'एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना सबसे निकम्मी और भ्रष्ट सरकार भी साबित हो सकती है'
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार गिरने के साथ ही अब इस बात को लेकर बहस शुरू हो गई है कि क्या एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना की सरकार प्रदेश को स्थिर सरकार दे पाएगी और क्या यह गठबंधन नैतिक रूप से सही है। तमाम नेताओं ने प्रदेश में इस नए गठबंधन पर तीखा हमला बोला है और इस गठबंधन की सरकार के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। इस बीच पूर्व आप नेता योगेंद्र यादव ने भी मौजूदा गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है।

खड़ा किया सवाल
योगेंद्र यादव ने ट्वीट करके लिखा है कि महाराष्ट्र में जनादेश की डकैती असफल होने का जश्न जरूर मनाएं लेकिन चोरी से भी आंखे न मूंदे। साथ ही उन्होंने लिखा है कि अगर भाजपा व अजित पवार की सरकार अनैतिक और असंवैधानिक थी तो क्या सेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार नैतिक है। उन्होंने लिखा कि बीजेपी+अजित पवार की सरकार अनैतिक और असंवैधानिक थी। सेना+एनसीपी+कांग्रेस को सरकार बनाने का कानूनी अधिकार है लेकिन नैतिक नहीं।
सबसे निकम्मी और भ्रष्ट सरकार साबित हो सकती है
इसके साथ ही योगेंद्र यादव ने मौजूदा गठबंधन पर भी सवाल खड़ा करते हुए लिखा है कि यह प्रदेश की सबसे निकम्मी और भ्रष्ट सरकार साबित हो सकती है। यहां अहम बात यह भी ध्यान देने वाली है कि मौजूदा शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन के खिलाफ शिवसेना के भीतर से भी अब आवाज उठने लगी है। पार्टी के नेता रमेश सोलंकी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
शिवसेना के भीतर से उठने लगी आवाज
रमेश सोलंकी ने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया कि जो श्रीराम का नहीं वो मेरे काम का नहीं। रमेश सोलंकी ने ट्वीट करके लिखा कि यह कहावत है, जब जहाज डूबता है तो सबसे पहले चूहे कूदकर भागते हैं, लेकिन मैं पार्टी की जीत के मौके पर उसे छोड़ रहा हूं। सोलंकी ने लिखा कि मैं पार्टी उस वक्त छोड़ रहा हूं जब शिवसेना मजबूत स्थिति में है और महराष्ट्र में सरकार का गठन कर रही है मैं पार्टी से बड़े गर्व के साथ एक शिवसैनिक के तौर पर अलग हो रहा हूं, मैं अपने सिद्धांतों और उसूलों पर पार्टी से अलग हो रहा हूं।












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