केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को महाड कोर्ट से मिली जमानत, 8 घंटे की कस्टडी के बाद राहत
मुंबई, 25 अगस्त: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ दिए अपने बयान के बाद मंगलवार को गिरफ्तार हुए केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को आखिरकार देर रात जमानत मिल गई। रायगढ़ जिले के महाड मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नारायण राणे को उद्धव ठाकरे के खिलाफ दिए अपने बयान के सिलसिले में जमानत दे दी। दरअसल, पुलिस ने मंगलवार को पहले उन्हें हिरासत में लिया था। फिर गिरफ्तार कर महाड कोर्ट में पेश, जहां से उनको बड़ी राहत मिली है।
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वहीं इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने राणे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। फिर राणे के वकील ने तुरंत उनकी जमानत के लिए अर्जी लगा दी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनको जमानत दे दी। जानकारी के मुताबिक महाड मजिस्ट्रेट कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ उनके कथित बयान के मामले में 15,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है।
वहीं नारायण राणे के वकील संग्राम देसाई ने कहा कि नारायण राणे को जमानत देते समय अदालत ने कुछ शर्तें रखी हैं, जैसे की वह 31 अगस्त और 13 सितंबर को पूछताछ के लिए थाने में मौजूद रहेंगे और भविष्य में इस तरह का अपराध नहीं करेंगे।
जमानत के बाद भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने बताया कि परसों से जन आशीर्वाद यात्रा शुरू करेंगे। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने महाड कोर्ट से 7 दिन के लिए राणे की रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनको जमानत दे दी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी पत्नी नीलिमा और बेटे विधायक नितेश राणे भी मौजूद थे।
दरअसल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राणे महाराष्ट्र में जन आशीर्वाद यात्रा पर हैं। ऐसे में महाड में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के खिलाफ विवादित बयान दे दिया था, जिसके बाद पूरे दिन मंगलवार को भाजपा और शिवसेना के कार्यकर्ताओं के बीच पत्थरबाजी और हाथापाई की घटना हुई।
इसके साथ ही मंगलवार दोपहर को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को रत्नागिरी के चिपलून में हिरासत में लिया गया, जिसके करीब 8 घंटे की कस्टडी के बाद केंद्रीय मंत्री को जमानत मिली। बता दें कि उनके खिलाफ कई जगह एफआईआर भी दर्ज हुई है। दूसरी तरफ राणे ने जब से महाराष्ट्र में जनआशीर्वाद यात्रा शुरू की है, तब से अब तक उन पर 49 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकतर कोविड गाइडलाइन को तोड़ने को लेकर हैं।












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