Lok Sabha Election: बीजेपी के नए चेहरों ने इन 10 सीटों पर बदल दिया चुनावी सीन, यहां दिलचस्प होगा मुकाबला
Lok Sabha Election Exceptional Candidates of BJP: भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपनी दो लिस्ट जारी किए हैं। पहली लिस्ट में 195 नाम थे और दूसरी में 72 प्रत्याशियों का नाम जारी किया गया है। बीजेपी के इन 267 उम्मीदवारों में 10 नाम बहुत ही असाधारण माने जा सकते हैं, क्योंकि वे सभी विशेष प्रतिभाओं के धनी हैं।
इन सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्र में खास और अनोखा योगदान देकर समाज की सहायता की है। अगर हम इन सभी उम्मीदवारों के कार्यों को देखें तो यह बात समझ में आएगी कि इन्हें हम असाधारण क्यों कह रहे हैं।

1) डॉ सीएन मंजूनाथ
डॉ सीएन मंजूनाथ को बीजेपी ने कर्नाटक में बेंगलुरु ग्रामीण लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। डॉ मंजूनाथ प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट हैं और भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में इनका योगदान अनोखा रहा है।

डॉ मंजूनाथ वही शख्सियत हैं, जिन्होंने एक सरकारी अस्पताल को इतना बदल दिया कि उसने निजी अस्पतालों को भी पीछे छोड़ दिया। लेकिन, उन्होंने यह तय किया कि श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैसक्युलर साइंसेज एंड रिसर्च से पैसों की वजह से कोई मरीज न लौट जाए।
कई अवार्ड से सम्मानित भाजपा के ये उम्मीदवार कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में कई इनोवेटिव टेक्निक के इस्तेमाल के लिए भी जाने जाते हैं, जिसकी वजह से मेडिकल साइंस के इस क्षेत्र को काफी लाभ मिला है। उन्होंने मरीजों की सुविधाजनक और किफायती इलाज सुनिश्चित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
2) कैप्टन ब्रिजेश चौटा
कैप्टन ब्रिजेश चौटा दक्षिण कन्नड़ से बीजेपी के प्रत्याशी बनाए गए हैं। कैप्टन चौटा गोरखा रेजिमेंट में सात साल तक भारतीय सेना के लिए सेवा दे चुके हैं। पूर्व सैन्य-अधिकारी कैप्टन चौटा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, जिसकी शायद भारतीय राजनीति को बहुत जरूरत है।

आईआईएम इंदौर से पढ़े कैप्टन चौटा इंडियन आर्मी में रहते हुए असम और मणिपुर में उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं। वे एक उद्यमी भी हैं और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी।
मैंगलुरु लिटरेचर फेस्टिवल के एक प्रमुख आयोजकों में शामिल कैप्टन चौटा 2013 से भाजपा में हैं। वह कर्नाटक प्रदेश बीजेपी में अभी प्रदेश सचिव भी हैं।
3) यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार
बीजेपी ने इस बार कर्नाटक की मैसूर लोकसभा सीट से यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार को उम्मीदवार बनाया है। मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट श्री वाडियार नाम के ही महाराजा हैं, क्योंकि भारतीय परंपराओं और विरासत को संरक्षित करने और उसे आगे बढ़ाने में वे खुद को ही पूरी तरह से झोंकते रहे हैं।

मैसूर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए वे हमेशा ही सक्रिय रहे हैं। वे मैसूर के बहुमूल्य इतिहास और विरासत को वर्तमान से जोड़ने वाली युवा कड़ी की तरह हैं, जिसकी वजह से भारतीय परंपरा से एक नया आयाम जुड़ रहा है।
4) डॉ बसवराज क्यावतूर
डॉ बसवराज क्यावतूर को भाजपा ने कर्नाटक के ही कोप्पल से अपना उम्मीदवार बनाया है। पेशे से ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ बसवराज समाज कल्याण के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं। केएस अस्पताल के प्रॉपराइटर डॉ बसवराज मेडिकल कैंप, स्वास्थ्य जागरूकता और विभिन्न समाजिक गतिविधियों में अपने योगदान के लिए मशहूर हैं।

