खेत में काम करते समय ना हो ढिलाई इसलिए 4605 महिलाओं के निकाल दिए गर्भाशय

खेत में काम ना रुके इसलिए 4605 महिलाओं के निकाल दिए गर्भाशय

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के बीड जिले में 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकाल देने के मामले की सरकार जांच कराएगी। महाराष्ट्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया है कि घटना की जांच के लिए सरकार ने एक पैनल गठित कर दिया है। विधान परिषद में उन्होंने जानकारी दी कि स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पैनल दो माह में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा।

 काम ना रुके, इसलिए निकाल दिए महिलाओं के गर्भाशय

काम ना रुके, इसलिए निकाल दिए महिलाओं के गर्भाशय

महाराष्ट्र के बीड में 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकाल देने का मामला करीब तीन महीने पहले सामने आया था। कथित तौर पर गरीब महिलाओं के साथ ये इसलिए किया गया था ताकि महिलाएं गर्भ धारण ना कर सकें, महावारी के दौरान भी उनके काम पर असर ना हो और वो खेत में गन्ने की कटाई का काम करती रह सकें। मामले के सामने आने और विधानसभा में इसे उठाए जाने के बाद इसकी जांच के लिए पैनल बना है।

शिवसेना की महिला विधायकों ने उठाया मामला

शिवसेना की महिला विधायकों ने उठाया मामला

शिवसेना की दो महिला सदस्यों नीलम गोरे और मनीषा कायंदे ने विधान परिषद में ये मामला उठाया। नीलम गोर्हे ने विधान परिषद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि बीड जिले में गन्ने के खेत में काम करने वाली महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए गए, ताकि माहवारी के चलते उनके काम में ढिलाई न आए। स्वास्थ्य मंत्री शिंदे ने इस पर बताया कि जांच के लिए समिति बनाई गई है,जो जांच करेगी। मुख्य सचिव अगुआई वाली समिति में 3 गाइनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और कुछ महिला विधायक होंगी।

 अप्रैल में सामने आया था मामला

अप्रैल में सामने आया था मामला

स्वास्थ्य मंत्री ने विधान परिषद में बताया कि मराठवाड़ा के बीड जनपद में 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकाल दिए गए हैं। बीड डिस्ट्रिक्ट सिविल सर्जन की अध्यक्षता में गठित एक समिति की जांच में ये सामने आया है। समिति की रिपोर्ट के अनुसार बीड में 99 निजी अस्पतालों में 2016-17 से 2018-19 के बीच 25 से 30 वर्ष के आयुवर्ग वाली महिलाओं के गर्भाशय निकाल दिए गए। ताकि वह गर्भ धारण ना कर सकें और उनसे गन्ना कटाई का काम लिया जा सके।

इस साल अप्रैल में ये मामला तब सामने आया था, जब इसको लेकर अखबारों में खबरें छपी थीं और इन रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया था। उसके बाद बीड के सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित कर मामले की जांच की गई थी। जिसमें 4605 महिलाओं के गर्भाशय निकाल दिए जाने की बात सामने आई।

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