'महाराष्ट्र चुनाव में वोटिंग की गड़बड़ी', राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने आंकड़ों से दिया जवाब
Maharashtra Election Voting Irregularities: भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार, 22 अप्रैल को कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए उन सभी आरोपों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई थी। आयोग के अनुसार, यह आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की मंशा से प्रेरित हैं।
ECI ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से संबंधित कई आंकड़े जारी करते हुए विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि ये सभी तथ्य बेबुनियाद हैं। क्या है पूरा मामला? राहुल गांधी के बयान पर इलेक्शन कमिशन ने क्या कहा? आईए विस्तार जानते हैं...

Maharashtra Election Voting Irregularities: क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के बोस्टन शहर में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर "समझौता करने" का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र चुनावों में मतदान के अंतिम दो घंटों में अचानक 65 लाख मतदाताओं ने वोट डाल दिया, जो भौतिक रूप से असंभव है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और वीडियोग्राफी की मांग को आयोग ने न केवल अस्वीकार कर दिया, बल्कि कानून में भी बदलाव किया गया ताकि यह मांग ही न की जा सके। राहुल गांधी ने दावा किया कि शाम 5:30 बजे तक मतदान के आंकड़े आयोग ने सार्वजनिक किए थे और उसके बाद के मात्र दो घंटों में इतनी बड़ी संख्या में मतदाता अचानक सामने आए। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की गंभीर खामी बताया।
Election Commission की प्रतिक्रिया
- नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इन सभी आरोपों के जवाब में, चुनाव आयोग के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि मतदान का पूरा आंकड़ा और प्रक्रिया सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है और किसी भी राजनीतिक दल के लिए यह आंकड़े सुलभ रहे हैं।
- आयोग के अनुसार, 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक कुल 6,40,87,588 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
- इसका औसत निकालने पर प्रति घंटे लगभग 58 लाख मत पड़ते हैं। इस औसत के अनुसार, अंतिम दो घंटों में 116 लाख मतदाता तक वोट डाल सकते थे। इस लिहाज़ से, 65 लाख मतों का पड़ना न तो असंभव है और न ही संदिग्ध।
- आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान प्रक्रिया हर मतदान केंद्र पर उम्मीदवारों या उनके अधिकृत एजेंटों की उपस्थिति में संचालित की जाती है।
- कांग्रेस पार्टी के खुद के 27,099 एजेंट बूथ स्तर पर तैनात थे और किसी भी एजेंट ने उस समय या उसके बाद कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई।
Election Commission: मतदाता सूचियों की प्रक्रिया और पारदर्शिता
निर्वाचन आयोग ने बताया कि भारत में मतदाता सूचियों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाताओं के पंजीकरण नियम, 1960 के अंतर्गत तैयार किया जाता है। प्रत्येक चुनाव से पहले और हर साल एक बार विशेष सारांश संशोधन किया जाता है, जिसमें नए मतदाता जोड़े जाते हैं, मृतकों और अयोग्य लोगों के नाम हटाए जाते हैं। अंतिम मतदाता सूचियाँ सभी राजनीतिक दलों को समय पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
महाराष्ट्र में अंतिम सूची में 9,77,90,752 मतदाता दर्ज थे, और इनके खिलाफ केवल 89 अपीलें दर्ज की गईं, जो कुल संख्या का बेहद छोटा हिस्सा है। आयोग के अनुसार, यदि सूची में इतनी गंभीर त्रुटि होती तो अपीलों की संख्या बहुत अधिक होती।
Election Commission ने दिया चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर
चुनाव आयोग ने यह भी दोहराया कि भारत में चुनाव सरकारी कर्मचारियों की निगरानी में होते हैं और प्रत्येक चरण-चाहे वह मतदाता सूची बनाना हो, मतदान कराना हो या मतगणना राजनीतिक दलों के नामित एजेंटों की उपस्थिति में पूरी पारदर्शिता से होता है। आयोग ने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली की विश्वभर में प्रशंसा होती रही है और इस पर सवाल उठाना न केवल चुनाव कर्मचारियों का अपमान है, बल्कि अपने ही दल द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों को अविश्वसनीय ठहराने के समान है।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने यह भी कहा कि कांग्रेस को 24 दिसंबर 2024 को इन सभी तथ्यों से अवगत करा दिया गया था, बावजूद इसके यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बार-बार इन्हीं मुद्दों को राजनीति के मंच से उठाकर भ्रम फैलाया जा रहा है। चुनाव आयोग के सूत्रों ने यह भी कहा कि कांग्रेस को 24 दिसंबर 2024 को इन सभी तथ्यों से अवगत करा दिया गया था, बावजूद इसके यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बार-बार इन्हीं मुद्दों को राजनीति के मंच से उठाकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा किसी भी व्यक्ति द्वारा फैलाई जा रही कोई भी गलत सूचना न केवल कानून के प्रति अनादर का संकेत है, बल्कि अपने स्वयं के राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त हजारों प्रतिनिधियों को भी बदनाम करती है और लाखों चुनाव कर्मचारियों को हतोत्साहित करती है जो चुनावों के दौरान अथक और पारदर्शी तरीके से काम करते हैं। मतदाताओं द्वारा किसी भी प्रतिकूल फैसले के बाद, यह दावा करके चुनाव आयोग को बदनाम करने का प्रयास पूरी तरह से बेतुका है।
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