• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

लोकसभा चुनाव 2019: 'सरकारी बैंकों से लिए किसानों के क़र्ज़ तो माफ़ हुए ही नहीं'

By सलमान रावी
छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

किसानों के क़र्ज़ की माफ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने के वायदे ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार को सत्ता की कमान सौंप दी.

राज्य बनने के बाद ये पहला मौक़ा था जब किसी भी पार्टी को इतनी सीटें मिलीं थीं.

भूपेश बघेल ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही उस अध्यादेश पर दस्तख़त कर दिए जिसके तहत क़र्ज़ माफ़ी की योजना लागू कर दी गई.

कई किसानों को उनके क़र्ज़ की रक़म वापस मिल गई.

जिन्हें इस घोषणा का लाभ मिला उनमें वो किसान भी थे जिन्होंने पांच हज़ार रुपये लिए थे और वो भी थे जिन्होंने पांच लाख लिए थे.

विधानसभा के चुनावों के फ़ौरन बाद किसान अपनी धान की फ़सल लेकर धान ख़रीदी केंद्र पहुँचने लगे.

छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

बैंकों से नोटिस

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बढ़ा हुआ मिला और गाँव में ख़ुशी की लहर फैल गई.

मगर इस घोषणा का लाभ सिर्फ़ उन किसानों को मिला जिन्होंने राज्य के सहकारिता बैंक या फिर ग्रामीण बैंकों से क़र्ज़ लिया था.

जिन किसानों ने सरकारी (राष्ट्रीयकृत) बैंकों से ऋण लिया था उन्हें अब बैंकों से नोटिस मिलने लगे हैं.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक विधानसभा चुनावों से पहले तक भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे.

छत्तीसगढ़ के किसान क्यों चाहते हैं पाक से अच्छे रिश्ते

कमलनाथ के बाद बघेल ने माफ़ किया किसानों का क़र्ज़

राहुल का न्यूनतम आमदनी का वादा कितना संभव?

छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

कोई सुनवाई नहीं

बीबीसी से बातचीत में धरमलाल कौशिक ने कांग्रेस की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी बैंकों से क़र्ज़ लेने वाले किसानों की तो कोई सुनवाई ही नहीं है.

वो कहते हैं, "कांग्रेस ने घोषणा की थी कि सभी किसानों का क़र्ज़ माफ़ होगा."

"उसने ये नहीं कहा था कि सिर्फ़ सहकारिता बैंक या ग्रामीण बैंकों से लोन लेने वालों को भी रहत मिलेगी."

"ये वादा तो झूठा निकला जिसके सहारे कांग्रेस चुनाव जीतने में कामयाब रही."

धरमलाल कौशिक के अनुसार, किसानों का बड़ा तबक़ा ऐसा है जो ख़ुद को छला हुआ महसूस कर रहा है.

अब राजस्थान में भी किसानों का क़र्ज़ माफ़

'न्यूनतम आय गारंटी’ पर राहुल गांधी का ये दावा कितना सच?

किसानों की आत्महत्या पर पर्दा डालने का प्रयास?

छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

नई सरकार के आने के बाद

विपक्ष के आरोपों की पड़ताल करते हुए हम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 30 किलोमीटर दूर अभनपुर के इलाक़े में मौजूद केंद्री धान ख़रीदी केंद्र पहुंचे.

इस केंद्र की स्थापना वर्ष 1933 में हुई थी. आज आस-पास के किसान यहाँ जमा हैं.

बातचीत के क्रम में इस केंद्र में मौजूद ज़्यादातर किसान ऐसे मिले जिन्होंने ज़िला सहकारिता बैंक से क़र्ज़ लिया था और उनका क़र्ज़ भी माफ़ हो गया.

नई सरकार के कमान संभालते ही सभी के खातों में पैसे स्थानांतरित हो गए और सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ भी उन्हें मिला.

कांग्रेस अपने इसी फ़ैसले को लोक सभा के चुनावों में ज़ोर शोर से प्रचारित कर रही है.

नई राजधानी के लिए ज़मीन देनेवाला किसान बेहाल

हज़ारों किसानों के दिल्ली कूच से पहले की आंखों देखी

राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ में भाजपा या कांग्रेस?

छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

बीजेपी के राज में...

वो किसानों की क़र्ज़ माफ़ी और न्युनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का दोबारा चुनावी फ़ायदा उठाना चाहती है.

नेतराम साहू, अभनपुर के केंद्री की सहकारिता समिति के अध्यक्ष हैं. वो मानते हैं कि क़र्ज़ माफ़ी से किसानों को फायदा हुआ है.

