Maharashtra govt formation issue: अजीत पवार को संजय राउत ने भेजा मैसेज, कयासों का दौर जारी

मुंबई। महाराष्ट्र में सीएम पद को लेकर लगातार भाजपा और शिवसेना में रस्साकशी जारी है, तो वहीं अब से थोड़ी देर पहले मीडिया से बात करते हुए एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा कि उन्हें अब से थोड़ी देर पहले संजय राउत का मैसेज मिला है लेकिन वो उसका जवाब नहीं दे पाए क्योंकि वो मीटिंग में थे, यह पहली बार है कि चुनाव के बाद उन्होंने मुझे मैसेज किया है, मैं नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया है लेकिन मैं उन्हें समय मिलते ही फोन करूंगा, मीडिया के सामने मैसेज को दिखाते हुए अजित पवार ने कहा कि संजय राउत ने 'जय महाराष्ट्र' का मैसेज भेजा है। फिलहाल अजीत पवार के इस बयान पर कयासों का दौर गर्म हो गया है। आपको बता दें कि आज शरद पवार ने एनसीपी की मीटिंग बुलाई थी, वो कल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं।

शिवसेना को लेकर एनसीपी ने कही थी ये बात

पवार ने कहा कि अगर संजय राउत ने दावा किया है कि उनके पास 170 से 175 विधायकों का समर्थन है, तो वो ही इस बारे में बेहतर बता सकते हैं, हम नहीं, शिवसेना के समर्थन पर अजित पवार ने कहा कि एनसीपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा है ऐसे में एक पक्ष यह निर्णय नहीं ले सकता इसलिए शिवसेना के गठबंधन का निर्णय कांग्रेस-एनसीपी को संयुक्त रूप से करना है।

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कही थी ये बात

इससे पहले एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी कहा था कि अगर शिवसेना कहती है कि उनका मुख्यमंत्री बनेगा तो यह मुमकीन हो सकता है, शिवसेना अपनी भूमिका एकदम स्पष्ठ करे, हम भी अपनी भूमिका बता देंगे, उन्होंने कहा कि फिलहाल जनता ने हमें विपक्ष में बैठने के लिए चुना है और हम उसके लिए तैयार हैं।

शिवसेना सांसद संजय राउत का दावा

शिवसेना सांसद संजय राउत का दावा

तो वहीं रविवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि उनके पास 170 से 175 विधायकों का समर्थन है, आपको बता दें कि अभी शिवसेना के 56 विधायक हैं, ऐसे में चर्चा गर्म है कि बीजेपी के ना मानने पर शिवसेना एनसीपी के साथ हाथ मिला सकती है।

सीएम पद को लेकर अटक गया है मामला

सीएम पद को लेकर अटक गया है मामला

मालूम हो कि, विधानसभा चुनाव में ठाकरे परिवार से चुनाव लड़ने वाले पहले सदस्य आदित्य ठाकरे ने वर्ली सीट से चुनाव जीतकर शिवसेना का नया इतिहास लिखा है। शिवसेना ने कुल 56 सीटें अपने नाम कीं वहीं, छह विधायकों का समर्थन भी उन्हें मिल गया है, जबकि भाजपा के हिस्से में 105 सीटें आई हैं, पिछली बार की तुलना में भाजपा को 17 सीटों का नुकसान हुआ है, इस बार एनसीपी ने पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन किया है और 54 सीटें अपने नाम की जबकि पिछली बार उसे 41 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।

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