'सभी को खुलकर बोलने का अधिकार', कंपनी और कर्मचारियों को लेकर इस मामले पर मद्रास HC का फैसला
कंपनी और कर्मचारियों के एक मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में कर्मचारी को राहत देते हुए उसपर लगे आरोपों को रद्द कर दिया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने कंपनी और कर्मचारियों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सभी कर्मचारियों को खुलकर बोलने का अधिकार है। कोर्ट ने मामले में कर्मचारी को राहत देते हुए उसपर लगे आरोपों को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि किसी संगठन के सदस्यों के लिए शिकायतें होना स्वाभाविक है। उन्हें अपनी बात रखने की इजाजत देने से गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, प्रबंधन का हस्तक्षेप तभी होना चाहिए, जब संगठन की छवि वास्तव में प्रभावित हो।

हाई कोर्ट ने अंडरलाइन करते हुए कहा कि इस तरह की अभिव्यक्तियों को दबाना विचार-नीति के बराबर होगा। हाई कोर्ट ने स्वीकार किया कि आज की डिजिटल रूप से जुड़ी दुनिया में, निजी बातचीत के लिए लागू सिद्धांत सीमित पहुंच के साथ एन्क्रिप्टेड वर्चुअल प्लेटफॉर्म के लिए प्रासंगिक हैं। क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मामला तूतीकोरिन में तमिलनाडु ग्राम बैंक की अरुमुगनेरी शाखा से जुड़ा हुआ है। यहां के एक कार्यालय सहायक (बहुउद्देशीय) ए लक्ष्मीनारायण ने बैंक के प्रशासनिक फैसलों का मजाक उड़ाते हुए वॉट्सऐप पर आलोचनात्मक संदेश पोस्ट किया था। जिसके बाद ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और बैंक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी लक्ष्मीनारायण को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी के खिलाफ आरोपपत्र दायर हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने मामले में कर्मचारी को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के वाट्सएप संदेशों ने बैंक के आचरण नियमों का उल्लंघन नहीं किया। इसी के साथ ही उसपर लगे आरोप ज्ञापन को रद्द कर दिया।












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