MP News: नवसंवत्सर पर कृषि, जल और विकास के रोडमैप का संकल्प: मुख्यमंत्री मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विक्रम संवत 2083 के लिए एक विकास रोडमैप का अनावरण किया है, जिसमें किसानों के कल्याण, सिंचाई का विस्तार, घर-घर तक विरासत पर्यटन और पारंपरिक समय-गणना और स्वीकृत सुधारों का जश्न मनाने के लिए विक्रम उत्सव - 2026 सांस्कृतिक कार्यक्रम पर जोर दिया गया है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हुए भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के विकास के लिए कृषि, जल और समग्र प्रगति के रोडमैप का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नवसंवत्सर भारतीय सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्रकृति आधारित जीवन पद्धति का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जयिनी से प्रारंभ हुई भारतीय कालगणना की परंपरा प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। सम्राट विक्रमादित्य के आदर्श सुशासन, न्याय और संस्कृति आज भी प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने उज्जैन को प्राचीन काल से भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केंद्र बताते हुए कहा कि यहां की वेधशाला और वैदिक कालगणना विश्व के लिए आज भी आश्चर्य का विषय है। साथ ही, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता, 27,500 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवसंवत्सर के अवसर पर प्रदेश में इस वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बड़वानी जिले में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट बैठक में कृषि विकास और कल्याण के लिए 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में आधुनिक कृषि तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विरासत के साथ विकास के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
इसके साथ ही ‘श्रीराम वनगमन पथ’ और ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है।
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने नववर्ष के अवसर पर जल संरक्षण के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू करने की घोषणा की। यह अभियान उज्जैन के शिप्रा तट से प्रारंभ होगा, जिसमें पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा।
उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन आंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण प्रकृति और भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि नवसंवत्सर नवचेतना और नवजागरण का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रदेश के समग्र विकास और ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के निर्माण का संकल्प लिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह वर्ष प्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का वर्ष सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को नवसंवत्सर की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।












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