Lok Sabha Election: केरल के चर्च के बयान में BJP के लिए सुकून है! कोझिकोड के बिशप ने चुनावों पर क्या कहा?
Kerala Lok Sabha Election 2024: केरल में कोझिकोड के बिशप वर्गीस चक्कलक्कल ने लोकसभा चुनावों को लेकर कुछ बातें कही हैं, जिससे बीजेपी को थोड़ी राहत मिल सकती है। बीजेपी ने पिछले साल भर में केरल में ईसाई समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए काफी कोशिशें की हैं। लेकिन, चुनाव से ठीक पहले राज्य के एक प्रमुख बिशप ने जो कुछ कहा है, उससे पार्टी काफी सुकून महसूस कर सकती है।
बिशप चक्कलक्कल का कहना है कि चुनावों को लेकर कैथोलिक चर्चों का स्टैंड यही है कि समान दूरी बनाकर रखें और मुद्दे और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने रविवार को केरल में बीजेपी के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की अगुवाई में पहुंचे भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद ये बातें कही हैं। ये लोग ईस्टर की शुभकानाएं देने उनके पास पहुंचे थे।

अच्छे उम्मीदवारों को वोट दें मतदाता- बिशप
इस मुलाकात के बाद बिशप ने कहा कि चर्चा मतदाताओं को यही सलाह देगा कि अपनी अंतरात्मा के आधार पर ऐसे अच्छे उम्मीदवारों को वोट दें, जो देश की सेवा कर सकें और लोकतंत्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और देश की अखंडता की रक्षा कर सकें।
सीएए पर भी बीजेपी के लिए राहत का पैगाम
सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने सीएए पर विपक्ष के आरोपों को लेकर कहा है कि ये सारे सिर्फ आरोप हैं और लोगों को सच्चाई समझनी चाहिए। दरअसल, बीजेपी-विरोधी विपक्ष का आरोप है कि सीएए एक खास समुदाय को टारगेट करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर एक कानून किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है और अगर इसका लक्ष्य सबको पहचान देना है, तब यह कोई मुद्दा नहीं है
नहीं लगता कि अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं- बिशप वर्गीस चक्कलक्कल
जब उनसे सीधा यह पूछ लिया गया कि क्या केंद्र सरकार के दौरान अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं तो कोझिकोड के बिशप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह मोदी सरकार पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, सरकार ने कई क्षेत्रों में प्रगतिशील कदम उठाए हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में समस्याएं हैं।
इसके साथ ही वे बोले, 'पीएम या पार्टी अध्यक्ष को शायद इन मुद्दों के बारे में जानकारी न हो। सरकार को ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए।'
मणिपुर मुद्दे पर भी नहीं दिखा कोई हार्ड स्टैंड
मणिपुर के मसले पर उनका कहना है कि लोकतांत्रिक समाज में वहां जो कुछ भी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था और जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं तो सरकार को तत्काल दखल देकर उसे रोकना चाहिए। वैसे उनका कहना है कि उन घटनाओं को लेकर अलग-अलग राय है, 'कुछ कह रहे हैं कि यह धार्मिक नहीं, बल्कि जाति या जनजाति से संबंधित मुद्दा है। इसके पीछे की सच्चाई के बारे में हमारी पास पूरी जानकारी नहीं है।' हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा है कि लोगों को इसके बारे में जो पता है, उसका असर चुनावों में दिख सकता है।
'मतदान में चर्च को दखल देने की जरूरत नहीं'
बिशप वर्गीस चक्कलक्कल के मुताबिक केरल के वोटर राजनीतिक तौर पर बहुत ही जागरूक हैं और वह अच्छा और बुरा देख-समझकर फैसला कर सकते हैं। किसे मतदान करना है, उसमें चर्च को दखल देने की जरूरत नहीं है।
बिशप के बयान में बीजेपी के लिए सुकून का संदेश!
बीजेपी ने करीब एक साल से केरल में ईसाई समुदायों में पैठ बनाने की भरपूर कोशिश की है। उसने समय-समय पर स्नेह यात्राओं का आयोजन किया है। क्रिसमस से लेकर ईस्टर तक पर चर्च प्रमुखों तक शुभकामना संदेश के माध्यम से भी भाजपा ने काफी कोशिशें की हैं।
पार्टी ने पिछले कुछ समय में कई ईसाई नेताओं को भी भाजपा में शामिल कराया है और कुछ पार्टियों का विलय भी किया है। ऐसे में अब जो एक प्रमुख बिशप का बयान आया है, उसमें बीजेपी को सुकून का संदेश जरूर महसूस हो सकता है।












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