बसपा की 'सुस्ती' का राज क्या है, कहीं मायावती INDIA के गेम प्लान का हिस्सा तो नहीं? चौंकाने वाली रिपोर्ट
Lok Sabha Election News: लोकसभा चुनावों के लेकर यूं तो पूरे देश में सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं, लेकिन 80 सीटों की वजह से यूपी की बात ही कुछ और है। यहां बीजेपी और सपा ने ज्यादातर सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं।
लेकिन, कई बार यूपी की सत्ता संभाल चुकी बहुजन समाज पार्टी की चुनावी 'सुस्ती' तरह-तरह के सवालों को जन्म दे रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने औपचारिक तौर पर यही एलान कर रखा है कि वह राज्य में किसी के साथ भी गठबंधन नहीं करेंगी। लेकिन, उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में भी पीछे हैं।

उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में संदेहास्पद देरी!
जिस तरह से 80 सीटों वाले यूपी में उनकी पार्टी ने अभी तक सिर्फ अमरोहा सीट से प्रत्याशी का नाम जाहिर किया है, यह किसी गंभीर राजनीतिक दल की चुनावी मंशा को संदेहास्पद बनाता है!
हाल तक ऐसी अटकलें थीं कि कांग्रेस पार्टी यूपी में बसपा से गठबंधन के लिए बहुत हाथ-पैर मार रही है। लेकिन, समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रति बसपा सुप्रीमो की तल्खी से बात बन नहीं पायी थी।
बसपा सांसद ने की मायावती को पीएम उम्मीदवार बनाने की मांग
इन सबके बीच मायावती के करीबी माने जाने वाले बिजनौर से बीएसपी सांसद मलूक नागर ने एक ऐसा बयान दे दिया, जिससे उनकी पार्टी के मंसूबों को लेकर काफी चौंकाने वाली बात सामने आ गई।
नागर ने हाल ही में गुड न्यूज टुडे के एक कार्यक्रम के माध्यम से इंडिया ब्लॉक के सामने एक चौंकाने वाला प्रस्ताव रख दिया। उनसे जब इस बात का जिक्र किया गया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने दलित चेहरे के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना चेहरा बनाया है, तो वे बीएसपी की इच्छा का खुलासा करने से खुद को रोक नहीं पाए।
मायावती निश्चित तौर पर सकारात्मक रूप से सोचेंगी-बीएसपी एमपी
वे बोले, 'हमारे चार विधायक ले जाने के लिए मायावती जी से कांग्रेस निश्चित रूप से माफी मांगे और उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करे, तभी 2024 में इंडिया गठबंधन बीजेपी को रोक सकता है।'
उनके मुताबिक, 'अगर कांग्रेस पीएम पद पर कोई दलित चेहरा चाहती है तो मायावती से बेहतर कोई नहीं हो सकता।' उनका कहना था कि 'अगर कांग्रेस हमारी शर्तें मानती है तो मायावती जी निश्चित तौर पर सकारात्मक रूप से सोचेंगी।'
बसपा सांसद के बयान के पीछे मायावती का इशारा!
बहुजन समाज पार्टी में यह कल्चर नहीं है कि पार्टी सुप्रीमो की इजाजत के बिना कोई सार्वजनिक रूप से इतना बड़ा बयान दे। इसलिए, यह तय माना जा रहा है कि बीएसपी सांसद ने जो कुछ कहा उसमें पार्टी प्रमुख की भी निश्चित रूप से हामी रही होगी।
इसी वजह से बसपा के उम्मीदवारों की लिस्ट में हो रही है देरी?
ऐसे में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक के सियासी गलियारे में यह चर्चा शुरू हो गई कि कहीं इसी उम्मीद में तो बसपा उम्मीदवारों की घोषणा नहीं कर रही है?
गठबंधन में चुनाव लड़ने से बसपा को होता रहा है फायदा
क्योंकि, बसपा को अपना इतिहास पता है। गठबंधन होने पर उसे ही ज्यादा फायदा होता रहा है और बिना गठबंधन के उसकी हालत बिना पानी के मछली की तरह दिखाई पड़ती है। अगर पिछले चार चुनावों को देखें तो उसने सिर्फ 2019 में गठबंधन किया और उसके 10 सांसद जीत गए। जबकि, सपा को कोई फायदा नहीं हुआ।
लेकिन, 2014, 2017 (विधानसभा चुनाव) और 2022 (विधानसभा चुनाव) में बिना गठबंधन के बीएसपी को भारी खामियाजा भुगतना पड़ा।
प्रियंका ने मायावती से की बात!
अब एक नई चर्चा ये शुरू हुई है कि कांग्रेस आला कमान ने मायावती को इंडिया अलायंस में लाने की नए सिरे से कोशिशें शुरू की हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनिया गांधी की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने मायावती को फोन किया है और इंडिया ब्लॉक में शामिल होने के लिए बड़ा ऑफर दिया है।
इंडिया ब्लॉक मायावती को दे सकता है पीएम उम्मीदवार बनने का ऑफर?
चर्चा है कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि बसपा इंडिया ब्लॉक में आए और गठबंधन मायावती को अपना प्रधानमंत्री का चेहरा बनाए। यहां बता देना आवश्यक है कि कुछ समय पहले जब मायावती ने अखिलेश यादव पर बिना नाम लिए गिरगिट वाला हमला किया था, तो भी सपा सुप्रीमो ने कहा था कि वे तो उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं।
मायावती इंडिया ब्लॉक के लिए क्यों हैं जरूरी?
तथ्य ये है कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी को 403 सीटों पर लड़ने पर भी भले ही 1 सीट मिली थी, लेकिन उसका वोट शेयर तब भी 12.88% रहा था।
मतलब, इतना तो तय है कि भले ही मायावती का जनाधार खिसका है, लेकिन वह अभी भी इतना है कि किसी की हार को जीत में और जीत को हार में बदलने का दम रखती हैं।
मायावती के लिए इससे अच्छा नहीं हो सकता कोई ऑफर
जाहिर है कि अगर इंडिया ब्लॉक मायावती को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने के लिए राजी हो जाता है तो उन्हें शायद ही इसे स्वीकार करने में कोई परेशानी होगी।
पिछली बार भी उन्होंने चुनाव के करीब आने के बाद ही अपना इरादा बदला था और सपा की 'साइकिल' पर 'हाथी' को बिठा दिया था।
अलबत्ता, मायावती से ज्यादा बड़ा सवाल इंडिया ब्लॉक के लिए है कि क्या वाकई कांग्रेस नेतृत्व गांधी परिवार के अलावा किसी और व्यक्ति को पीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश करने के लिए तैयार होगा?
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