5) अनिल एंटनी
केरल की पथानामथिट्टा सीट से अनिल एंटनी बीजेपी के उम्मीदवार हैं। अनिल एंटनी अब भारतीय राजनीति में पहचान के मोहताज नहीं हैं। लेकिन, इनका राजनीति से अलग एक और किरदार भी है, जिससे दुनिया के कई मंचों पर भारत का नाम आगे बढ़ाने में सहायता मिली है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके एंटनी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें उनके कार्यों के लिए अनेकों अवॉर्ड मिल चुके हैं।
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस 2023, यूरोपियन यूनियन विजिटर प्रोग्राम 2022, ऑस्ट्रेलिया-इंडिया यूथ डायलॉग 2022 और जापान के विदेश मंत्रालय के 'फ्यूचर ग्लोबल लीडर' कार्यक्रम में उनकी भागीदारी ने उन्हें दुनिया भर में प्रशंसा का पात्र बनाया है।
6) राजीव चंद्रशेखर
राजीव चंद्रशेखर अभी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। पार्टी ने उन्हें केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से उतारा है। राजीव चंद्रशेखर तो बहुमुखी प्रतिभा के प्रतीक बन चुके हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में अपने खास और महत्वपूर्ण योगदान की वजह से बहुत कम उम्र में समाज के लिए उनका काफी योगदान रहा है।

आज वे राजनेता हैं, लेकिन उनका बैकग्राउंड एंटरप्रेन्योरशिप, मीडिया और जन सेवा से भी जुड़ा है। वह उद्यमी भी हैं और निवेशक भी। अभी फुलटाइम राजनेता बन चुके हैं, लेकिन जिस क्षेत्र में माहिर हैं, उसमें उनका ज्ञान भरपूर काम आ रहा है।
आईटी फील्ड में उनका योगदान i486 प्रोसेसर की डिजाइनिंग से भी जुड़ा है तो दूरसंचार उद्योग में वे बीपीएल मोबाइल की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं।
आज एक सांसद के रूप में वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, टेक्नोलॉजी इनोवेशन से लेकर शासन में सुधार के लिए नीतियां बनाने में अपने कौशल को लगा रहे हैं। वह जिस क्षेत्र से जुड़े हैं, उससे भारता का भविष्य तैयार हो रहा है।
राजनीति और कारोबार से अलग भी उनकी अपनी पहचान है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण शामिल हैं। उन्होंने सशस्त्र सेना और पूर्व सैनिकों के लिए समर्पण दिखाया है, जिसके लिए उन्हें वेस्टर्न कमांड जीओसी-इन-कामंडेशन से भी सराहा जा चुका है।
भारत में अनेकों सम्मान और अवॉर्ड पा चुके चंद्रशेखर को 2007 में इलेनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शिकागो आईआईटी ग्लोबल सर्विस अवॉर्ड से भी नवाज चुका है।
7) एमएल अश्विनी
केरल की कासरगोड लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी ने एमएल अश्विनी को उतारा है। अश्विनी की प्रतिभा का परिचय कराने के लिए सिर्फ इतना ही काफी है कि वह एक ऐसी ओजस्वी वक्ता हैं, जो 6 भाषाओं में धारा-प्रवाह बोल सकती हैं।

उनकी पहचान एक ऐसी युवा टैलेंट के रूप में होती है, जिन्होंने मनजेश्वर की एक ब्लॉक पंचायत सदस्य रहते हुए खुद को एक समर्पित राजनेता के तौर पर स्थापित किया है
8) राधेशाम राठिया
बीजेपी ने इस बार छत्तीसगढ़ की रायगढ़ (अनुसूचित जनजाति) सीट से राधेशाम राठिया को उम्मीदवार बनाया है। राठिया भाजपा के ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने मात्र 23 साल की उम्र से ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी निभाने के साथ अपना सियासी करियर शुरू किया है।

अपने गांव के उपसरपंच से लेकर वे निर्विरोध प्रधान चुने जा चुके हैं। उन्होंने रायगढ़ जिला पंचायत सदस्य से लेकर जनपद पंचायत के अध्यक्ष तक की भूमिका निभाई।
9) भोजराज नाग
भोजराज नाग छत्तीसगढ़ के ही कांकेर (ST) सीट से बीजेपी प्रत्याशी बने हैं। ये बैगा जनजाति से हैं और शीतला माता के अनुयायी हैं। आदिवासी परंपराओं के मुताबिक ये भोजली उत्सव में भी शामिल होते हैं। इस उत्सव में उनकी कुल देवी शरीर पर नियंत्रण कर लेती है और विभिन्न तरह की परेशानियों से मुक्ति दिलाती है।

10) महेश कश्यप
ये छत्तीसगढ़ की बस्तर (ST) लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं। ये देश के उस इलाके से आते हैं, जहां नक्सलवाद की जड़ें अब उखड़ रही हैं। ये सरपंच हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे हैं।

यह लंबे समय से बस्तर में धर्मांतरण के विरोध में जागरूकता अभियान चलाकर उसके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। राष्ट्रवादी नेता के रूप में इन्होंने बस्तर को तमाम चुनौतियों से निकालने में बड़ी सहायता की है।












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