नरेंद्र के इशारे पर चलेगा देवेंद्र का 'मिशन बाल ठाकरे'
[अजय मोहन] नये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनते ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव संपन्न हो गये। अब शुरू होगा 'मिशन बाल ठाकरे'। यह मिशन अगले पांच वर्षों में महाराष्ट्र के हर शहर, गांव, कस्बे और ब्लॉक तक चलाया जायेगा। इस मिशन के मास्टर माइंडर होंगे मोदी। जी हां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। चौंकिये या हंसिये मत क्योंकि हम यहां कोई पॉलिटिक सटायर नहीं, बल्कि उस चुनावी रणनीति से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसके सफल होने पर आने वाले समय में मुलायम सिंह यादव और मायावती के पैरों तले जमीन खिसक जायेगी।
क्या है मिशन बाल ठाकरे
मिशन बाल ठाकरे भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार का वो मिशन है, जिसके अंतर्गत भाजपा स्वर्गीय बाल ठाकरे को शिवसेना से छीन लेगी। सरकार तमाम सरकारी योजनाओं को बाल ठाकरे के नाम से चलाया जायेगा। इसमें कोई शक नहीं है कि बाला साहब आज भी लाखों मराठियों के दिलों में बसते हैं।
उनकी यादों को जीवंत रखने के लिये फडणवीस की नई सरकार जल्द ही महाराष्ट्र में बाल ठाकरे पेय जल योजना, बाल ठाकरे रूरल डेवलपमेंट स्कीम, बाल ठाकरे उद्यमिता विकास योजना, आदि जैसी योजनाएं जल्द महाराष्ट्र में शुरू होंगी, या फिर वर्तमान योजनाओं को अपग्रेड करके बाला साहब के नाम से रीलॉन्च किया जायेगा।
मिशन बाल ठाकरे से जुड़ी पांच अहम बातें पढ़ें स्लाइडर में-

ऐसा क्यों करेंगे फडणवीस
फडणवीस का मकसद शिवसेना से बाल ठाकरे को छीन लेने का होगा। इस बार बहुमत लाने के लिये भाजपा के पास 23 सीटों की कमी पड़ गई, जिसके कारण शिवसेना व अन्य छोटे दलों व निर्दलीयों का मुंह देखना पड़ रहा है। मिशन बाल ठाकरे के माध्यम से भाजपा पांच साल बाद की तैयारी अभी से शुरू कर देगी।

मिशन एक फायदे अनेक
दूसरा सबसे अहम कारण यह है कि विधानसभा में किसी भी विधेयक को पास कराने के लिये भाजपा को ज्यादा से ज्यादा मतों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में अगर बाला साहब को उच्च स्तर का सम्मान दिया गया तो शिवसेना खुशी-खुशी भाजपा के विधेयकों पर अपना वोट देगी।

कम होगा शिवसेना का जनाधार
इस मिशन के अंतर्गत शिवसेना का जनाधार कम हो जायेगा। ऐसे में उद्धव ठाकरे को मजबूरन भाजपा नेताओं के साथ मधुर संबंध स्थापित करने पड़ेंगे।

कुछ नहीं कर पायेंगे उद्धव
'मिशन बाल ठाकरे ' उद्धव के लिये उस पकवान के समान होगा, जिसे न तो वो खा सकेंगे और न ही उससे इंकार कर सकेंगे। क्योंकि अगर उद्धव ने ऐसी योजनाओं का विरोध किया, तो उन्हीं की पार्टी की छवि धूमिल होगी।

नरेंद्र कैसे हुए इसके मास्टर माइंड
मोदी ने आते ही कांग्रेस से नेहरू को छीन लिया। मोदी ने नेहरू की 125वीं जयंती वृहद स्तर पर मनाने का फैसला कर, यह जता दिया कि नेहरू सिर्फ कांग्रेस की संपत्ति नहीं। उन पर हर भारतीय का अधिकार है। असल में इसी तर्ज पर देवेंद्र भी शिवसेना से बाला साहब को छीन लेंगे।

मुलायम को किस बात का डर
मुलायम सिंह यादव को इस बात का डर है कि अगर केंद्र में भाजपा सरकार ने डा. राम मनोहर लोहिया के नाम से योजनाएं लानी शुरू कर दीं, तो सपा की राजनीति खतरे में पड़ जायेगी। भाजपा ऐसा कर भी सकती है, क्योंकि भाजपा का मिशन 2017 शुरू हो चुका है।
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