Maharashtra: कोंकण में शिंदे की शिवसेना मजबूत, अलीबाग में उतारा दमदार कैंडिडेट, बदलेगा का समीकरण
महाराष्ट्र में कोंकण का रायगढ़ जिला पिछले कई वर्षों से शेतकरी कामगार पार्टी का गढ़ रहा है। लेकिक इस बार यहां स्थिति अलग होने वाली है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की एंट्री के बाद शेतकरी कामगार पार्टी को कांटे की टक्कर मिल रही है। दरअसल, यहां की कई स्थानीय स्वराज्य संस्थाएं, बाजार समिति, शिक्षा संस्थाओं पर शेतकरी कामगार पार्टी के नेताओं का प्रभुत्व रहा। धीरे-धीरे शेतकरी कामगार पार्टी का प्रभाव कम हुआ और कई दमदार नेताओं ने दूसरी पार्टी ज्वॉइन की है। शिवसेना ने भी धीरे-धीरे जिले में अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। अलीबाग के लिए शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस बार महेंद्र दलवी पर भरोसा जताया है, जिनका नाम इस क्षेत्र में शिवसेना की पकड़ मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है।
शेकाप का गढ़ ध्वस्त करेगी शिवसेना
अलीबाग रायगढ़ जिले का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है। अलीबाग शहर पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मुंबई के नागरिकों के लिए वीकेंड का सबसे पसंदीदा स्थान अलीबाग माना जाता है। मुंबई से शुक्रवार शाम को बोट से अलीबाग आने वाले और सोमवार सुबह फिर मुंबई जाने वाले कई धनाढ्य नागरिक हैं।

अलीबाग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र कई दशकों से शेतकरी कामगार पार्टी का गढ़ रहा है। इस निर्वाचन क्षेत्र से शेकाप के दत्तात्रय पाटील ने 5 बार प्रतिनिधित्व किया है। साथ ही शेकाप की नेता मीनाक्षी पाटील तीन बार अलीबाग से चुनी गई हैं। 2014 में शेकाप के सुभाष पाटील चुने गए थे। 2019 में पहली बार शिवसेना ने शेकाप का किला ध्वस्त कर पहली बार विजय प्राप्त किया था। यहां से शिवसेना के महेंद्र दळवी विधायक बने।
शेकाप के कैंडिडेट को फिर चुनौती
एकनाथ शिंदे ने 2024 की विधानसभा चुनाव के लिए अलीबाग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से महेंद्र दलवी को ही फिर मौका दिया है। उनके खिलाफ शेकाप की चित्रलेखा पाटील चुनाव लड़ रही हैं। चित्रलेखा पाटील शेतकरी कामगार पार्टी के नेता पूर्व विधायक जयंत पाटील के परिवार की सदस्य हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना ठाकरे गुट के सुरेंद्र म्हात्रे ने नाम वापस ले लिया है, जिससे अब इस निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना शिंदे गुट बनाम शेकाप सीधा मुकाबला होगा।
शिवसेना के उम्मीदवार महेंद्र दलवी अपनी तेज तर्रार छवि के लिए जाने जाते हैं। जनता के कामों के लिए वे प्रशासन से टकराने में नहीं हिचकते। अलीबाग में जयंत पाटील से उन्होंने सीधा संघर्ष किया। विधान परिषद चुनाव में जयंत पाटील की हार के बाद चिखल में लोटकर खुशी मनाने वाले महेंद्र दलवी प्रसिद्ध हो गए थे। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त निधि न मिलने से महेंद्र दलवी नाराज थे। एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अलीबाग विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की निधि दी और उसके माध्यम से तेजी से विकास कार्य शुरू किए गए और रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति दी गई।
शिंदे सरकार में बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता
सालाव-रेवदंडा पुल, रेवस-करंजा पुल, अलीबाग का सरकारी अस्पताल, बेलकडे से खारापटी सड़क जैसे कई कामों को गति दी गई। पहले अधिवेशन में रेवस-करंजा पुल का प्रश्न था। उसकी निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और साढ़े तीन हजार करोड़ का काम अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला है। साथ ही साढ़े बारह सौ करोड़ के सालाव-रेवदंडा पुल की भी निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस पुल का काम अशोका बिल्डकोन को मिला है। साथ ही आगरदांडा-दिघी पुल को भी मंजूरी मिली है।












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