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Lok Sabha Election: बीजेपी की इस रणनीति से कैसे बचेंगी SP-RJD? यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी

Lok Sabha Election 2024 News: मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का भाजपा का इरादा अब पूरी तरह से साफ होने लगा है। हालांकि, जब दिसंबर में एमपी विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने यह चौंकाने वाला फैसला लिया था, तभी संकेत स्पष्ट थे। लेकिन, अब उनके दम पर बीजेपी ने अपने मिशन को अंजाम देने की शुरुआत कर दी है।

रविवार को एमपी के मुख्यमंत्री यादव महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए लखनऊ पहुंचे थे। जनवरी में वह पटना में भी एक इसी तरह के कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं। दोनों ही कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी की रणनीति में फिट बैठती है।

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यूपी-बिहार के यादव वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
लखनऊ में यादव महाकुंभ का आयोजन मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मामले में एक याचिकाकर्ता मनीष यादव ने किया था। इस कार्यक्रम में सीएम यादव ने लोगों से कहा कि उन्हें इस बात के लिए गौरवांवित होना चाहिए कि वे 'यदुवंशी' हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव का यह दूसरा यूपी दौरा है और वे इससे पहले आजमगढ़ पहुंचे थे।

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मोहन यादव के निशाने पर सपा का 'एक परिवार'
महाकुंभ में मोहन यादव ने कहा कि यदुवंशियों के पूरे समाज को समृद्ध होने का अधिकार था, न कि सिर्फ 'एक परिवार' का। इस तरह से उन्होंने बिना नाम लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर निशाना साधने की कोशिश की। वे बोले कि 'हमें इस बात का गर्व है कि हम श्री कृष्ण के वंश से आते हैं।'

भाजपा तैयार कर रही है यादव वोट बैंक के लिए आधार
बता दें कि कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भाजपा समाजवादी पार्टी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ती आई है। इस दौरान मध्य प्रदेश के सीएम बोले कि उन्होंने 'राज्य में (भगवान) कृष्ण से जुड़े तीर्थ क्षेत्र' के विकास का काम शुरू करवाया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपने रिश्ते पर भी बात की। जैसे उनका ससुराल प्रदेश में है और उनके पूर्वज दशकों पहले आजमगढ़ से ही मध्य प्रदेश गए थे।

मोहन यादव के मुताबिक, वह यूपी आते रहेंगे, 'उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं कि इससे किसी को अगर कोई दिक्कत होती है।' इशारा साफ है कि उनका निशाना प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता को लेकर है।

बीजेपी की रणनीति पर सपा-कांग्रेस की भी नजर
इससे पहले मनीष यादव ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि सपा के शासनकाल में यादव समाज के कुछ ही लोगों के क्षेत्रों को फायदा पहुंचा था। मोहन यादव के दौरे को लेकर सपा प्रमुख और उनके सहयोगियों के भी कान खड़े हो चुके हैं। हालांकि वह दावा यह कर रहे हैं कि वे अपने मिशन में सफल नहीं होंगे।

अखिलेश यादव ने कहा, 'यह पुराने तरीके हैं, जो सफल नहीं होते।' कांग्रेस पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव अनिल यादव ने यादव महाकुंभ को 'मात्र चुनावी ड्रामा' बताया दिया। उन्होंने कहा कि समाज के लोग 'नफरत का जहर' फैलाने वालों के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने आरोप लगाते हुए सवाल किया कि 'तब ऐसे यादव कहां थे' जब यूपी में समाज के लोगों को अपराध का शिकार बनाया जा रहा था।

2019 में बिहार में बीजेपी को थोड़ा मिल चुका है फायदा
भाजपा सूत्रों की मानें तो बिहार में पार्टी अपने यादव चेहरों की पहले ही पहचान कर चुकी है, जो प्रदेश में यादव समाज के बीच जाकर उन्हें 'एक परिवार' की छत्र छाया से बाहर निकलने का आह्वान करेंगे। राजनीति के जानकारों की मानें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कई संसदीय क्षेत्रों में इस रणनीति में सफल भी हुई थी और बड़ी तादाद में यादवों के वोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर उसे हासिल भी हुए थे।

यूपी में समाजवादी पार्टी कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि वे कृष्ण के नाम पर यादव मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की बीजेपी की कोशिशों पर नजर रख रहे हैं।

सपा-कांग्रेस को भी सताने लगी है चिंता!
इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम ने विपक्ष के एक नेता के हवाले से बताया है, 'हालांकि, सब जानते हैं कि ये चुनावी हथकंडे हैं और 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के नेता समाज के लोगों को 'गुंडा' कह रहे थे। लेकिन, हमें डर रहे हैं कि वे पहले की तरह फिर से ध्रुवीकरण की कोशिश करेंगे। हम समाज के लोगों को उनके हथकंडों के बारे में बताएंगे और कहेंगे कि इस चक्कर में ना पड़ें।'

सपा-राजद का जनाधार खिसका तो भाजपा को होगा बड़ा फायदा
यादव समाज यूपी में समाजवादी पार्टी और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल का बहुत बड़ा वोट बैंक माना जाता रहा है। लेकिन, मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने इन दोनों ही पारिवारिक दलों की राजनीति में सेंध लगाने की रणनीति तैयार की है।

जानकारों की राय में 2014 और 2019 दोनों ही चुनावों में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे की वजह से बीजेपी को यादवों के कुछ वोट प्राप्त करने में मदद मिल चुकी है। लेकिन, अब पार्टी यूपी और बिहार के दोनों 'यादव' परिवारों के जनाधार से उम्मीद लगा बैठी है।

जानकारों का मानना है कि अगर मोहन यादव की वजह से बीजेपी आने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों राज्यों के यादव वोट बैंक एक छोटा सा हिस्सा भी तोड़ पाई, तो पार्टी को इससे बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है। क्योंकि, भाजपा पहले ही अपना जनाधार का काफी विस्तार कर चुकी है।

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