Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस पर इतना निशाना क्यों साध रहे हैं पीएम मोदी, बीजेपी के इस गेमप्लान को समझिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस के खिलाफ अपना भाषण एक तरह से वहीं से शुरू किया, जहां पर लोकसभा में समाप्त किया था। उनके निशाने पर पूरी तरह से कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार ही रहा।
सवाल है कि लोकसभा चुनावों से पहले यह कौन सी रणनीति है, जिसके माध्यम से भाजपा कांग्रेस को पूरी तरह से असहज करना चाहती है। अगर पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में संसद के आखिरी दोनों भाषणों को देखें तो लगता है कि बीजेपी आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को ही एक बार फिर से अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में सेट करना चाहती है।

कांग्रेस की सहयोगी के बाण से ही किया वार
यह रणनीति उस कांग्रेस के लिए है, जो इस समय विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक में भी बहुत कमजोर पड़ती दिख रही है। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान का हवाला देकर निशाना साधा कि क्या कांग्रेस पार्टी अबकी बार 40 सीटों का आंकड़ा भी पार कर पाएगी।
कांग्रेस के लिए बीजेपी का गेमप्लान
उन्होंने कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि कांग्रेस कम से कम 40 सीटें सुरक्षित कर लेने में सक्षम हो जाए। दरअसल, कांग्रेस की अतीत से भाजपा खुद को अभी तक ऐसे मुद्दे उखाड़ लाने में सक्षम मानती है, जिसमें कांग्रेस को उसी की रणनीति में घेरना काफी आसान हो सकता है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से कांग्रेस नेता राहुल गांधी जाति जनगणना, जितनी आबादी उतना हक और आरक्षण जैसे मुद्दों पर जबरदस्त तरीके से जुबानी अभियान चलाए हुए हैं।
कांग्रेस का इतिहास उजागर कर बैकफुट पर भेजने की रणनीति
पीएम मोदी और बीजेपी को लगता है कि इन सारे मुद्दों पर कांग्रेस और गांधी परिवार को उन्हीं के इतिहास को उजागर करके बैकफुट पर लाया जा सकता है।
जैसे राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरने के लिए सरकार में सचिव स्तर के अधिकारियों में ओबीसी की कमी का मसला उठाया था। इसपर पीएम मोदी ने कहा, 'कुछ लोगों को देर से चिंता हुई है कि सरकार में ओबीसी वरिष्ठ पदों पर क्यों नहीं हैं। दरअसल, इसके जड़ में पंडित नेहरू का रवैया है। जब इतने लंबे समय तक उन्हें आरक्षण से वंचित रखा गया तो वे ऊंचे पदों तक कैसे पहुंच सकते थे....'
पीएम मोदी ने इसके लिए पंडित नेहरू की उस चिट्ठी का हवाला दिया है, जो उन्होंने 1961 में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा था।
अंबेडकर से लेकर सीताराम केसरी तक के साथ हुए बर्ताव का दिया उदाहरण
इसी तरह से उन्होंने बीआर अंबेडकर को भारत रत्न देने में हुई देरी का मुद्दा छेड़कर कांग्रेस की दुखती रगों को फिर से दबाने की कोशिश की है।
पीएम मोदी ने कहा कि आखिरकार यह भी बीजेपी के समर्थन वाली सरकार की वजह से ही संभव हो पाया। क्योंकि, इससे पहले तो यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान सिर्फ 'परिवार' के सदस्यों को ही दिए गए।
उन्होंने अति पिछड़ी जाति से आने वाले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी में उनके पद से हटाने के लिए उस चर्चित तरीके का भी जिक्र किया, जिनकी जगह पर सोनिया गांधी को यह पद मिला था। पीएम मोदी ने कहा, 'सीताराम केसरी जो कि ईबीसी थे, उन्हें तो सीधे सड़क पर फेंक दिया गया।'
सैम पित्रोदा को लेकर भी गांधी परिवार पर वार
कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली को घेरने के लिए पीएम मोदी ने गांधी परिवार और राहुल गांधी के बेहद करीबी सैम पित्रोदा का बिना नाम लिए उनकी टिप्पणियों को भी सामने रखा।
उन्होंने उनके अब डिलीट किए जा चुके उस ट्वीट का हवाला भी दिया, जिसमें उन्होंने संविधान निर्माण में जवाहर लाल नेहरू के ज्यादा योगदान का दावा किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा, 'एक सज्जन जो विदेश में रहते हैं और परिवार के मार्गदर्शक रहे हैं, उन्होंने हाल ही में बाबा साहेब अंबेडकर को अपमानित करने की कोशिश की.....। ये वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने कुछ साल पहले अपने 'हुआ तो हुआ' जैसी टिप्पणियां करके सुर्खियां बटोरी थीं...'
दरअसल, पित्रोदा की इस विवादास्पद टिप्पणी के बारे में माना जाता है कि उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिखों के नरसंहार को कमतर के लिए दिया था।
कुल मिलाकर का मामला ये है कि कांग्रेस और खासकर उसके नेता राहुल गांधी जिस पिच पर अभी बैटिंग करने की कोशिश करना चाहते हैं, भाजपा के हिसाब से वह विपक्षी पार्टी की राजनीति के लिए उपयुक्त नहीं है।
बीजेपी को लगता है ऐसी पिच पर बोलिंग करना उसके लिए बहुत ही आसान है, जहां कांग्रेस खुद ही आसानी से हिट विकेट हो सकती है।












Click it and Unblock the Notifications