अखिलेश-मायावती की 2 घंटे की बैठक में सामने आईं अंदर की 3 अहम बातें

मायावती और अखिलेश यादव की 120 मिनट की मुलाकात में अंदर की 3 अहम बातें निकलकर सामने आईं।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) यूपी में सीटों के बंटवारे की डील लगभग फाइनल कर चुके हैं। शुक्रवार को अखिलेश यादव अचानक दिल्ली स्थित मायावती के बंगले पर पहुंचे और बसपा अध्यक्ष से मुलाकात की। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि दोनों पार्टियों ने फिलहाल यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 76 पर महागठबंधन (Mahagathbandhan) के तहत साथ मिलकर चुनाव लड़के का फैसला कर लिया है। बाकी बची 4 सीटों को लेकर खबर है कि इनमें से दो सीटें अमेठी और रायबरेली कांग्रेस (Congress) के लिए छोड़ी जा सकती हैं, जबकि दो सीटों पर फैसला होना अभी बाकी है। अखिलेश-मायावती (Akhilesh-Mayawati) के बीच करीब 2 घंटे की मुलाकात हुई और इस मुलाकात में तीन अहम बातें निकलकर सामने आईं।

सपा के हिस्से की सीटों में होगा बंटवारा

सपा के हिस्से की सीटों में होगा बंटवारा

सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव और मायावती के बीच 76 में से 37-37 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की सहमति बनी है। इस सहमति को लेकर हालांकि बसपा (BSP) या सपा (SP) में से किसी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में सीट बंटवारे का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। यहां एक अहम खबर यह भी है कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को मिली 37 सीटों में से ही अखिलेश यादव निषाद पार्टी और पीस पार्टी को भी सीटें देंगे। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में अखिलेश को इन दोनों पार्टियों का साथ मिला था। गोरखपुर में तो निषाद पार्टी प्रमुख के बेटे को ही सपा के टिकट पर लड़ाया गया था।

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    और घट सकती हैं सपा की सीटें!

    और घट सकती हैं सपा की सीटें!

    अखिलेश यादव और मायावती की बैठक से जुड़ी दूसरी खबर जो निकलकर सामने आ रही है, वो ये है कि बसपा सुप्रीमो अभी एक-दो सीटें और लेना चाहती हैं। सूत्रों की मानें तो मायावती यह भी चाहती हैं कि जाट नेता चौधरी अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल या किसी भी भावी साथी को समाजवादी पार्टी के कोटे से ही गठबंधन में शामिल किया जाए। अजीत सिंह अगर इस महागठबंधन में शामिल होते हैं तो उन्हें 2 से 3 सीटें दी जा सकती हैं। इसका मतलब है कि महागठबंधन में अगर मायावती का यह फॉर्मूला स्वीकार किया जाता है तो 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी बसपा से कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि अभी तक माना यही जा रहा था कि सपा-बसपा से अलग जो 2 सीटें बची हैं, उन्हें आरएलडी को दिया जा सकता है।

    कांग्रेस को क्यों नहीं लेना चाहते अखिलेश-मायावती

    कांग्रेस को क्यों नहीं लेना चाहते अखिलेश-मायावती

    शुक्रवार को दिल्ली में जब मायावती और अखिलेश यादव की मुलाकात हुई तो बातचीत में कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया। दोनों पार्टियों के नेताओं ने केवल आपस में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेताओं की तरफ से यूपी के महागठबंधन में एक दर्जन से ज्यादा सीटों की मांग की जा रही है, जिसपर अखिलेश और मायावती में से कोई भी तैयार नहीं है। मायावती और अखिलेश यादव चाहते हैं कि महागठबंधन में केवल दो सीटें- अमेठी और रायबरेली, जो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र हैं, को ही कांग्रेस के लिए छोड़ा जाए। ऐसी स्थिति में कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस इस महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। बसपा नेताओं का कहना है कि मायावती जल्द ही लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगी और महागठबंधन को लेकर आधिकारिक तौर पर फैसले का ऐलान करेंगी।

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