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Satna HIV Blood Case: सतना में सिस्टम फेल? थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ा दिया HIV पॉजिटिव ब्लड, मचा हडकंप

Satna HIV Blood Case: मध्य प्रदेश के सतना जिले से हेल्थ सिस्टम पर सवाल खड़ा करने वाला एक अजीब और चौंकानें वाला मामला सामने आया है। जहां डॉक्टरों की लापरवाही के कराण थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव खून चढ़ा दिया। जब पूरा स्कैंडल खुल कर सामने आया तब से यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण में एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

पहले यह दावा किया जा रहा था कि इस मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को करीब 4 महीने पहले हुई थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब 9 महीने पहले ही यह बात सामने आ चुकी थी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही स्पष्ट जवाबदेही तय की जा सकी।

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समझिए क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, सतना में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाया गया, जिसके बाद वे एचआईवी पॉजिटिव हो गए। इनमें से चार मामलों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़ा माना जा रहा है, जबकि एक मामला अलग बताया गया है। हैरानी की बात यह है कि ये बच्चे अब तक करीब 200 ब्लड डोनरों के संपर्क में आ चुके हैं और तीन अलग-अलग ब्लड बैंकों से कुल 189 यूनिट खून चढ़ाया जा चुका है।

मार्च में सामने आया पहला मामला

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 मार्च 2025 को पहली बार एक 15 वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित किशोरी के एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आई थी। यह नाबालिग ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए सतना जिला अस्पताल पहुंची थी, जहां जांच में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद विभाग ने अन्य थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की जांच कराई।

जांच के दौरान 26 और 28 मार्च को दो 9 वर्षीय बच्चों में भी एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद 3 अप्रैल को एक और 15 वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित नाबालिग की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। इन मामलों के सामने आने के बाद आनन-फानन में ब्लड डोनर्स और ट्रांसफ्यूजन रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।

डोनरों की जांच का आदेश

रिकॉर्ड बताते हैं कि पीड़ित बच्चों को जिला अस्पताल, बिरला हॉस्पिटल और जबलपुर के ब्लड बैंकों से खून चढ़ाया गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 150 ब्लड डोनरों की जांच की जा चुकी है और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव बताई जा रही है। वहीं, मामले में लापरवाही को देखते हुए सिविल सर्जन ने जिला एड्स कंट्रोल सोसाइटी की नोडल अधिकारी को शोकॉज नोटिस जारी किया है और तीन दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले पर नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने भी संज्ञान लिया है। राज्य और केंद्र स्तर से लगातार रिपोर्ट तलब की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी प्रभारी सीएमएचओ से पूरे मामले की जानकारी मांगी है।

राज्य और केंद्र की जांच टीमें सक्रिय

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर 6 सदस्यीय राज्यस्तरीय जांच टीम गठित की गई है, जो बुधवार को सतना पहुंचकर जांच करेगी। इसके अलावा सिविल सर्जन ने भी अलग से एक जांच कमेटी बनाई है, जिसे तीन दिनों में रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह मामला अब सिर्फ चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है। 9 महीने पहले जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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