Lok Sabha Speaker: अगर चुनाव की नौबत आई! कौन हो सकता है विपक्ष की ओर से स्पीकर पद का उम्मीदवार?
New Lok Sabha Speaker: आजादी के बाद ऐसी परिस्थिति कभी नहीं आई है कि लोकसभा का स्पीकर सर्वसम्मति से न चुना गया हो। लेकिन, इस बार विपक्ष के जो तेवर दिख रहे हैं, उससे लगता है कि 26 जून को यह परंपरा टूट भी सकती है।
दरअसल, 18वीं लोकसभा में पहले सत्र की औपचारिक शुरुआत से भी पहले प्रोटेम स्पीकर के मुद्दे पर विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने जिस तरह के तेवर अपनाए हैं, उससे लगता है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में उसे आसानी से काम करने देने के मूड में नहीं है।

आम सहमति से स्पीकर चुनने के लिए विपक्ष ने रख दी बड़ी शर्त!
विपक्षी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार लोकसभा स्पीकर के पद पर भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति इस बात पर निर्भर करेगी कि डिप्टी स्पीकर पद इंडिया ब्लॉक को दिया जाए। विपक्ष सर्वसम्मति से स्पीकर की नियुक्ति की पूरी जिम्मेदारी सत्तापक्ष पर डाल रहा है।
प्रोटेम स्पीकर का पद नहीं मिलने पर भड़का है विपक्ष
ऐसे में अगर आखिरी वक्त तक कोई सर्वसम्मत राय नहीं बनी तो पहली बार स्पीकर पद के लिए चुनाव होने की संभावना पैदा हो सकती है। दरअसल, विपक्ष ने तबसे सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जबसे सात बार के भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्ति किया है।
प्रोटेम स्पीकर को लेकर सरकार-विपक्ष का तर्क
इंडिया ब्लॉक की अगुवा कांग्रेस का तर्क है कि इस पद के लिए पार्टी सांसद कोडिकुन्निल सुरेश का नाम होना चाहिए था, क्योंकि वे 8 बार के सांसद हैं। इसके जवाब में सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने तर्क दिया है कि उनकी संसद सदस्यता निर्बाध नहीं रही है और 1998 और 2004 में वह चुनाव हार चुके हैं। जबकि, कटक से इस बार बीजेपी के टिकट पर चुने गए भर्तृहरि महताब इससे पहले भी लगातार 6 बार बीजेडी का उसी सीट से प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
दलित कार्ड खेलने की कोशिश में कांग्रेस
कांग्रेस अब केरल के पार्टी सांसद के सुरेश के नाम पर दलित कार्ड खेलना चाहती है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिजिजू के जवाब में अपने एक्स पोस्ट पर सवाल किया, 'अगर इस दलील को मान लें, तो फिर भाजपा सांसद रमेश जिगाजिनागी, जो लगातार सातवीं बार सांसद बने हैं, उनपर विचार क्यों नहीं किया गया? क्या इस वजह से कि वे भी सुरेश की तरह दलित हैं?'
के सुरेश को नेता प्रतिपक्ष बनाए कांग्रेस- बीजेपी
कांग्रेस नेता की इस दलील पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पलटवार किया है। उन्होंने भी एक्स पर लिखा है, 'अगर आप के सुरेश के राजनीतिक करियर को लेकर इतने चिंतित हैं, तो मैं अनुरोध करता हूं कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बना दें और 2026 के केरल चुनावों में यूडीएफ का सीएम चेहरा बनाएं। एक अस्थाई पद के लिए इतना तनाव क्यों?'
अगर परंपरा टूटी तो के सुरेश हो सकते हैं स्पीकर पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार
माना जा रहा है कि अगर सत्ता पक्ष से स्पीकर पद के लिए विपक्ष की मांग के हिसाब से आम सहमति की जरा भी संभावना बनी तो दलित समुदाय से आने वाले 8 बार के कांग्रेस सांसद के सुरेश का नाम डिप्टी स्पीकर पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
लेकिन, अगर सरकार विपक्षी इंडिया ब्लॉक के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हुई तो इस गठबंधन के कुछ और नेताओं के साथ ही के सुरेश भी उसकी ओर से स्पीकर पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। इस संबंध में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदन के नेता रणनीति तैयार करने के लिए जल्द ही बैठक कर सकते हैं।
स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद के लिए संख्या बल सत्ता पक्ष के साथ
वैसे संख्या बल सरकार के साथ है और स्पीकर या डिप्टी स्पीकर पद पर वही बैठेगा, जिसे सत्तापक्ष चाहेगा। लेकिन, विपक्ष की रणनीति यही लगती है कि वह शुरू से ही सरकार को खुली छूट देने के लिए तैयार नहीं है।
वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में एनडीए की तब की सहयोगी एआईएडीएमके को डिप्टी सीएम का पद मिला था, लेकिन पिछले कार्यकाल में यह पद खाली ही रहा। इस बार अगर सत्तापक्ष ने डिप्टी स्पीकर पद पर किसी को नियुक्त करने का फैसला किया तो हो सकता है कि टीडीपी को मौका मिल जाए।












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