Lok Sabha Election 2024: क्या गुजरात में भी बीजेपी को लग सकता है झटका, दो सीटें क्यों बढ़ा रही हैं टेंशन?
Gujarat Lok Sabha Election 2024: गुजरात में बीजेपी पिछले दो लोकसभा चुनावों से अपनी ही रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। दोनों ही बार पार्टी 26 की 26 सीटें जीती है और वह भी वोट प्रतिशत में जबर्दस्त बढ़ोतरी के साथ। इस बार पार्टी ने लक्ष्य का और विस्तार किया है और प्रत्येक सीट पर 5 लाख वोट से ज्यादा जीत का मार्जिन रखना चाहती है। लेकिन, उत्तर गुजरात की 2 सीटें उसके मिशन में रोड़ा बन रही हैं।
गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य है। यहां की एक-एक सीट सिर्फ भारत में ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीति में भी भाजपा के लिए खास मायने रखते हैं। लेकिन, बनासकांठा और साबरकांठा के बदले समीकरण पार्टी के रणनीतिकारों को बेचैन कर रहे होंगे।

हर सीट पर 5 लाख से अधिक मार्जिन का लक्ष्य
वैसे सूरत में भाजपा के उम्मीदवार मुकेश दलाल की निर्विरोध जीत के बाद बीजेपी को अब 25 सीटों पर ही अपना टारगेट तय करना है। बीजेपी यूं तो गुजरात से पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़े होने की वजह से 5 लाख से अधिक जीत का अंतर रखने के लिए मैदान में उतरी है। लेकिन, कुछ कद्दावर नेताओं की सीटों पर जीत के मार्जिन का यह लक्ष्य 10 लाख तक बताया जा रहा है।
कुछ सीटों पर 10 लाख से ज्यादा अंतर रखने का टारगेट
गुजरात में बीजेपी जिन सीटों को 10 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है, उसमें अमित शाह, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और पुरुषोत्तम रुपाला के अलावा प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल की लोकसभा सीटें शामिल हैं।
बनासकांठा और साबरकांठा सीटों पर कड़ी टक्कर
वैसे तो भाजपा ने गुजरात में लगातार अपना ग्राफ शीर्ष पर पहुंचाने का क्रम जारी रखा है। लेकिन, इस बार उत्तर गुजरात की दो सीटें बनासकांठा और साबरकांठा सीटों पर कांग्रेस से बीजेपी को थोड़ी कड़ी चुनौती मिल रही है। बनासकांठा में कांग्रेस ने वाव सीट से अपनी फायर ब्रांड विधायक गेनीबेन ठाकोर को उतारा है।
यहां उनका मुकाबला बीजेपी की रेखाबेन चौधरी से है। 2017 में ठाकोर सीटिंग विधानसभा स्पीकर शंकर चौधरी को हराकर तहलका मचा चुकी हैं। कहते हैं कि गेनीबेन चुनाव लड़ने के लिए लोगों से पैसे जुटा रही हैं, जबकि बीजेपी उम्मीदवार बनास डेयरी के संस्थापक गुलाबभाई चौधरी की पोती हैं।
साबरकांठा में बीजेपी को बदलना पड़ा उम्मीदवार
इसी तरह से साबरकांठा में भी बीजेपी को संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की आपत्ति के बाद बीजपी को भीखाजी ठाकोर की उम्मीदवारी बदलनी पड़ी। भाजपा कार्यकर्ताओं को लग रहा था कि उनकी उम्मीदवारी से सीट पर जातीय समीकरण बिगड़ सकता है। क्योंकि, उनके नाम में सिर्फ ठाकोर लगा है, लेकिन वह उस जाति से हैं नहीं। जबकि, साबरकांठा में इस समाज की बड़ी आबादी है।
बीजेपी ने ठाकोर की जगह शोभनाबेन बरैया को टिकट दिया, लेकिन इसकी वजह से ठाकोर और इनके समर्थकों में कहासुनी शुरू हो गई। यही नहीं इस सीट से टिकट के दावेदार दिग्गजों को लग रहा है कि उनकी जगह पार्टी ने राजनीति में अनुभवहीन स्कूल टीचर को टिकट दे दिया है।
पिछले कुछ समय में रुपाला विवाद की वजह से क्षेत्र में क्षत्रीय समाज ने जिस तरह से अपना विरोध प्रदर्शन तेज किया है, उससे कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि इस विवाद से उसके प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री तुषार चौधरी को फायदा मिल सकता है।
बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अंदाजा है कि गुजरात की एक भी सीट पर कमजोर पड़ने का मतलब क्या है। इसलिए पार्टी की ओर से यहां किसी भी तरह से कोई चूक नहीं रहने देने की कोशिश जारी है।
केंद्रीय गृहमंत्री शाह पहले ही करीब 150 पदाधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों को बुलाकर कह चुके हैं कि इन दोनों सीटों पर भी बड़ी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा दें।












Click it and Unblock the Notifications