मगर वो कांग्रेस को एक और वायदे की याद दिलाते हैं. उनका कहना है कि कांग्रेस ने वायदा किया था कि किसानों को मिलने वाले बोनस की रक़म को भी बढ़ाया जाएगा.

"बोनस बढ़ा. मगर कांग्रेस ने वायदा किया था कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में दो साल का बक़ाया बोनस भी उन्हें दिया जाएगा जो अभी तक नहीं मिला."

'धान बोने वालों को नहीं मिलेगा बिजली-पानी'

छत्तीसगढ़: कहाँ से पैसा लाएगी सरकार?

किसानों का 'गाँव बंद' आंदोलन कितना असरदार

छत्तीसगढ़
BBC
छत्तीसगढ़

वायदे की याद

जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रभात मिश्र के अनुसार किसी किसान को चेक नहीं दिया गया है बल्कि क़र्ज़ माफ़ी की रक़म किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर कर दी गई है.

वो इस प्रक्रिया को समझाते हुए कहते हैं कि जब किसान अपना धान बेचने आते हैं तो उनके द्वारा ली गई क़र्ज़ की रक़म अपने आप उनके खाते से कट जाती है. धान के पैसे भी सीधे खातों में ही जमा होते हैं.

केंद्री के इलाक़े में मौजूद इन्हीं किसानों में से एक लेखु साहू सरकार को उस वायदे की याद दिलाते हैं जब उनसे कहा गया था कि बिजली का बिल आधा हो जाएगा.

वो कहते हैं कि सरकार के वायदे के अनुसार बिल अप्रैल की पहली तारीख़ से ही आधा हो जाना चाहिए था. "मगर इस बार तो पहले से भी ज़्यादा बढ़ा हुआ बिल मिला है."

छत्तीसगढ़: गंगाजल लेकर क्यों खाई जा रही हैं कसमें

फ़सल बीमा के बाद 'मिले 5 रुपए और 25 रुपए'

किसानों के लिए मुसीबत बनते पुराने नोट

मुख्यमंत्री की सफ़ाई

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि वो राष्ट्रीयकृत बैंकों से भी बात कर रहे हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने सभी सरकारी बैंकों से कहा है कि वो किसानों को नोटिस ना भेजे जब तक सरकार उनके क़र्ज़ माफ़ी की रूप रेखा तैयार नहीं कर लेती.

बघेल कहते हैं, "राष्ट्रीयकृत बैंकों से बातचीत चल रही है और हमारे अधिकारी मसौदा तैयार कर रहे हैं. उन किसानों के भी लोन माफ़ होंगे जिन्होंने वहां से क़र्ज़ लिया है."

"बिजली के बिल भी आधे हो रहे हैं. हमने अप्रैल का वादा किया था और अप्रैल अभी शुरू ही हुआ है. अब जो बिल आयेंगे वो आधे होंगे."

दिल्ली में किसानों की पलटनिया, हिले ले झकझोर दुनिया

राजस्थान, मध्य प्रदेश में जीत से क्या हासिल कर सकती है कांग्रेस

बांग्लादेशी शरणार्थी और आदिवासियों में तनाव

नया वित्तीय वर्ष

विपक्ष का मानना है कि जोश में कांग्रेस ने वायदे तो कर दिए, मगर उन्होंने सरकारी ख़ज़ाने की तरफ़ देखा भी नहीं कि ऐसा करना संभव है या नहीं और सरकार को इससे कितना वित्तीय घाटा सहना पड़ सकता है.

धरमलाल कौशिक का आरोप है कि ये पहला मौक़ा है जब सरकार ने आते ही ख़ज़ाना ख़ाली कर दिया हो.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि अब सरकार के पास कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं हैं. विभागों के आवंटन ट्रेज़री से वापस लौटा दिए जा रहे हैं.

मगर भूपेश बघेल इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि मार्च का महीना वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होता है.

नया वित्तीय वर्ष अप्रैल से ही शुरू होता है. इस लिए ट्रेज़री से भुगतान नहीं हो रहा था. अब हालात सामान्य होते जा रहे हैं.

वो कहते हैं, "अभी तो हमारी सरकार के सिर्फ़ 60 दिन हुए हैं. केंद्र की सरकार के तो 60 महीने हुए हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 15 सालों तक छत्तीसगढ़ में शासन किया. हमने जब सत्ता की बागडोर संभाली तो सरकारी ख़ज़ाना ख़ाली मिला. अब हम राज्य की अर्थ व्यवस्था को पटरी पर ला रहे हैं."

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Lok Sabha Elections 2019 Farmers loans for government banks are not forgiven
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X