क्या 2022 का यूपी चुनाव मायावती के साथ मिलकर लड़ेंगे अखिलेश, आजम ने दिया जवाब

बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ गठबंधन जारी रखने को लेकर समाजवादी पार्टी की तरफ से आया पहला बयान...

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में मंथन का दौर जारी है। दरअसल दोनों दलों के यूपी में साथ आने के बाद सियासी जानकारों का मानना था कि महागठबंधन अच्छी खासी सीटों पर जीत हासिल करेगा, लेकिन चुनाव नतीजों ने इन सारी भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया। इस चुनाव में जहां बसपा को 10 और सपा को महज 5 सीटें ही मिलीं, वहीं महागठबंधन में शामिल तीसरे दल आरएलडी का खाता भी नहीं खुला। लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद महागठबंधन के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और यूपी की रामपुर लोकसभा सीट से जीते सांसद आजम खान ने बड़ा बयान दिया है।

'मैं समझ नहीं पा रहा कि हम क्यों हारे'

'मैं समझ नहीं पा रहा कि हम क्यों हारे'

ईटी को दिए गए एक खास इंटरव्यू में आजम खान ने महागठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'सपा और बसपा का गठबंधन 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा और समाजवादी पार्टी यूपी के चुनाव में फिर से जोरदार वापसी करेगी। इस लोकसभा चुनाव में हम क्यों हारे, मैं ये बात समझ ही नहीं पा रहा हूं कि आखिर हुआ क्या? कुछ बात समझ में नहीं आती, क्या हुआ, कुछ अक्ल काम नहीं कर रही है। क्या वोटरों के मन में एकदम से इतना बड़ा बदलाव आया कि उन्होंने सबकुछ बदल दिया, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ। जबकि यूपी में ना तो भाजपा के पक्ष में कोई माहौल था ना ही कोई बड़ी लहर थी। हम तो बस इस परिणाम से हैरान हैं।'

'साथ बैठकर चर्चा करें दोनों पार्टियों के नेता'

'साथ बैठकर चर्चा करें दोनों पार्टियों के नेता'

आजम खान से जब पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी को बीएसपी का वोट ट्रांसफर नहीं हुआ तो उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि जब तक दोनों पार्टियों के जिम्मेदार लोग साथ बैठकर इसपर गहराई से चर्चा नहीं करते, तब तक हम इस बारे में कुछ नहीं कह पाएंगे। किसी चुनाव में जाति का कोई संयोजन नहीं होता, बल्कि वोटों का संयोजन होता है। इस चुनाव में ऐसी कई सीटें हैं, जहां हम महज 15-20 हजार वोटों के अंतर से हारे। हमने कुछ ऐसी सीटें भी खो दीं, जो परंपरागत रूप से हमें जीतनी चाहिए थीं। हम प्रदेश की एक बड़ी पार्टी हैं और इस चुनाव में हमें झटका लगा है। लेकिन आप देखिए कि पहले हमारे पास पांच सीटें थीं और आज भी हमारे पास 5 सीटें हैं। महागठबंधन में बीएसपी को 10 सीटों पर जीत मिली हैं।'

'मायावती-अखिलेश ने एक दूसरे की मदद की'

'मायावती-अखिलेश ने एक दूसरे की मदद की'

आजम ने आगे कहा, 'सपा और बसपा के बीच एक गठबंधन है, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कायम रहेगा। ऐसा कोई कारण नहीं है, जिससे इस गठबंधन पर कोई आंच आए। अखिलेश यादव और मायावती के बीच भी किसी तरह का कोई मतभेद नहीं था, दोनों ने चुनाव में काफी मेहनत भी की। यहां तक कि सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों में किसी तरह का कोई विवाद नहीं था। दोनों नेताओं ने पूरे चुनाव के दौरान एक दूसरे की बराबर मदद की। ईमानदारी से कहूं तो मुझे शुरुआत में यह उम्मीद भी नहीं थी कि गठबंधन इतने अच्छे संबंधों के साथ चलेगा। मायावती और अखिलेश यादव ने इस गठबंधन को चलाने के लिए ईमानदारी से पूरी कोशिश की है। मैंने अखिलेश यादव से कहा है कि इन कठिन परिस्थितियों में मैं पूरी तरह से उनके साथ हूं। हम फिर से लड़ेंगे। रहना होगा तबीयत को कलप संग रोज, बहलते बहलते बहल जाएगी।'

'रामपुर में दो सरकारें मेरे खिलाफ थीं'

'रामपुर में दो सरकारें मेरे खिलाफ थीं'

रामपुर लोकसभा सीट पर उनके विवादित बयानों को लेकर जब सवाल पूछा गया तो आजम खान ने कहा, 'रामपुर में दो सरकारें मेरे खिलाफ थीं। पूरा मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री, ठाकुर साब (अमर सिंह) और जिला प्रशासन, ये सब मेरे विरोध में थे। ऐसे हालात में भी, मेरे जैसा कमजोर और गरीब व्यक्ति कैसे चुनाव लड़ा और जीतने में कामयाब रहा, केवल मैं ही जानता हूं। अगर इस चुनाव में मैं हार जाता, तो यह सरकार मेरी नींव को खत्म कर देती।' आपको बता दें कि रामपुर लोकसभा सीट पर आजम खान का मुकाबल फिल्म अभिनेत्री और पूर्व सांसद जया प्रदा से था। आजम खान ने इस सीट पर जया प्रदा को 109997 वोटों के अंतर से हराया है। आजम खान को 559177 और जया प्रदा को 449180 वोट मिले। चुनाव प्रचार के दौरान जया प्रदा को लेकर दिए गए एक विवादित बयान पर आजम खान मुश्किलों में भी घिरे थे और चुनाव आयोग ने उनके प्रचार करने पर 72 घंटे का बैन भी लगाया था।

किन-किन लोकसबा सीटों पर जीती सपा-बसपा

किन-किन लोकसबा सीटों पर जीती सपा-बसपा

आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने यूपी की सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, जौनपुर, अंबेडकर नगर, लालगंज, श्रावस्ती, गोसी और गाजीपुर सीट पर जीत दर्ज की। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। वहीं, समाजवादी पार्टी के खाते में इस चुनाव में केवल पांच सीटें आजमगढ़, मैनपुरी, मुरादाबाद, सम्भल और रामपुर गईं। 2014 में भी सपा 5 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। इस बार मुलायम सिंह यादव के तीन सदस्यों डिंपल यादव को कन्नौज, अक्षय यादव को फिरोजबादा और धर्मेंद्र यादव को बदायूं में हार का सामना करना पड़ा। आरएलडी 2014 में अपना खाता नहीं खोल पाई थी और इस बार भी पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई। आरएलडी मुजफ्फरनगर, बागपत और मथुरा सीट पर चुनाव लड़ी थी।

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