MP Election 2023: भाजपा-कांग्रेस में हार-जीत में सिर्फ एक फीसदी का अंतर, चौंकाती है ये सर्वे रिपोर्ट

Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव-2023 इस साल के अंत में होने हैं। इस चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस में बराबरी की लड़ाई है। पिछले चुनाव से सीख लेते हुए दोनों पार्टियां कांग्रेस-भाजपा इस बार पूर्ण बहुमत जुटाने के लिए हर संभव कोशिश में लगी है।

टाइम्स नाउ नवभारत ईटीजी ने अपने ओपिनियन पोल में आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच लड़ाई की भविष्यवाणी की है। इस सर्वे में पता चला कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों पार्टियां कांटे की टक्कर के लिए तैयार हैं। जनमत सर्वेक्षण में दोनों पार्टी को 42 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिलने का अनुमान है।

Madhya Pradesh Assembly Election 2023

मध्य प्रदेश के जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 42.80% वोटशेयर के साथ लगभग 102-110 सीटें मिलने की उम्मीद हैं। जबकि कांग्रेस को 43.80% वोटशेयर के साथ 118-128 सीटें मिलने की उम्मीद है। वहीं बाकी पार्टी को 13.40% वोटशेयर के साथ लगभग 0-2 सीटें जीतने की उम्मीद है।

किस क्षेत्र में किसको मिलेगा कितना वोट शेयर...?

• मालवा निमाड़ में कांग्रेस को 41-45 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि भाजपा इस इलाके में पीछे चल रही है और उसे 20-24 सीटें मिलने की उम्मीद है।

• महाकौशल में बीजेपी आगे चल रही है और उसे 18-22 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस को 16-20 सीटें मिलने की संभावना है।

• ग्वालियर चंबल में बीजेपी की तुलना में कांग्रेस 26-30 सीटों के साथ काफी बेहतर स्थिति में है। इस क्षेत्र में बीजेपी को करीब 4-8 सीटें जीतने की उम्मीद है।

• एमपी के मध्य में बीजेपी को कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन करने और लगभग 22-24 सीटें हासिल करने की उम्मीद है। हालांकि, कांग्रेस को 12-14 सीटें मिलने की उम्मीद है।

• विंध्य में बीजेपी को 19-21 सीटें मिलने की संभावना है, वहीं कांग्रेस को 8-10 सीटें मिलने की उम्मीद है।

• बुंदेलखंड में भाजपा को 13-15 सीटें मिलने का अनुमान है, हालांकि, कांग्रेस 11-13 सीटें हासिल करने की स्थिति में है।

मध्य प्रदेश में पिछला चुनाव 2018 में सभी 230 सीटों के लिए एक ही चरण में 28 नवंबर 2018 को हुआ था। वोटों की गिनती 11 दिसंबर 2018 को हुई थी। कांग्रेस नेता कमल नाथ ने 2018 में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

हालांकि 15 महीने बाद पार्टी के सहयोगी ज्योदिरादित्य सिंधिया के विद्रोह के बाद 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद कमल नाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। फिर बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान चौथी बार राज्य के सीएम बने।

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