इन 9 सीटों पर कांग्रेस की सूची ने बढ़ाई सपा-बसपा की धड़कन, बिगड़ सकता है खेल
यूपी की ऐसी 9 सीटें हैं, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार सपा-बसपा के महागठबंधन का खेल बिगाड़ सकते हैं।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस यूपी में भले ही अकेले मैदान में उतरी हुई है, लेकिन पार्टी एक मामले में बाकी दलों से आगे चल रही है। दरअसल यूपी के लिए कांग्रेस अभी तक 27 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर चुकी है। कांग्रेस के बाद यूपी में केवल समाजवादी पार्टी ही है, जिसने अभी तक 11 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। भाजपा, बसपा और आरएलडी की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी भी सीट से उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि कांग्रेस ने दो चरण में 27 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसमें 9 सीटें ऐसी भी हैं, जहां सपा और बसपा के महागठबंधन का खेल बिगड़ सकता है।

कौन सी हैं वो 9 सीटें
कांग्रेस ने बुधवार को यूपी के लिए अपनी दूसरी सूची जारी की। इस सूची और पहले की सूची को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि इन 27 नामों में कांग्रेस ने 9 सीटों पर सपा-बसपा के महागठबंधन का राह मुश्किल कर दी है। इनमें सबसे पहला नाम है बदायूं लोकसभा सीट का, जहां से महागठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर सपा सांसद और मुलायम सिंह यादव के परिवार के सदस्य धर्मेंद्र यादव चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने बदायूं से पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी को टिकट दिया है। पहले खबर थी कि कांग्रेस उन सीटों को छोड़ सकती है, जहां से मुलायम सिंह यादव के परिवार के लोग चुनाव लड़ रहे हैं। धर्मेंद्र यादव हालांकि 2009 से इस सीट से सांसद हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद 166347 वोटों के भारी अंतर से जीते थे। बावजूद इसके सलीम इकबाल शेरवानी के उतरने से उनकी राह कुछ मुश्किल हो सकती है। सलीम इकबाल शेरवानी कांग्रेस में शामिल होने से पहले समाजवादी पार्टी में थे और बदायूं सीट से ही सपा के टिकट पर चार बार सांसद रह चुके हैं।

बसपा की पूर्व सांसद को टिकट
कांग्रेस की सूची में ऐसी ही दूसरी लोकसभा सीट है सीतापुर, जहां से पार्टी ने बसपा की पूर्व सांसद कैसर जहां को चुनाव मैदान में उतारा है। महागठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में गई है। कैसर जहां सीतापुर सीट से 2009 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बनीं थी। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी राजेश वर्मा के हाथों महज 51027 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों ही बसपा से निष्कासित होने के बाद कैसर जहां ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। ऐसे में कैसर जहां की मौजूदगी इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय बना सकती है।

मुरादाबाद सीट से राज बब्बर को टिकट
इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी की मुरादाबाद लोकसभा सीट से पार्टी के दिग्गज नेता और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को चुनाव मैदान में उतारा है। मुरादाबाद सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार कुंवर सर्वेश कुमार सिंह 87504 वोटों से जीते थे। कुंवर सर्वेश कुमार सिंह को 485224 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा प्रत्याशी डॉ. एसटी हसन को 397720 और तीसरे नंबर पर रहे हाजी मोहम्मद याकूब को 160945 वोट मिले। महागठबंधन में यह सीट सपा के खाते में गई है। वोटों के गणित को लेकर पहले अनुमान लगाए जा रहे थे कि सपा यहां बेहद मजबूत स्थिति में है, लेकिन राज बब्बर की उम्मीदवार सपा की जीत की संभावन को धुंधली कर सकती है।

कांग्रेस के छोड़ी गईं केवल 2 सीटें
इनके अलावा यूपी की सहारनपुर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फतेहपुर, बहराइच और कुशीनगर में भी कांग्रेस के प्रत्याशी महागठबंधन के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। यूपी की बाकी बची हुई सीटों पर भी अगले कुछ ही दिनों में कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। आपको बता दें कि महागठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि अमेठी और रायबरेली दो सीटों पर महागठबंधन ने प्रत्याशी ना उतारने का फैसला लिया है। महागठबंधन के तहत सपा को 37, बसपा को 38 और आरएलडी को 3 सीटें दी गई हैं।












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