MP News: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ही प्रदेश के समग्र विकास का आधार : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कृषि विकास के लिए सिंचाई विस्तार के महत्व पर जोर दिया। ध्यान हरदा जिले में पूरी सिंचाई प्राप्त करने और आदिवासी क्षेत्रों में जल संसाधनों को बढ़ाने पर है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश का समग्र विकास सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के एक करोड़ हेक्टेयर कृषि रकबे को सिंचित बनाना सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है। मंत्रालय में आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, नर्मदा नियंत्रण मंडल और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड की संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय-सीमा में पूरी की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हरदा जिले में 756.76 करोड़ रुपये की लागत से शहीद ईलाप सिंह माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना प्रगति पर है, जिससे 39,976 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। अब तक 42% कार्य पूर्ण हो चुका है। परियोजना के पूर्ण होते ही हरदा प्रदेश का पहला शत-प्रतिशत सिंचित जिला बन जाएगा।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि बीते दो वर्षों में हरदा, बड़वानी और धार जिलों में 2 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिन पर 6,640 करोड़ रुपये व्यय हुए। इससे लगभग 600 गांवों के किसान लाभान्वित हुए हैं।
सिंहस्थ 2028 के लिए जलगत तैयारियों पर जोर
मुख्यमंत्री ने उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए शिप्रा नदी के घाटों और जल संरचनाओं के निर्माण कार्य दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी और सीएसआर फंड के उपयोग का भी सुझाव दिया।
संयुक्त नदी लिंक परियोजनाओं पर समन्वय
मुख्यमंत्री ने पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी लिंक परियोजना में उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र को शामिल करने की बात कही। चित्रकूट-मंदाकिनी और ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजनाओं पर उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों से समन्वय के निर्देश दिए।
निर्माणाधीन परियोजनाओं की स्थिति
अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया:
- स्लीमनाबाद टनल परियोजना जनवरी 2026 तक पूर्ण होगी।
- नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर परियोजना का 96% कार्य पूर्ण।
- आईएसपी-कालीसिंध और डही परियोजनाएं क्रमशः दिसंबर 2025 और जून 2026 तक पूरी होंगी।
- सेंधवा और निवाली परियोजनाओं से बड़वानी जिले के 121 गांवों की 42,855 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। माँ रेवा परियोजना से देवास जिले के बारना क्षेत्र तक सिंचाई सुविधा पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
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