे सवालों ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर किया। बावजूद इसके, उनका योगदान हमेशा भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
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