Lok Sabha Election: तेलंगाना में इस बार BJP बनाम कांग्रेस होना तय! कैसे हाशिए पर सिमटते चले गए KCR?
Telangana Lok Sabha Election 2024: तेलंगाना में एक दशक बाद ऐसे चुनाव की नौबत नजर आ रही है, जिसमें के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के मुकाबले सत्ताधारी कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुख्य टक्कर होने की संभावना बनी है। खासकर उनकी बेटी के कविता की भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी ने पार्टी की चुनौती और बढ़ा दी है।
निजामाबाद की एमएलसी के कविता को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसी दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार किया है, जिसमें उनके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल भी जेल पहुंच चुके हैं। तेलंगाना में 2019 के लोकसभा चुनाव में बीआरएस (तब टीआरएस) को 17 में से 9 सीटें मिली थीं। बीजेपी-4, कांग्रेस-3 सीटों पर जीती थी और हैदराबाद की सीट पर एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी की कब्जा कायम रहा था।

बीआरएस के नेताओं में मच गई है भगदड़
2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अबतक तेलंगाना में जितने प्रत्याशी उतारे हैं, उनमें से आधे से ज्यादा बीआरएस से ही आए हैं। इनमें से भी अधिकतर इसी महीने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। सत्ताधारी कांग्रेस भी बीआरएस नेताओं को पार्टी में शामिल करने में भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है और पार्टी के कई सांसद और विधायक इसके साथ जुड़ चुके हैं।
तेलंगाना में 13 मई को होने वाले चुनावों से पहले केसीआर की पार्टी को सबसे बड़ा झटका चेवेल्ला के सांसद रंजीत रेड्डी ने दिया है। कांग्रेस ने उन्हें उसी लोकसभा सीट से अपना टिकट थमा दिया है। इसी तरह हैदराबाद की खैरताबाद सीट के बीआरएस एमएलए दानम नागेंदर को भी कांग्रेस ने सिकंदराबाद में केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी के खिलाफ उतार दिया है।
तेलंगाना में अभी नहीं तो कभी नहीं वाले मिशन पर कांग्रेस
कांग्रेस प्रत्याशियों की ऐसी लिस्ट लंबी है, जो बीआरएस छोड़कर सत्ताधारी दल के नाव पर सवार हो चुके हैं। कांग्रेस तेलंगाना में इस बार कोई भी कमी नहीं रहने देना चाहती। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी भी 120 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी की मौजूदा 64 सीटों को और ऊपर पहुंचाकर सुरक्षित करना चाहते हैं।
कांग्रेस और बीजेपी में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की होड़
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी, खासकर सीएम रेड्डी ने इस बार तेलंगाना में 17 में से 14 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले साल दिसंबर में ही भाजपा के प्रदेश नेताओं और कार्यकर्ताओं को सिर्फ डबल डिजिट या 10 सीटों का ही टारेगट दिया था।
कांग्रेस दलबदलुओं के सहारे विशेष रूप से शहरी सीटों पर अपनी स्थिति दुरुस्त करना चाहती है, जहां पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव में उसे नाकामी मिली थी।
शहरी सीटों पर अपनी कमजोरी दुरुस्त करने में जुटी है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के अंदर के एक व्यक्ति ने ईटी को बताया है, 'विधानसभा चुनाव में पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन कई शहरी इलाकों में इसे नुकसान झेलना पड़ा था, खासकर हैदराबाद के आसपास। अब घोषणापत्र की ज्यादातर गारंटी शुरू की जा रही है और सरकार भी नई है, पार्टी को ग्रामीण इलाकों को लेकर अभी भी उम्मीद है, लेकिन शहरी तेलंगाना का चुनौती बना हुआ है। ऐसे कई लोकसभा क्षेत्र में बीआरएस के जिन नेताओं का मजबूत दबदबा है, उन्हें लाना हमारी सीटें बढ़ाने की रणनीति का ही हिस्सा है।'
लोकसभा चुनाव में बनेगा नया समीकरण?
इसी अखबार से हैदराबाद के रहने वाले एक व्यक्ति श्रीनिवास चंद्रशेखर ने जो कुछ कहा है, उससे राज्य में बन रहे मौजूदा समीकरण का काफी हद तक एक संकेत मिल सकता है।
उन्होंने बताया, 'राज्य में हमने सरकार बदलने के लिए वोट दिया था, क्योंकि हम उनसे (बीआरएस) थक चुके थे। अब, कांग्रेस आ चुकी है और हमें देखना है कि उनका प्रदर्शन कैसा रहता है। लेकिन, केंद्र में मोदी अच्छे हैं। वहां क्या परेशानी है....वे एक अच्छे पीएम हैं....।'












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