LPG, Petrol-Diesel पर बड़ा अपडेट, सप्लाई से महंगाई तक सरकार ने बताया क्या है हालात, एक्सपर्ट ओपिनियन भी जानिए
LPG Petrol Diesel Supply Update: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर अब सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने 07 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि देशभर में LPG, पेट्रोल, डीजल और PNG की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और कहीं भी किसी तरह की कमी या 'ड्रायआउट' की स्थिति नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि देश के सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। देश में फ्यूल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी LPG डिस्ट्रीब्यूटर के यहां गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। LPG सिलेंडर की डिलीवरी भी पहले की तरह सुचारू रूप से जारी है। ऑनलाइन बुकिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है और अब करीब 96 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल तरीके से हो रही है। यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बना रहा है।

LPG की सप्लाई और बिक्री में क्या बदलाव आया?
सरकार के मुताबिक, हाल के दिनों में कमर्शियल LPG की आपूर्ति को बढ़ाकर करीब 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है, जो संकट से पहले के स्तर के करीब पहुंच रहा है। पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नया आदेश भी जारी किया गया है, जिससे इसकी बिक्री दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।
फरवरी में जहां हर दिन करीब 77 हजार छोटे सिलेंडर बिक रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गया है। 23 मार्च के बाद से अब तक करीब 7.8 लाख 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। इसके अलावा तेल कंपनियों ने 1300 से ज्यादा जागरूकता कैंप भी आयोजित किए हैं, ताकि लोगों को गैस की उपलब्धता और सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दी जा सके।
पोर्ट्स और शिपिंग मंत्रालय का बयान- समुद्री मोर्चे पर भी हालात सामान्य
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच समुद्री गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। पोर्ट्स और शिपिंग मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने बताया कि इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई घटना नहीं हुई है।
फिलहाल पश्चिमी पर्शियन गल्फ क्षेत्र में 16 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर 433 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। शिपिंग महानिदेशालय लगातार इन पर नजर बनाए हुए है और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है।
क्रूड ऑयल का असर, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पश्चिम एशिया के हालात का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है, जो सीधे भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। PwC इंडिया में पार्टनर और आर्थिक सलाहकार प्रमुख, रानेन बनर्जी के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत एक साल तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई (CPI) पर 0.3 से 0.4 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संकट का असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है। रुपये की विनिमय दर पर दबाव, निर्यात में गिरावट और रोजगार पर असर जैसे कई पहलू सामने आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, "पश्चिम एशिया संकट का भारत पर सबसे बड़ा असर विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) पर दिख रहा है। इसके अलावा निर्यात भी प्रभावित हुआ है और इस सेक्टर में नौकरियों पर दबाव बढ़ा है।"
रानेन बनर्जी ने यह भी कहा, "मेरा मानना है कि इस संघर्ष के चलते स्थिति फिलहाल जैसी है वैसी ही बनी रह सकती है। कुछ लिक्विडिटी से जुड़े कदमों की घोषणा हो सकती है।"
उन्होंने जोड़ा, "मुझे लगता है कि RBI GDP ग्रोथ रेट को लेकर कुछ संकेत दे सकता है, लेकिन मौजूदा संघर्ष और इसके असर को देखते हुए कोई निश्चित आंकड़ा देने से बच सकता है। GDP ग्रोथ पर 0.5% से 1% तक का असर पड़ सकता है।"
GDP ग्रोथ पर भी पड़ सकता है असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत की GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है। अनुमान के मुताबिक, इसमें 0.5 से 1 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रिजर्व बैंक इंडिया (RBI) इस स्थिति को देखते हुए कुछ लिक्विडिटी से जुड़े कदम उठा सकता है, लेकिन फिलहाल अनिश्चितता के कारण ग्रोथ को लेकर स्पष्ट आंकड़ा देने से बच सकता है।
फिलहाल राहत, लेकिन नजर बनी रहेगी
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और उनका असर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम बना रहेगा। यानी अभी के लिए राहत जरूर है, लेकिन आगे की स्थिति पर नजर बनाए रखना उतना ही जरूरी है।












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