टूटी कांग्रेस की उम्मीद, लोकसभा में नहीं मिलेगा नेता विपक्ष पद
नई दिल्ली। भाजपा सरकार का नारा 'अच्छे दिन आने वाले हैं' भले ही देश के लिए प्रोजेक्टिड हो पर कांग्रेस के अच्छे दिन आते नज़र नहीं आ रहे हैं। लोकसभा में अपनी नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिए जाने की कांग्रेस की मांग को सदन की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मंगलवार को रद्द कर दिया।

लोस स्पीकर सुमित्रा ने कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं दिए जाने के अपने फैसले के बारे में दो-टूक कहा ‘मैंने नियमों और परंपराओं का अध्ययन कर यह फैसला लिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुमित्रा को चिट्ठी लिखकर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने का आग्रह किया था। इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए महाजन ने जवाब सौंप दिया है।
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इस फैसले से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी के विचार भी लिए गए हैं। लोकसभा में कांग्रेस 44 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। 282 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है।
दरअसल नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस से कहा गया है कि वे इस स्थिति में नहीं हैं कि सदन में पार्टी के नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे सकें। यह दर्जा पाने के लिए 543 सदस्यीय लोकसभा में किसी दल के पास इस संख्या का कम से कम से 10 % यानी 55 सीट होना जरूरी है।
सुमित्रा महाजन का कहना है कि स्पीकर को नियमों का पालन करना होता है। मैं नियमों के अनुसार चलूंगी। स्पीकर के लिए निर्देश कहता है कि नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने के लिए किसी दल के पास सदन की कुल सीट का कम से कम 10 फीसद सीट होनी चाहिए। हालांकि कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गईं हैं।












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