Maharashtra Politics: उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) अब किस हाल में है, स्पीकर के फैसले ने कहां पहुंचाया?
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अपने फैसले में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को असली पार्टी तो बताया है, लेकिन उन्होंने दोनों गुटों में से एक भी एमएलए को अयोग्य नहीं ठहराया है। सीएम शिंदे ने तो इसपर सवाल भी उठाया है और कानूनी राय लेने की बात कही है।
लेकिन, स्पीकर ने किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराकर शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे और उनके समर्थकों को बहुत बड़ी टेंशन दे दी है। ऐतिहासिक फैसले के एक दिन बाद स्पीकर ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अब सारे विधायक शिवसेना में गिने जाएंगे।

उद्धव गुट के एमएलए भी शिवसेना के ही माने जाएंगे-स्पीकर
राहुल नार्वेकर ने कहा है कि अब ठाकरे गुट के विधायकों को भी भरत गोगावले के निर्देशों का पालन करना होगा, जिन्हें मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पार्टी का व्हिप नियुक्त कर रखा है। यही नहीं स्पीकर का कहना है कि शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों को सदन में ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) में बैठना चाहिए।
उद्धव गुट के विधायकों पर मुख्यमंत्री शिंदे का रहेगा कंट्रोल
स्पीकर के इस आदेश का मतलब ये हुआ कि अब जब भी विधानसभा के अंदर कोई ऐसा मामला आएगा या विधेयक पेश होगा, जिसमें व्हिप जारी किया जाए तो उद्धव खेमे के विधायक भी सीएम शिंदे गुट के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे या फिर वे अयोग्य घोषित हो सकते हैं।
शिवसेना के सभी विधायकों को एक व्हिप का पालन करना होगा- राहुल नार्वेकर
नार्वेकर ने कहा है, 'मैंने शिवसेना विधायक दल को विधानसभा में असली राजनीतिक पार्टी के रूप में मान्यता दी है। एक पार्टी में दो व्हिप नहीं हो सकता। विधायक दल के सभी एमएलए को व्हिप का पालन करना होगा।'
स्पीकर के मुताबिक, 'विधायकों को उनको उपलब्ध करवाई गई सीटों पर बैठना होगा। मेरे विचार से सेना सरकार की सत्ताधारी पार्टी है। अगर कोई अलग स्टैंड लेता है, तो यह फैसला उसका है और जो भी होगा उसके लिए वही जिम्मेदार होंगे।'
उधर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस बात से हैरान हैं कि स्पीकर ने उनके गुट को असली शिवसेना माना है, लेकिन उद्धव गुट के 14 विधायकों के अयोग्य ठहराने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। सीएम ने कहा है, 'हम कानून के विशेषज्ञों से बात करने के बाद इसे चुनौती देंगे।'
स्पीकर के फैसले से उद्धव के प्रति कम होगी सहानुभूति- राजनीति के जानकार
लेकिन, राजनीति के जानकारों की राय में स्पीकर के फैसले ने उद्धव ठाकरे के सहानुभूति कार्ड के संभावित असर को बहुत कम कर दिया है। उनका कहना है कि जून, 2022 से उद्धव के प्रति एक सहानुभूति फैक्टर काम कर रहा था।
यूबीटी के विधायक अयोग्य ठहराए जाते तो सहानुभूति कार्ड चल जाता- राजनीतिक विश्लेषक
लेकिन, स्पीकर ने उनके खेमे के विधायकों की भी सदस्यता नहीं रद्द करके इसके संभावित असर को बहुत फीका कर दिया है। जानकारों को लगता है कि इस साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहल उद्धव खेमे के विधायकों को भी पाला बदलने का मौका मिल गया है।
इनके मुताबिक अगर इन विधायकों को अयोग्य करार दिया जाता तो चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे का सहानुभूति कार्ड बहुत ज्यादा असरदार हो सकता था।
उद्धव गुट की उम्मीदों पर फिर गया पानी!
एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, 'यह तथ्य कि उद्धव गुट के एमएलए को भी छोड़ दिया गया है, (लोगों में) सहानुभूति लहर पैदा होने की संभावना पर पानी फिर गया है। अगर उद्धव गुट के एमएलए को बर्खास्त किया गया होता, तो एक बड़ा आक्रोश पैदा हो सकता था और सहानुभूति लहर फिर से पैदा हो जाती, जिसकी शायद उद्धव गुट को बहुत उम्मीद थी'
दोनों खेमों के विधायकों के बीच आपसी मतभेद कम होंगे- जानकार
एक विश्लेषक का कहना है कि अब चुनाव आयोग और स्पीकर दोनों ने शिंदे गुट को असली शिवसेना बता दिया है। इससे 'दोनों गुटों के एमएलए के बीच एक-दूसरे के खिलाफ जो नफरत पैदा हो गई थी, वह कम होने लगी है और कहा जा रहा है कि बातचीत होनी शुरू हो गई है।'
उनके मुताबिक 'पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री शिवसेना एमएलसी और विपक्ष के नेता अंबादास दानवे के बेटे के रिसेप्शन में भी पहुंचे थे। इसलिए बीजेपी और शिंदे गुट उद्धव गुट के और एमएलए को जोड़ने की कोशिश करेंगे। यह इसलिए संभव है कि उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया गया है। इससे उनका भी गुस्सा कम होगा और दोनों में बातचीत की स्थिति बनेगी।'
बदले हालातों का दबाव उद्धव ठाकरे खेमे में महसूस होना शुरू हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब नेताओं के बीच आपस में यह दोषारोपण शुरू हो गया है कि कौन-कौन उनके गुट के पक्ष को स्पीकर और चुनाव आयोग के सामने सही तरीके से नहीं रखने के लिए जिम्मेदार है। फिलहाल उद्धव इस मतभेद को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात करके शांत करने की कोशिशों में जुटे दिख रहे हैं।












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