चाचा-भतीजे की 'जंग' में नए पवार की एंट्री! दिलचस्प हो चुका है बारामती लोकसभा सीट का सीन

महाराष्ट्र अजित पवार की पार्टी को असली एनसीपी का दर्जा मिलने के बाद शरद पवार के परिवार की राजनीतिक दरार और चौड़ी होती जा रही है। परिवार की सियासत में अब युगेंद्र पवार नाम के शख्स की एंट्री हुई है।

युगेंद्र पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के छोटे भाई श्रीनिवास पवार के बेटे हैं और अभी तक उनका राजनीति से दूर का ही नाता रहा था। लेकिन, विदेश से पढ़ाई कर लौटने के बाद उनकी राजनीति में दिलचस्पी बढ़ गई है।

baramati pawar family twist

शरद पवार के पक्ष में झुके अजित पवार के भतीजे
चाचा शरद पवार से जारी राजनीतिक द्वंद में अजित पवार को अपने भाई श्रीनिवास का पूरा साथ मिलता रहा है। लेकिन, उनके बेटे और डिप्टी सीएम के भतीजे युगेंद्र पवार का दिल अपने चचेरे दादा शरद पवार के लिए अभी ज्यादा धड़क रहा है।

बुधवार को वे बारामती में एनसीपी शरदचंद पवार (शरद पवार की पार्टी का नया नाम) की पार्टी के दफ्तर में गए और चचेरे दादा के कहने के मुताबिक ही काम करने का संकल्प जताया।

उनका कहना है, 'मैं वही करूंगा, जो मेरे दादा (शरद पवार) कहेंगे। मैं उस किसी भी प्रत्याशी के लिए प्रचार कहूंगा, जिसके लिए वह मुझसे प्रचार करने को कहेंगे।'

बारामती में ननद-भाभी के बीच हो सकता है मुकाबला
बारामती लोकसभा सीट से अभी शरद पवार की बेटी और युगेंद्र की चचेरी बूआ सुप्रिया सुले सांसद हैं। लेकिन, माना जा रहा है कि इस चुनाव में उनके खिलाफ अजित पवार की पत्नी सुनेत्र पवार ताल ठोक सकती हैं। इसलिए, ननद-भाभी की संभावित चुनावी जंग के चलते महाराष्ट्र की यह सीट पूरे देश की हॉट सीट बनती जा रही है।

चाची नहीं, बूआ के पक्ष में प्रचार करेंगे युगेंद्र पवार!
ऐसे में जिस तरह से युगेंद्र ने शरद पवार के कहने के मुताबिक प्रचार करने की बात कही है, उससे साफ है कि अगर उनके सामने चाची और बूआ होंगी तो वह सुप्रिया सुले के पक्ष में चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे। इससे पवार के परिवार के बीच यह एक नया समीकरण उभरता दिख रहा है।

अजित पवार के दिखाए रास्ते पर चलेंगे उनके भतीजे!
अजित पवार की ओर से पहले इस तरह की बातें सामने आ चुकी हैं कि अगर वे शरद पवार के बेटे होते तो उन्हें सुप्रिया सुले के मुकाबले पार्टी में ज्याद तबज्जो दी गई होती। लेकिन, युगेंद्र पवार का बुजुर्ग पवार के प्रति नजरिया अलग दिख रहा है।

दिलचस्प बात ये है कि अपनी राजनीति के लिए अजित पवार ने जिस तरह अपने चाचा से किनारे होने का फैसला किया है, उसी तरह से अब उनके भतीजे उन्हीं के बताए सियासी रास्ते पर चलना चाहते हैं।

अजित पवार के बेटे पहले से हैं राजनीति में सक्रिय
युगेंद्र के चचेरे भाई और अजित पवार के बेटे पार्थ पवार 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव हार चुके हैं। इस बर फिर से संभावना है कि उसी सीट से लड़ना चाहेंगे। अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार भी इन दिनों महाराष्ट्र की सियासत में सक्रिय दिखते हैं और कई बार राजनीतिक मंच पर पिता के साथ भी नजर आ चुके हैं।

2019 में महाराष्ट्र में सुप्रिया सुले (संयुक्त एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार) को 52.53% वोट मिले थे। जबकि, बीजेपी की प्रत्याशी (संयुक्त शिवसेना गठबंधन उम्मीदवार) को 40.61% वोट मिले थे।

मौजूदा चुनाव में शिवसेना और एनसीपी में विभाजन और अजित पवार के एनडीए और उद्धव ठाकरे के इंडिया ब्लॉक में आ जाने की वजह से समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है।

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