आरक्षण मुद्दे के हल के लिए क्या है उद्धव ठाकरे का फॉर्मूला? जिसे सुनते ही आंदोलनकारी ने कहा ना!
Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: महाराष्ट्र में मराठा कोटा की मांग को लेकर पहले आंदोलन चल ही रहा था। इसके विरोध में अब ओबीसी कार्यकर्ता के आंदोलन ने भी जोर पकड़ लिया है। ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे अपनी ओर से समाधान का एक फॉर्मूला लेकर आए हैं।
उद्धव ने कहा कि वह महाराष्ट्र में आरक्षण के मुद्दे को लेकर ऐसे किसी भी समाधान का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, जो 'सभी को स्वीकार्य' हो। लेकिन, मराठा कोटा के लिए अनशन और आंदोलन करके चर्चित हुए मनोज जारांगे ने पहले ही उन्हें रेड सिंग्नल दिखा दिया है।

पहले सभी आंदोलनकारियों से सरकार के खिलाफ एकजुट होने को कहा
उद्धव ठाकरे ने इस मसले पर पहले कहा था कि मराठा और ओबीसी समेत सभी समुदायों को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी चाहिए, जिससे सत्ताधारी दल उन्हें न्याय देने के लिए मजबूर हो जाएं। उन्होंने कहा था, 'हर बार जारांगे उपवास पर जाते हैं, हाके उपवास करते हैं। आप (सरकार) उनकी जिंदगियों के साथ क्यों खेल रहे हैं।'
विधानमंडल और संसद से कोटा बढ़ाने की भी कह चुके हैं बात
ठाकरे यह भी कह चुके हैं कि अगर आरक्षण के मसले के समाधान के लिए कोटा बढ़ाने की जरूरत है तो इसे विधानमंडल के सामने लाना चाहिए और वह इसका समर्थन करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर संसद में भी यह लाया जाता है तो वे वहां भी उसका समर्थन करेंगे।
आरक्षण मुद्दे के हल के लिए क्या है उद्धव ठाकरे का फॉर्मूला?
अब उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में कहा है कि 'राज्य सरकार को चर्चा के लिए राजनेताओं को बुलाने के बजाए बुद्धिजीवियों या विभिन्न समुदायों के नेताओं को बुलाना चाहिए। जारांगे, हाके और धनगर समुदाय के नेताओं को आमंत्रित करें और उनसे पूछें कि वे क्या चाहते हैं। उन्हें बताएं कि क्या आप वास्तव में उन्हें वह दे सकते हैं, जो वह मांग रहे हैं।'
जारांगे ने ठुकरा दिया उद्धव का फॉर्मूला
जिस वक्त छत्रपति संभाजीनगर में रविवार को उद्धव पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने अपने दिल की बातें साझा कर रहे थे, उस समय जारांगे अपने मराठवाड़ा अभियान के लिए परभणी में व्यस्त थे। उनका दावा है कि उनके पास ठाकरे का फोन भी आया लेकिन, वह रैली कर रहे थे।
जारांगे के मुताबिक, 'मैं रैली में व्यस्त था, इसलिए उनका कॉल नहीं उठा पाया। मैं उनके विचारों का समर्थन नहीं करता हूं। हमें ओबीसी नेताओं के साथ क्यों बैठना चाहिए? वे दो समुदायों के बीच लड़ाई करवा रहे हैं।'
विधानसभा चुनावों में बदल जाएगा समीकरण?
महाराष्ट्र में कुछ ही महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी भाजपा, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन को मराठा समुदाय की नाराजगी झेलनी पड़ी है। इसका फायदा निश्चित तौर पर इंडिया ब्लॉक को मिला है, जिसका उद्धव हिस्सा हैं।
लेकिन, अब जिस तरह से मराठा कोटा के खिलाफ समानांतर तौर पर ओबीसी समुदाय की ओर से आरक्षण बचाने का आंदोलन शुरू किया गया है, उसके बाद प्रदेश के चुनावी समीकरण में क्या असर होगा, यह कहना अभी बहुत मुश्किल है।












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