सामाजिक बहिष्कार करना महाराष्ट्र में अब से होगा कानूनी जुर्म

जात पंचायत द्वारा किसी व्यक्ति और परिवार पर सामाजिक बहिष्कार करना महाराष्ट्र में अब से कानूनी जुर्म होगा।

मुंबई। जात पंचायत द्वारा किसी व्यक्ति और परिवार पर सामाजिक बहिष्कार करना महाराष्ट्र में अब से कानूनी जुर्म होगा। इस कानून के अंतर्गत आरोपियों को सात साल की सजा और पांच लाख दंड भरना पड़ेगा। जात पंचायत की ओर से बहिष्कृत करनेवाली अनेक घटनाएं पिछले कुछ महीनों में काफी सामने आयी है। सामाजिक बहिष्कार यह एक अपराध साबित होनेवाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य साबित होगा। राष्ट्रपती प्रणव मुखर्जी ने महाराष्ट्र सामाजिक बहिष्कार बंदी कानून को बीते गुरुवार को मान्यता दे दी।

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लोगों को जल्द न्याय मिले इसके लिए इस कानून में आरोपपत्र दाखिल होने के 6 महीने के अंदर निर्णय सुनाने का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अंतर्गत सामाजिक बहिष्कार का आदेश देनेवाली जात पंचायत को सात साल की सजा और पांच लाख जुर्माना भरना पड़ेगा। जाति आधारित फतवा निकालनेवाली संगठना पंजीकृत हो या नहीं कानून के तहत जात पंचायत ही कहलाएगी।

पीड़ितों को जात पंचायत ने दंड सुनाया होगा तो जुर्माने में मिलने वाला मुआवजा पीड़ित को दी जाएगी। सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम, त्यौहार, रैली में शामिल होने से रोकना, स्कूल, क्लब हाऊस में प्रवेश के साथ ही चिकित्सा सेवा में शामिल नहीं होने देना सामाजिक बहिष्कार के अंतर्गत आता है। महाराष्ट्र विधानमंडल में 13 अप्रैल को यह विधेयक पास हुआ था।

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