कोरोनिल को लेकर पतंजलि पर मद्रास हाईकोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली- योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को उसकी बहुप्रचारित दवा कोरोनिल के नाम को लेकर बहुत बड़ा झटका लगा है। चेन्नई की एक कंपनी ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका देकर दावा किया था कि पतंजलि ने उसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल किया है, जिसके राइट्स 2027 तक के लिए सुरक्षित हैं। यानि, पतंजलि कोरोनिल के नाम से अपनी दवा नहीं बेच सकेगी। इसी आधार पर अदालत ने पतंजलि को 21 अगस्त तक 10 लाख रुपये बतौर जुर्माना भरने को कहा है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि पतंजलि ने कोरोना को लेकर जनता के दहशत को पतंजलि ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है और कोरोनिल सिर्फ सर्दी, खांसी और बुखार के लिए इम्युनिटी बूस्टर है। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय ने भी पतंजलि को सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर के नाम से ही कोरोनिल बेचने की इजाजत दी हुई है।

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    Coronil को लेकर Patanjali Ayurved पर Madras High Court ने लगाया 10 लाख का जुर्माना | वनइंडिया हिंदी
    'कोरोनिल' के लिए पतंजलि पर 10 लाख का जुर्माना

    'कोरोनिल' के लिए पतंजलि पर 10 लाख का जुर्माना

    मद्रास हाई कोर्ट ने स्वामी रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही गुरुवार को मद्रास हाई कोर्ट ने पतंजतलि आयुर्वेद को इसके 'इम्युनिटी बूस्टिंग' उत्पाद के लिए 'कोरोनिल' नाम के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश चेन्नई स्थित अरुद्रा इंजीनियरिंग की ओर से कंपनी के खिलाफ ट्रेडमार्क के उल्लंघन को लेकर दायर केस पर सुनवाई के आधार पर दिया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि उसके पास 1993 से 'कोरोनिल' का ट्रेडमार्क है। कंपनी ने यह भी दावा किया है कि 'कोरोनिल 92-बी' के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल का अधिकार उसके पास 2027 तक के लिए है।

    'डर और दहशत का फायदा उठाने की कोशिश'

    'डर और दहशत का फायदा उठाने की कोशिश'

    अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ आदेश देते हुए कहा कि 'प्रतिवादियों (पतंजलि आयुर्वेद) ने खुद के लिए यह मुकदमा आमंत्रित किया है। ट्रेड मार्क रजिस्ट्री से मामूली सी जानकारी प्राप्त करने से पता चल जाता है कि कोरोनिल एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है। अगर उन्हें पता था और उसके बावजूद ढिठाई के साथ 'कोरोनिल' के नाम का इस्तेमाल किया तो वह विचार किए जाने लायक भी नहीं हैं।' अदालत ने आगे कहा कि 'पतंजलि अनजान और बेगुनाह होने की दलील देकर उदारता दिखाने की मांग नहीं कर सकता। इतना ही नहीं अदालत ने योग गुरु बाबा राम देव की कंपनी की इस बात के लिए भी खिंचाई की है कि जनता के 'डर और दहशत' का फायदा उठाने की कोशिश की गई है।

    'खांसी, सर्दी और बुखार के इम्युनिटी बूस्टर'

    'खांसी, सर्दी और बुखार के इम्युनिटी बूस्टर'

    हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक पतंजलि को अडयार कैंसर इंस्टीट्यूट एंड गवर्नमेंट योगा एंड नैचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज को 21 अगस्त तक जुर्माने का भुगतान करना है। जज ने कहा, 'पतंजलि ज्यादा कमाई के लिए कोरोना वायरस के इलाज का दावा करके आम जनता के डर और दहशत का फायदा उठा रही है, जबकि उसका कोरोनिल टैबलेट इसका इलाज नहीं, बल्कि खांसी, सर्दी और बुखार के खिलाफ इम्युनिटी बूस्टर है। ' बाबा रामदेव ने जून में ही कोविड-19 के इलाज के तौर पर कोरोनिल को लॉन्च किया था, लेकिन बिना पुख्ता जांच के उनके दावों को लेकर बहुत हंगामा मचा था। बाद में आयुष मंत्रालय ने बीच का रास्ता निकाला और कोरोनिल को कोविड-19 की दवा नहीं, बल्कि इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर बेचने की अनुमति दे दी।

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